April 21, 2026

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चतुर्थ कृषि रोडमैप तैयार करने के लिए परिचर्चा पर कार्यशाला का आयोजन

चतुर्थ कृषि रोडमैप तैयार करने के लिए परिचर्चा पर कार्यशाला का आयोजन
रिपोर्ट विवेक कुमार यादव
आज चतुर्थ कृषि रोडमैप के निर्माण हेतु बामेती] पटना में एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता माननीय मंत्री] कृषि विभाग, बिहार श्री सुधाकर सिंह द्वारा की गई। इस कार्यशाला में चतुर्थ कृषि रोडमैप में योजनाओं के सुत्रण हेतु पद्मश्री से सम्मानित किसानों] विभिन्न राज्यों के सम्मानित किसानों] एपीडा] इण्डियन इन्टीच्यूट आॅफ पैकेजिंग] विकास फाऊंडेशन तथा बिहार के उद्यमी किसानों तथा कृषि विभाग के पदाधिकारी] बिहार कृषि विश्वविद्याल, सबौर, भागलपुर] भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद] पटना एवं अटारी के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
माननीय कृषि मंत्री ने कहा कि चतुर्थ कृषि रोडमैप की परिचर्चा के लिए देशभर के कृषि से जुड़े पुरस्कृत किसानों तथा विशेषज्ञों की राय ली गयी। अभी चतुर्थ कृषि रोडमैप तैयार करने से पहले अगले एक सप्ताह में कृषि विभाग के तीन महत्वपूर्ण नीति यथा कृषि निर्यात प्रोत्साहन नीति, किसान उत्पादक संगठन नीति और एसेट एलोकेशन नीति पर निर्णय लिया जाएगा। चतुर्थ रोडमैप में विशेषकर फासलों को पाटने के लिए कार्य किया जाएगा। यह रोडमैप ऐसा कृषि रोडमैप होगा, जो देश के लिए दिशा तय करेगा और आने वाली पीढ़ी को ध्यान में रखकर तैयार किया जाएगा। कृषि विभाग द्वारा इस वर्ष अपने संसाधनों से निर्यात के लिए आवश्यक गुणवत्ता जाँच तथा प्रमाणन के लिए आवश्यक निधि की व्यवस्था करेगा। उन्होंने कहा कि कृषि विभाग नीति निर्धारण करने वाला विभाग है और आने वाले कृषि रोडमैप उपादानों की लागत के बजाय, बाजार को ध्यान में रखकर तैयार किया जाएगा।
भारतीय पैकेजिंग के पूर्व निदेशक श्री एन0 सी0 साहा ने चतुर्थ कृषि रोड में पैकेजिंग पर विशेष ध्यान देने का अनुरोध किया। साथ ही] बिहार के जी0आई0 टैैग से प्रमाणित कृषि उत्पादों के पैकेजिंग पर विशेष ध्यान देने की बात कही। उन्होंने मखाना के विकास एवं निर्यात के लिए मखाना बोर्ड के गठन तथा केला के विपणन तथा निर्यात में नालीदार फाईबर बोर्ड बाॅक्स के उपयोग के लिए योजना बनाने का सुझाव दिया। उन्होंने बताया कि बिहार राज्य में 58 हजार सूक्ष्म] लघु और मध्यम उद्यम स्थापित है] जो ज्यादातर खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े हैं] को एक मंच देने की आवश्यकता है।
एपीडा] बनारस के श्री सी0बी0 सिंह ने कहा कि बिहार के लिए कृषि निर्यात नीति लगभग अंतिम चरण में है। चतुर्थ कृषि रोडमैप उत्पादन आधारित न होकर बाजार आधारित करने पर विशेष फोकस देना चाहिए। उन्होंने बताया कि एपीडा के सहयोग से दरभंगा में 6 करोड़ रूपये लागत का पैक हाउस लगाने की अनुमति प्राप्त हो गयी है। एपीडा राज्य से जर्दालू आम और लीची के निर्यात के लिए सहयोग कर रहा है और कतरनी चावल के निर्यात के लिए उनका संस्थान कार्य कर रही है। उद्यमियों को बाजार तक लाने की योजना चतुर्थ कृषि रोडमैप का एक हिस्सा होना चाहिए। भारत सरकार के कृषि उड़ान तथा किसान रेल का फायदा बिहार राज्य को उठाना चाहिए। कृषि उड़ान योजना में पटना भी शामिल है। उन्होंने कहा कि किसानों के विपणन से संबंधित क्षमता संवर्द्धन] परिभ्रमण और जागरूकता कार्यक्रमों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। इसके साथ ही] उन्होंने सभी प्रशिक्षण कार्यक्रमों का अनुश्रवण करने पर भी जोर दिया।
