April 21, 2026

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खेतों में तोड़ी, सरसों, राई की लहलहाती फसल में पीले पीले फूल देख किसान गदगद

खेतों में तोड़ी, सरसों, राई की लहलहाती फसल में पीले पीले फूल देख किसान गदगद
इस बार किसानों ने काफी भूमि पर कर रखी है तेलहन की खेती
महुआ, रेणु, नवनीत
खेतों में लहलहाती तेलहन की फसल में पीले पीले फूल देख किसानों के हौसले बुलंद हैं। वे फसल की सिंचाई कर उसमें रसायनिक खाद डाल रहे हैं। ताकि फसल अच्छी हो। हालांकि यूरिया की कमी किसानों को अच्छी फसल लेने में बाधा डाल रही है। गांव के खेतों में तेलहन की फसल में खिले फूल से ऐसा लग रहा है जैसे धरती ने पीली चादर ओढ़ ली है।
यहां तेलहन उत्पादक किसानों ने बताया कि कई वर्षों बाद इस बाद मौसम फसल के लिए अनुकूल दिख रहा है। उन्होंने तेलहन की खेती में तोड़ी, सरसों, राई की फसल लगाई है। अगात लगाई गई फसल में पीले पीले फूल छाने लगे हैं। किसान उसमें सिंचाई कर साथ में यूरिया भी डाल रहे हैं। यहां तेलहन उत्पादक किसान दीपक कुमार, रंजीत कुमार सिंह, अनिल सिंह, अमन कुमार, सूर्यकांत सिंह, रामप्रवेश राय, सुरेंद्र राय, उपेंद्र राय, उमा प्रसाद, धनराज के राकेश सिंह, वीरेंद्र सिंह, अरविंद कुमार, मानपुरा के सुरेंद्र राय, प्रवेश राय, अर्जुन राय, हरेंद्र राय, मुसाफिर राय आदि ने बताया कि कई वर्षों बाद तेलहन फसल के लिए मौसम अनुकूल दिख रहा है। इस बार आश्विन महीने के अंतिम और कार्तिक के प्रथम सप्ताह में जिन किसानों ने तेलहन की फसल लगा दी थी। जिनके खेतों में पीले पीले फूल छाने लगे हैं। किसानों का यह भी कहना है कि हथिया नक्षत्र में अगर तोड़ी, सरसों, राई तेलहन फसल की बुआई कर दी जाती है तो फसल अच्छी होती है। लेट बुआई होने से अधिक ठंड में फसल की उपज कम जाती है। तेलहन की फसल में एक निकौनी के बाद दो सिंचाई के साथ यूरिया दिए जाने से उपज अच्छी ली जा सकती है। इस बार अच्छी फसल लेने के लिए मौसम अनुकूल हुआ तो यूरिया की कमी दगाबाजी कर रही है।
तेलहन में तोड़ी की अधिक होती है खेती:
महुआ अनुमंडल क्षेत्र तेलहन उत्पादन के लिए मशहूर माना गया है। यहां किसान तेलहन की खेती में तोड़ी की बुआई सबसे अधिक करते हैं। किसानों का कहना है कि इस चिकनी और दोमट मिट्टी पर तोड़ी की फसल अच्छी होती है। यहां किसान राई की भी खेती करते हैं, लेकिन इसके दाने काफी छोटे होने के कारण उपज कम देती है। जिससे किसान इसकी खेती कम करते हैं। इसी तरह पीली सरसों की भी उपज कम होने के कारण किसानों ने इसकी खेती से मुंह मोड़ ली है। हालांकि पीली सरसों का तेल काफी अच्छा होता है। इस पीली सरसों को लोग मसाला में भी उपयोग करते हैं। महुआ अनुमंडल के सभी 6 प्रखंडों में इस बार अधिक भूमि पर तेलहन की खेती किसानों ने की है। अभी तक तेलहन की फसल लायक मौसम अनुकूल रहा है। किसानों का कहना है कि धूप खिलने से तेलहन फसल में फूल खिलते हैं और छीमिया भी लगना शुरू हो जाता है। हालांकि अज्ञात बुवाई वाली तेलहन में छीमिया भी आना शुरू हो गया है।
नकदी फसल के रूप में होती है तेलहन की खेती:
तेलहन की खेती किसान नकदी फसल के रूप में करते हैं। यहां किसानों द्वारा अच्छी खासी भूमि पर तेलहन की फसल लगाई जाती है। वे फसल को तैयार कर नगदी आमदनी करते हैं। किसानों का कहना है कि तेलहन फसल उपज होने के बाद उसकी बिक्री में कोई दिक्कत नहीं आती। वह इसे दरवाजे पर ही व्यापारी पहुंचकर नगदी खरीदारी करते हैं। इसका उधार भी नहीं होता। जो दाम होते हैं वह दरवाजे पर ही मिल जाते हैं। यह फसल तैयार होते ही व्यापारी खरीदारी के लिए घर पर पहुंचना शुरू कर देते हैं। इसके कारण अधिकतर किसान तेलहन में की खेती करते हैं। तेलहन फसल के लिए कुहासा कहर बनता है। कुहासा होने से तेलहन की फसल नाश हो जाती है। किसानों का कहना है कि कुहासा होने से फूलों पर लाही गिरना शुरू हो जाता है और फसल खराब हो जाती है। हालांकि लाही से बचाव को लेकर किसान फसल में छिड़काव भी कर रहे हैं।
कहते हैं कृषि विशेषज्ञ:
तेलहन उत्पादन के लिए मौसम अनुकूल होना जरूरी है। अधिक ठंड के बावजूद धूप खिलने से तेलहन फसल को लाभ मिलती है। वही कुहासे से तेलहन फसल को काफी नुकसान होती है। कुहासा के कारण लाही का प्रकोप होता है। लाही से तेलहन फसल की फूल और दाने खराब हो जाते हैं। लाही एक प्रकार का बहुत ही सूक्ष्म कीड़ा है। जिससे फसल में लगी फूल काले पड़ जाते हैं। ऐसा लगता है जैसे वह जल गई हो। इससे बचाव के लिए फफूंद नाशक और कीटनाशक दवा का छिड़काव किया जाना जरूरी है।
जगन्नाथपुर चौधरी
कृषि विशेषज्ञ, महुआ

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