April 17, 2026

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नहाए खाए के साथ लोक आस्था का चार दिवसीय महापर्व छठ शुरू

नहाए खाए के साथ लोक आस्था का चार दिवसीय महापर्व छठ शुरू

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व्रतियों ने पवित्र स्थान कर किया सात्विक भोजन, नारायणी स्नान के लिए महुआ से गए 75 हजार महिला श्रद्धालु, नहाए खाए के साथ ही छठमय हुआ पूरा। 

वैशाली/ महुआ इलाका लोक आस्था का चार दिवसीय महापर्व शुक्रवार को नहाए खाए के साथ शुरू हो गया। व्रतियों ने पवित्र स्नान कर सात्विक भोजन किया और इसी के साथ व्रत का अनुष्ठान रखा। नारायणी स्नान के लिए महुआ से भारी संख्या में श्रद्धालु हाजीपुर पहुंचे और डुबकी लगाई। उन्होंने स्नान के साथ खरना के लिए नारायणी नदी से जल लेकर वापस हुए।
व्रतियों ने सुबह में नारायणी तट के अलावा विभिन्न जलाशयों पर पहुंचकर स्वच्छ स्नान किया। उन्होंने सूर्य देवता को जल दिए और सात्विक भोजन कर विश्व कल्याण की कामना के साथ व्रत का अनुष्ठान रखा। महुआ हाजीपुर मार्ग से तो रात के 2:00 बजे से ही श्रद्धालुओं का नारायणी स्नान के लिए जाना शुरु हो गया था। इस मार्ग से 75 हजार से भी अधिक महिला श्रद्धालु बाइको, विभिन्न यात्री वाहनों के अलावा निजी वाहनों से नारायणी स्नान के लिए हाजीपुर गए। इधर महुआ से गुजरने वाली वाया नदी के विभिन्न घाटों के अलावा गांव के विभिन्न जलाशयों पर व्रतियों ने स्नान किया। इस बीच एक दूसरे को नाक से लेकर पूरे मांग को सिंदूर से भरा और अखंड सौभाग्य की कामना की। महिलाओं में एक दूसरे को सिंदूर लगाने की परंपरा उभड़ी। व्रतियों ने अरवा चावल के भात, चना के दाल और कद्दू की सब्जी ग्रहण किया। व्रत को लेकर पूरा इलाका भक्ति में सराबोर हो गया है। लोग सारे कामों को छोड़कर छठ के पूजन सामग्री को जुटाने में लगे हैं।
मिट्टी के चूल्हा बनाने के साथ गेहूं सुखाने में व्यस्त रही व्रतियां:
नहाए खाए के साथ खरना का प्रसाद बनाने के लिए व्रतियां मिट्टी के चूल्हे और गेहूं सुखाने में व्यस्त रहीं। इस पर्व पर स्वच्छता का पूरा ख्याल रखा जाता है। पर्व में दूसरे दिन खरना का महाप्रसाद मिट्टी के नए चूल्हे पर आम के जलावन से बनाए जाते हैं। इसके लिए व्रतियों ने गेहूं धोकर सुखाए उसे स्वच्छता के बीच पिसवाएंगी और उसी आटा से खन्ना का रोटी और पर्व पर भगवान के भोग के लिए ठेकुआ बनेगा। व्रतियों ने गेहूं को धोकर उसे स्वयं बैठकर धूप में सुखाएं ताकि उसे ना कोई छुए या कोई पक्षी उसे जूठन कर दें। इस पर्व पर एक एक पूजन सामग्री को नियम के अनुसार स्वच्छता के बीच रखी जाती है।
चीनी से महंगा बिक रहा गुड:
छठ महापर्व पर खरना का खीर गुड़ से ही बनता है। गुड़ को शुद्ध माना गया है। इस कारण खरना का खीर गुड़ से ही बनाई जाती है और रोटी बनाकर व्रतिया नेवज काढती हैं। वह उसे परिजनों को प्रसाद के रूप में देती हैं। पर्व पर खरना का प्रसाद बनाने को लेकर गुड़ की अप्रत्याशित बिक्री हुई यहां चीनी 42 रुपए के किलो बिकी तो गुड़ 50 से 55 के किलो लोगों को खरीदना पड़ा। महंगाई के बावजूद लोगों की आस्था पर्व पर भारी पड़ रही है। कर्ज लेकर ही सही लोग पर्व के लिए हर एक पूजन सामग्री को जुटाने में लगे हैं।
साफ-सफाई के अभाव में ग्रामीण इलाकों के जलाशयों का हाल बेहाल:
साफ-सफाई के अभाव में महुआ के ग्रामीण इलाकों के सभी जलाशयों का हाल बेहाल है। यहां सारे छठ घाट खतरनाक बने हैं और उसमें पानी काफी गंदा है। इस पर न तो पदाधिकारियों का ध्यान गया और ना ही जनप्रतिनिधियों का। लोगों का कहना है कि गंदे जलाशयों में व्रतियों को अर्ध्य देना मजबूरी होगा। पानी कम होने के कारण ग्रामीण जलाशय काफी गंदे हैं। उसमें ना तो चुना पाउडर डाला गया और ना ही ब्लीचिंग। यहां सारे प्रशासनिक दावे हवा-हवाई साबित हुए हैं। ग्रामीण इलाकों में लोग अपने भरोसे जलाशयों की सफाई कर व्रतियों के लिए छठ घाटों की तैयारी की है।

REPORT-NAVNEET MUMAR, MAHUA VAISHALI

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