April 23, 2026

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*1 मई को मनाया जाने वाला मजदूर दिवस मजदूरों को चिढ़ाता नजर आया काम नहीं मिलने से झेलनी पड़ रही आर्थिक संकट की मार*

*1 मई को मनाया जाने वाला मजदूर दिवस मजदूरों को चिढ़ाता नजर आया काम नहीं मिलने से झेलनी पड़ रही आर्थिक संकट की मार*

*(गुड्डू राज)*

दरभंगा लहेरिया सराय पालीराम चौक स्थित काम के इंतजार में बैठे मजदूर देश में हर साल 1 मई को मनाया जाने वाला मजदूर दिवस मजदूरों को चिढ़ाता नजर आया। लहेरिया सराय पालीराम चौक स्थित पर बैठे मजदूरों का भी कुछ ऐसा ही हाल है। यहां हजारों मजदूर रोजाना अपने घर से काम की तलाश में निकलते हैं,लेकिन मायूस होकर उन्हें घर लौटना पड़ रहा है।अधिकांश मजदूरों के हाथ में काम नहीं है। ज्ञात रहे कि लहेरिया सराय पालीराम चौक पर रोजाना मजदूरों की मंडी लगती है। यहां शहर से और आसपास के गांव से मजदूर सुबह के वक्त इकट्ठा होते हैं और लोग यहां आकर अपनी जरूरत के अनुसार काम कराने के लिए मजदूरों को लेकर जाते हैं। मंडी में जैसे ही कोई व्यक्ति बाइक से आकर रुकता है मजदूरों का झुंड काम की उम्मीद में उसे घेर लेता है। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं।मजदूरी नहीं मिल पाने के कारण कई ने तो मजदूर मंडी में आना ही छोड़ दिया है,वहीं कई उम्मीद लेकर सुबह सबेरे यहां खड़े दिखाई दे सकते हैं। ज्ञात रहे कि कोरोना महामारी के चलते बाजार में कोई निकल नहीं रहे है और व्यवसाय 4 बजे तक बंद करने का आदेश जिला प्रशासन ने दिया हैं,इसके कारण मजदूरों को सामान्य दिनों की तरह हर दिन काम नहीं मिल पा रहा है। बड़ी संख्या में मजदूरों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है और मुश्किल से परिवार पाल रहे हैं। मजदूर दिवस पर कुछ मजदूरों ने बताया कि कोरोना महामारी के चलते बीते करीब कई महीने से यहां आने वाले मजदूरों को हर दिन रोजगार नहीं मिल पा रहा है। मजबूरन हर दिन करीब 1000 मजदूरों में से आधे से अधिक मजदूर बिना रोजगार के ही वापस घर लौट जाते हैं। लेकिन फिर भी दूसरे दिन उम्मीद के साथ वापस मंडी आते हैं। मजदूर की हालात ये हैं कि महंगाई तो बहुत बढ़ गई है और काम नहीं मिलने की वजह से परिवार के आर्थिक हालात बहुत कमजोर हो गए हैं। कर्ज लेने को लेकर मजबूर
मजदूर राम कृष्ण ने बताया कि हर दिन मजदूरी की तलाश में मजदूर मंडी में आता है। लेकिन यहां किसी दिन काम मिल जाता है और किसी दिन काम नहीं मिलता। महंगाई और बीमारी के इस दौर में परिवार पालना बमुश्किल हो गया है। कर्जा लेकर बच्चों को जैसे-तैसे पेट भरने को मजबूर हूं। बमुश्किल पल पा रहा है परिवार
मजदूरी की तलाश में बीते एक साल से रोजगार का विकट संकट चल रहा है। ऐसे में कई दिन तो बिना कमाए ही घर जाना पड़ता है। परिवार पालने में बड़ी मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है।

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