पद्मश्री श्री कवल सिंह चैहान] हरियाणा ने सुझाव दिया कि बिहार मक्का की खेती के लिए प्रसिद्ध है] यहाँ प्रयोग के तौर पर मक्का के स्थान पर बेबीकाॅर्न व स्वीटकाॅर्न की खेती करवाकर प्रोसेसिंग इकाई लगाकर इसके बाजार की व्यवस्था की जानी चाहिए। यह व्यवस्था एफ0पी0ओ0 के माध्यम से भी हो सकती है। भारत के बेबीकाॅर्न व स्वीटकाॅर्न का विदेशों में अच्छी माँग है। मुजफ्फरपुर की लीची विश्व प्रसिद्ध है। लीची के पल्प की माँग पूरी दुनियाँ में है। इसकी खेती को बढ़ावा दिया जाये] लीची के नये बाग लगवाकर एफ0पी0ओ0 बनवाकर लीची की प्रोसेसिंग इकाई लगाकर पल्प का निर्यात किये जाने की व्यवस्था की जाये तथा लीची का जूस भी बिहार में पैक किया जाये। पटसन उद्योग को भी बढ़ावा देने के लिए नीति बनाई जाये। दलहनी फसलों को बढ़ावा देने के लिए 75 प्रतिशत अनुदान पर बीज किसानों को देना, दाल की खरीद की एम0एस0पी0 पर व्यवस्था करना या दाल प्रसंस्करण इकाई एफ0पी0ओ0 के माध्यम से लगवाकर बाजार से जोड़ना] कृषि बाजार व्यवस्था के लिए कृषि उत्पादों के मूल्यवर्धन पर कार्य करना, ऐेसे कार्याें पर अनुदान देना, बिहार एस0एफ0ए0सी0 को कापर्स निधि के माध्यम से संस्थागत निवेश को बढ़ाना तथा एफ0पी0सी0 को मजबूत करना है।
पद्मश्री श्री चंद्रशेखर सिंह] बनारस के बीज उत्पादक एवं प्रसंस्करण करने वाले किसान ने कम पानी में धान की खेती के लिए धान की सीधी बुवाई तथा प्राकृतिक खेती/जैविक खेती के लिए उपभोक्ता आधारित बाजार हेतु कोरिडोर बनाने पर सुझाव दिया। उन्होंने गेहूँ के डंठल से जूस पीने वाले स्ट्रा बनाने की विधि बताई, जिससे प्लास्टिक स्ट्रा से छुड़कारा मिल सके। उन्होंने किसानों को एग्री इंटरपेनियोर बनाने पर विशेष बल दिया।
राजस्थान के किसान श्री लक्ष्मण सिंह, लोपाड़िया ने फसल चक्र में पशुचारा तथा छोटे-छोटे तालाब का निर्माण कर जलप्रबंधन एवं जलसंचयन की बात कही] जिसके लिए उन्होंने राजस्थान में चैका माॅडल, जिसको लोपाड़िया माॅडल के नाम से भी जाना जाता है] को अपनाकर भूमि एवं जल संरक्षण की बात बतायी। उन्होंने माननीय मंत्री सहित विभागीय पदाधिकारी को 11 नवम्बर] 2022 को अपने गाँव में आने का निमंत्रण दिया। उस दिन उस क्षेत्र के सभी गाँवों में यात्रा का आयोजन कर अपने संसाधनों को संरक्षण करने के लिए लोगों को जागरूक किया जाता है।
श्री करण सिंह निरवाण ने गोपालन तथा फसल विविधीकरण पर अपने विचार रखे। उन्होंने शुद्ध देशी खान-पान के लिए देशी गाय तथा कीट-व्याधि के रोकथाम के लिए रासायनिक कीटनाशी के बजाए] देशी तरीके से तैयार किए गए कीटनाशी के उपयोग पर विशेष बल दिया। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार अपनी नीति ठीक करे और किसान अपनी नियत ठीक करे।
कर्नाटक के किसान श्री ए0आर0पाटिल ने ऐसी कृषि प्रणाली विशेषकर जिसमें एग्रो फाॅरेस्ट्री] चारा के लिए चारागाह तथा तालाब का समावेश हो] को अपनाने पर बल दिया।
श्री बसंत जी ने स्थानीय स्तर पर कृषि औजार तैयार करने के लिए कारीगरी नीति पर अपने विचार रखे और उन्होंने बामेती के निदेशक से अनुरोध किया कि बामेती को अल्प अवधि और दीर्घ अवधि के फाॅलोअप की जवाबदेही लेनी पड़ेगी।
जमुई के किसान श्री अर्जून मंडल ने राज्य में औषधीय एवं सुगंधित पौधों के बढ़ावा पर अपने विचार रखे। उन्होंने औषधीय एवं सुगंधित पौधों के प्रोपोगेशन तथा हर्बल कीचन गार्डेन की योजना के लिए अनुरोध किया। साथ ही] उन्होंने बताया कि औषधीय एवं सुगंधित पौधों में सबसे बड़ी समस्या उसे सुखाकर उसे प्रसंस्कृत करने की है] जिसपर सरकार को ध्यान देना चाहिए।
जौनपुर के श्री रजनीश सिंह ने फार्म टू प्लेट के साथ-साथ समेकित कृषि प्रणाली जिसमें मत्स्यपालन] मुर्गीपालन] अजोला और नेडेप कम्पोस्ट के साथ देशी गोपालन पर ध्यान देने की बात कही।
