महुआ के पंचमुखी चौक स्थित मृतक के घर पर लोगों की उमड़ी भीड़
महुआ के पंचमुखी चौक स्थित मृतक के घर पर लोगों की उमड़ी भीड़
बाबा विश्कर्मा की मूर्ति विसर्जन के दौरान डूब गया था राजकुमार पासवान
महुआ, नवनीत कुमार
महुआ वाया नदी में डूबे व्यक्ति का शव सोमवार की सुबह घर पहुंचते ही परिजनों में हाहाकार मच गया। वही उसे देखने के लिए लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। जितने लोग थे सभी के मुंह से मृतक और उसके परिजन को देकर आह निकल रही थी।
मृतक 40 वर्षीय राजकुमार पासवान महुआ नगर पंचायत के पंचमुखी चौक निवासी स्व देवेंद्र पासवान का पुत्र था और वह मेहनत मजदूरी कर घर परिवार को चलाता था। बताया जा रहा है कि राजकुमार पासवान बीते रविवार की शाम नगर पंचायत के ही वाया नदी में काली घाट पर बाबा विश्वकर्मा के मूर्ति विसर्जन में गया था। वह मूर्ति के साथ नहाने के लिए नदी में चला गया। इस बीच गहरे पानी में चले जाने के कारण वह डूब गया। उसका शव देर रात गोताखोरों ने काफी मशक्कत के बाद निकाला। इधर शव घर लाया गया, जहां उसे देखने के लिए पूर्व वार्ड पार्षद अरुण कुमार सिंह, सत्येंद्र कुमार राय, उपेंद्र कुमार यादव, बालेंद्र दास, शत्रुघ्न राय, प्रमोद पासवान, श्रीकांत पासवान, बृजेश पटेल, डॉ राजीव कुमार उर्फ राजू, उपेंद्र यादव आदि पहुंचे और घटना पर दुख जताया। उन्होंने मृतक के परिजनों को इस दुख की घड़ी में धैर्य और साहस रखने के लिए ढांढस बंधाया। यहां लोगों ने मृतक के परिजनों को आपदा कोस से मुआवजा दिलाने की मांग की। मौके पर पुलिस भी पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए हाजीपुर भेज दिया। वहीं इसी नदी के काली घाट पर डूबे महुआ पुराना बाजार निवासी दीनानाथ गुप्ता की हालत में सुधार बताया गया। उसे सदर अस्पताल में इलाज चल रहा है। यहां रविवार की शाम मूर्ति विसर्जन के दौरान बाया नदी में दो व्यक्ति डूब गए थे।
मानती की तो टूट गया सहारा:
महुआ पंचमुखी चौक निवासी मृतक राजकुमार पासवान की पत्नी मानती का तो सहारा टूट गया। अब वो किसके सहारे जीवन काटेगी। वह पति के शव पर सिर पटक कर विलाप कर रही थी और बेहोश हो जा रही थी। लोग उसे पानी के छींटे देकर होश में ला रहे थे। राजकुमार पासवान मेहनत मजदूरी कर पत्नी और सात बच्चों को पालन पोषण करता था। मृतक की छह पुत्री काजल, नंदनी, करीना, सीमा, अंशु और अनुष्का तो पिता की मौत से बेसहारा हो गई है। काजल और नंदिनी की शादी हो चुकी है। एक पुत्र 5 वर्षीय अंकित तो सबका मुंह निहार रहा था। उसके सिर से पिता का साया उठ गया।
