राजयोग के नियमित अभ्यास से मिटते हैं तन-मन के सारे क्लेश: ब्रह्माकुमारी कुंदन बहन
राजयोग के नियमित अभ्यास से मिटते हैं तन-मन के सारे क्लेश: ब्रह्माकुमारी कुंदन बहन
रिपोर्ट :नसीम रब्बानी,बिहार
समस्तीपुर : शिवाजीनगर: प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के द्वारा दुर्गा मंदिर परिसर में आयोजित सात दिवसीय राजयोग मेडिटेशन शिविर के अंतिम दिन भारत की महान प्राचीन विद्या राजयोग की महिमा पर प्रकाश डालते हुए हुए रोसड़ा से आई ब्रह्माकुमारी कुंदन बहन ने कहा कि राजयोग के नियमित अभ्यास से मिटते हैं तन-मन के सारे क्लेश। इससे होती है जन्म-जन्म के लिए हमारी कायाकल्पतरू समान। इससे संबंधों में आती है मधुरता, जीवन में निश्चिंतता, कार्यों में कुशलता और जीवन में परिपूर्णता। हम बनते हैं इससे राजाओं के राजा देव समान और सिखलाते हैं इसे स्वयं शिव भगवान। राजयोग अभ्यास में न कोई समय का बंधन है, न स्थान का, न ही इसमें शरीर की किसी विशेष अवस्था या व्यवस्था का ध्यान रखना होता है। यह मन-बुद्धि का व्यायाम है, इसलिए इसे कोई भी कभी भी कर सकता है और इसका संपूर्ण लाभ प्राप्त कर सकता है। यही कारण है कि राजयोग को सहज राजयोग कहा जाता है। यदि विद्यार्थी इसका अभ्यास करें तो अच्छी एकाग्रता और स्मरण शक्ति प्राप्त कर सकते हैं। एक युवा इसका अभ्यास करे तो अपने मन को व्यर्थ भटकने से बचा सकता है और मनचाही सफलता हासिल कर सकता है। कार्य-व्यवहार में व्यस्त रहने वाले लोग इसके अभ्यास से अपने जीवन को तनावमुक्त बनाकर रख सकते हैं। बुजुर्ग इसके अभ्यास से स्वयं को युवा जैसा ऊर्जावान महसूस करते हैं क्योंकि यह हमारे मन को शक्तिशाली और खुशनुम: बनाता है। मन का सीधा प्रभाव तन पर पड़ता है, अत: इससे कई शारीरिक रोगों का भी निराकरण होता जाता है। तन को रोग होते भी मन निरोग रहता है। राजयोग अभ्यास के अनंत फायदे हैं। हम जिस सकारात्मक उद्देश्य के लिए इसका अभ्यास करें, इसका परिणाम हमें जल्द ही दिखाई देने लगता है।
उन्होंने राजयोग की विधि के बारे में बताते हुए कहा कि स्वयं को मस्तिष्क के बीचों-बीच ज्योति बिंदु आत्मा निश्चय कर सुनहरे लाल प्रकाश की दुनिया परमधाम में निराकार शिव बाबा को याद करना ही राजयोग है। इसके द्वारा आत्मा का कनेक्शन परमात्मा से जुड़ता है और आत्मा रूपी बैटरी चार्ज होने लगती है। हम स्वयं को आंतरिक रूप से सशक्त महसूस करने लगते हैं।
दुर्गा मंदिर परिसर में सात दिवसीय सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। जिसका लाभ सैकड़ों लोगों ने लिया। इसी परिसर में आध्यात्मिक ज्ञान और राजयोग की निःशुल्क क्लास तत्कालीन रूप से चलती रहेगी। प्रखंडवासी इस महान विद्या का लाभ लेने के लिए आमंत्रित हैं।
