वाहन की धक्के से घायल अधेड़ की मौत के बाद शव पहुंचते ही परिजनों में मचा कोहराम
वाहन की धक्के से घायल अधेड़ की मौत के बाद शव पहुंचते ही परिजनों में मचा कोहराम
साइकिल से घर लक्ष्मीपुर बखरी आने के दौरान सुभई में हुआ था हादसा, घटना के कारण गांव में शादी का समारोह पड़ा फीका
महुआ। रेणु सिंह
अज्ञात वाहन की धक्के से घायल अधेड़ का इलाज के दौरान पीएमसीएच में मौत होने के बाद शनिवार की दोपहर शव उनके घर महुआ थाने के लक्ष्मीपुर बखरी गांव लाया गया। जहां शव पहुंचते ही परिजनों में कोहराम मच गया। वहीं उनकी अंतिम दर्शन करने वालों की भीड़ जुट गई। घटना से गांव में मातमी सन्नाटा छाया है।
मृतक करीब 45 वर्षीय रत्नेश कुमार महुआ थाने के लक्ष्मीपुर बखरी निवासी कामाख्या सिंह का पुत्र था और मजदूरी कर घर परिवार का भरण पोषण करता था। रत्नेश बीते गुरुवार की शाम हाजीपुर से मजदूरी कर साइकिल से घर लौट रहे थे। इस बीच सुभई के पास एक चाय नाश्ता के दुकान पर रुके थे कि अज्ञात वाहन ने उन्हें जोरदार ठोकर मार दी। जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें अचेतावस्था में पुलिस उठाकर इलाज के लिए सदर अस्पताल ले गई। बताया जाता है कि जब परिजनों को सोशल मीडिया से जानकारी मिली तो वह शुक्रवार की सुबह दौड़े दौड़े सदर अस्पताल हाजीपुर पहुंचे। जहां उनकी स्थिति चिंताजनक बनी थी। डॉक्टर द्वारा रेफर किए जाने पर के बाद परिजन उन्हें बेहतर इलाज के लिए पीएसीएच ले गए। जहां इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।
पत्नी रिंकी और तीन बच्चों का उठ गया सहारा:
वाहन की धक्के से घायल रत्नेश की हुई मौत से पत्नी रिंकी और तीन बच्चों का सहारा टूट गया। रत्नेश की कमाई से ही घर परिवार चलता था। गरीबों के कारण रत्नेश रोज हाजीपुर साइकिल से जाकर मजदूरी करते थे। पति की मौत से पत्नी रिंकी पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। उसकी चीत्कार से लोगों का कलेजा दहल जा रहा था। अब वह किसके सहारे जीएगी। बच्चों का परवरिश कैसे होगा। इकलौती पुत्री अंजलि और दो पुत्र आयुष व श्लोक का तो रो-रोकर बुरा हाल था। मृतक की पुत्री 19 वर्षीया अंजली की शादी हो चुकी है। जबकि दोनों पुत्र अभी नादान है।
घटना से गांव में शादी समारोह में आई खलल:
शुक्रवार को ही गांव में बरात आने थी जिसको लेकर महिलाएं मंगलगान गा रही थी और बिलौकी मांगने की तैयारी चल रही थी। इसी बीच रत्नेश को पटना में मौत हो जाने की सूचना लोगों को मिली। यह मनहूस खबर मिलते ही लोग गमगीन हो गए और शादी समारोह का जश्न फीका पड़ गया। शादी में ना तो शहनाई बजी और ना ही मंगलगान गाए गए। समय ऐसा था कि ना तो लोग शादी समारोह में लोग खुशी मना रहे थे और ना ही रो रहे थे।
