“पिंजरे के पंछी रे तेरा दर्द न जाने कोए “आलेख :सुधीर मालाकार ।
“पिंजरे के पंछी रे तेरा दर्द न जाने कोए “आलेख :सुधीर मालाकार ।
वैशाली !हाजीपुर, तस्वीर में दिख रहा दृश्य किसी तीर्थ स्थान की नहीं है, बल्कि वैशाली जिला के मुख्यालय हाजीपुर के जंक्शन की है। जहां पर बीपीएससी परीक्षार्थी द्वारा जगह न मिलने के कारण जंक्शन परिसर में ही शरणस्थली बनकर किसी तरह रात गुजरा। वाह रे ! चाचा भतीजा की सरकार । क्या खूब करिश्मा दिखाया । शिक्षक बनाने के नाम पर बिहार के बेरोजगार युवाओं को दर-दर भटकाया । वैशाली को भेजा नेपाल की तराई सीमा पर तो मगध को मिथिला की सीमा पर ।जहां न रहने का कोई ठिकाना न खाने का इंतजाम ,बना दिया परीक्षा केंद्र। सुशासन की लंबी शासन के बाद भी बिहार में किस कदर बेरोजगारी है, इसका जीता जागता नमूना होने वाली प्रतियोगी परीक्षा को देखने के बाद पता चलता है ।आखिर कब तक हम सब जात धर्म के नाम पर सरकार बनाते रहेंगे और बेरोजगारी की इस विषैली दंश झेलते रहेंगे। इसलिए महाकवि प्रदीप ने ठीक ही कहा है :-पिंजरे के पंछी रे , तेरा दर्द न जाने कोए।