श्री आकाश जी ने कैपिटल आधारभूत संरचना निधि के लिए योजनाओं में प्रावधान की बात कही।
आई0आई0टी0] पटना के निदेशक प्रो0 श्री टी0एन0 सिंह ने बाजार को किसान के पास लाने की वकालत की। उन्होंने कहा कि देशी खायेंगे तो देश के प्रति सोचेंगे। उन्होंने बिहार में और बिहार के लिए विकसित ड्राॅन टेक्नोलाॅजी और ड्राॅन को उड़ाने के लिए पायलट को प्रशिक्षित करने की जिम्मवारी उनके संस्थान द्वारा लेने की बात कही गयी।
पद्मश्री किसान चाची] श्रीमती राजकुमारी देवी ने उनकी पहचान के लिए कृषि विभाग के सहयोग हेतु आभार व्यक्त की। उन्होंने महिला सशक्तीकरण के साथ-साथ उत्पादन में गुणवत्ता पर विशेष बल देने की बात कही।
श्री सुब्रतो घोष ने बिहार में कृषि उत्पादों विशेषकर शहद तथा राज्य में उत्पादित मिर्चा के लिए आवश्यक एन0एम0आर0 टेस्ट की सुविधा हेतु प्रयोगशाला की व्यवस्था करने का अनुरोध किया। मुजफ्फरपुर के किसान श्री दयानंद जी ने बताया कि 25 लाख रूपये के मधु प्रसंस्करण यूनिट लगाने से किसानों का फायदा होगा। उन्होंने मधुमक्खीपालन में अभी सबसे बड़ी समस्या पर ध्यान आकृष्ट करते हुए बताया कि मधुमक्खीपालक बक्सा में ब्रूड चैम्बर से शहद निकालते हैं] नाकि हनी चैम्बर से] इसलिए यह आवश्यक है कि किसानों को इस विषय में सही प्रशिक्षण दिया जाए। साथ ही, उन्होंने यह भी बताया कि मधुमक्खी जब फूलों से रस चुसती है तो वहाँ नेक्टर नहीं होने से केवल फूलों पर पड़े नमी को चूसकर शहद की प्रक्रिया करती है जिससे गुणवत्तापूर्ण शहद उत्पादन में कमी आ रही है।
श्री मनीष ने बैक टू भिलेज संस्थान से जुड़ें हैं। उन्होंने स्थानीय संसाधनों से गाँवों में उन्नत कृषि केन्द्र की स्थापना पर बल दिया।
श्री संजीव कुमार] चकवारा वैशाली ने सब्जी उत्पादक किसानों के बीज के बेचने के लिए आवश्यक प्रमाणीकृत बीज के स्थान पर स्थानीय स्तर पर उत्पादित बीज प्रजातियों की प्राथमिकता दी जाए। किसान दिवस का आयोजन किया जाए। विभागीय कार्यक्रमों में किसानों को अध्यक्ष बनाया जाए। विभागीय प्रशिक्षण में किसानों को साधनसेवी के रूप में आमंत्रित किया जाए। सभी समाचार पत्रों में खेत-खलिहान पर एक पन्ना प्रकाशित करने के लिए समाचार पत्रों को निदेशित किया जाए।
प्रो0 श्री सुबोध कुमार मेहता, दिल्ली विश्वविद्यालय ने पानी की विरासत तथा मिट्टी का पालन पोषण पर विशेष बल दिया। उन्होंने अपना भोजन अपनी विरासत के लिए कार्य करने का अनुरोध किया। बिहार में न्यूनतम समर्थन मूल्य को सशक्त करने के लिए अनुरोध किया। उन्होंने मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड के साथ किसान स्वास्थ्य कार्ड की भी वकालत की और 10&12 पंचायतों को मिलाकर कलस्टर फार्मिंग का सुझाव दिया।
निदेशक] खादी ग्राम उद्योग ने कहा कि तीन चीजों को फोकस करना है यथा कृषि उत्पादन की गुणवत्ता को बढ़ाना जिसके लिए प्रसंस्करण के महत्व पर विशेष ध्यान देते हुए किसानों को कृषि उद्यमी बनाना होगा और विभागों के बीच समन्वय स्थापित कराना होगा।
अंत में] निदेशक बामेती द्वारा सभी गणमान्य अतिथियों को तोहफा के रूप में बिहार में उत्पादित मखाना] चाय] मड़ुआ का आटा] काला गेहूँ का आटा उपहार स्वरूप भेंट किया गया।
इस बैठक में कृषि विभाग के विशेष सचिव श्री रवीन्द्रनाथ राय] प्रभारी प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना श्री जयकान्त कुमार सिंह] निदेशक बामेती] श्री आभांशु सी0 जैन] उप निदेशक शष्य] शिक्षा] श्री अनिल कुमार झा सहित अन्य पदाधिकारीगण उपस्थित थे।

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