IAGE के बिहार चैप्टर द्वारा आयोजित दो दिवसीय “पाटलिपुत्र एंडोगिन सम्मेलन” सफलतापूर्वक संपन्न
IAGE के बिहार चैप्टर द्वारा आयोजित दो दिवसीय “पाटलिपुत्र एंडोगिन सम्मेलन” सफलतापूर्वक संपन्न*
*”पाटलिपुत्र एंडोगिन सम्मेलन” हुआ स्त्री रोग संबंधी एंडोस्कोपी के नवाचारों पर विस्तृत चर्चा*
पटना, 24 दिसंबर 2023 : इंडियन एसोसिएशन ऑफ गायनेकोलॉजिकल एंडोस्कोपिस्ट्स (IAGE) के बिहार चैप्टर द्वारा पटना ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी सोसाइटी के सहयोग से पटना के होटल मौर्य में “पाटलिपुत्र एंडोगिन सम्मेलन” सफलतापूर्वक संपन्न हुआ. इस आयोजन का एक सत्र गत 23 दिसंबर को पटना एम्स में कार्यशाला के रूप में आयोजित किया गया था, जिसके बाद आज इस प्रतिष्ठित कार्यक्रम में स्त्री रोग संबंधी एंडोस्कोपी के नवाचारों पर विस्तृत चर्चा की गयी. इस दौरान एंडोस्कोपी यानी कीहोल सर्जरी को लेकर अनुभवी चिकित्सकों ने कहा कि यह ऐसी तकनीक है जो विभिन्न स्त्रीरोग संबंधी और बांझपन संबंधी समस्याओं से जूझ रहे मरीजों को कम समय में ठीक होने, कम दर्द और न्यूनतम असुविधा प्रदान करती है. इस सम्मेलन के आयोजन की अध्यक्ष डॉ. अनिता सिंह थीं और संयुक्त सचिव डॉ. मुक्ता अग्रवाल थीं.
सम्मेलन का उद्घाटन आईएजीई के अध्यक्ष सम्मानित डॉ. पंडित पलस्कर ने किया, जो मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम में शामिल हुए. आईएजीई के सचिव डॉ. कल्याण बरमाड़े भी सम्मानित अतिथि के रूप में शामिल हुए. डॉ. अतुल गनात्रा, डॉ. मिलिंग तेलंग, डॉ. आशीष काले, डॉ. अमित टंडन, डॉ. अरुणा टांटिया और डॉ. रोहन पलस्कर सहित प्रतिष्ठित राष्ट्रीय संकायों की उपस्थिति ने इस आयोजन में चार चंद लगाए. इन प्रसिद्ध विशेषज्ञों ने स्त्री रोग संबंधी एंडोस्कोपी की जटिलताओं और प्रगति पर अपने बहुमूल्य अनुभव और अंतर्दृष्टि साझा की.सम्मेलन में तीन ज्ञानवर्धक मुख्य भाषण भी मुख्य आकर्षण रहा. सम्मेलन में बिहार और झारखंड के लगभग 300 चिकित्सा पेशेवरों ने भाग लिया. इस दौरान एंडोस्कोपिक सर्जरी और आधुनिक चिकित्सा में उनके अनुप्रयोगों की अपनी समझ को गहरा करने के एक अद्वितीय अवसर का लाभ उठाया.
सम्मेलन का नेतृत्व डॉ. अनीता सिंह और डॉ. मुक्ता अग्रवाल ने किया. उनके प्रयासों को डॉ. विनीता सिंह, डॉ. मीना सामंत, डॉ. अमिता सिन्हा, डॉ. सुप्रिया जयसवाल, डॉ. पूनम लाल, डॉ. संगीता पंकज, डॉ. हेमाली सिन्हा, डॉ. प्रज्ञा मिश्रा सहित कई वरिष्ठ डॉक्टरों का इस आयोजन को सहयोग मिला. डॉ. पूनम दीक्षित, डॉ. ज्योति दास, डॉ. मिनी आनंद, निभा मोहन और डॉ. मोनिका अनंत ने भी इस ऐतिहासिक सम्मेलन की सफलता में महत्वपूर्ण योगदान दिया.
