प्लास्टिक कचरे के उचित निस्तारण और प्रबंधन विषय पर बच्चों ने रखी अपनी राय।
प्लास्टिक कचरे के उचित निस्तारण और प्रबंधन विषय पर बच्चों ने रखी अपनी राय।
गोरौल वैशाली से राजू कुमार के राहुल कुमार की टेपोर्ट
गोरौल प्रखंड स्थित आरपीसीजे उच्च माध्यमिक विद्यालय बेलवरघाट में प्लास्टिक कचरे के उचित प्रबंधन विषय पर बच्चों ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा की प्लास्टिक कचरा हमारे जीवन शैली को प्रभावित करता है । उसके उचित निराकरण की व्यवस्था करनी चाहिए। इसके लिए बच्चों ने अलग-अलग अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि प्लास्टिक के कचरे को जलाना उचित नहीं है। इससे पर्यावरण प्रदूषित हो जाता है। यदि इसे हम जमीन के अंदर डाल भी देते हैं तभी इसको नष्ट होने में काफी समय लगता है। क्योंकि पॉलिथीन को नष्ट होने में 20 वर्षों का, प्लास्टिक की बोतल को नष्ट होने में 400 वर्षों का और मोबाइल फोन के पार्ट्स को नष्ट होने में लगभग 1000 वर्षों का समय लग जाता है। इसलिए जमीन के अंदर गाड़ना भी उचित नहीं। पॉलिथीन को यदि हम यत्र तत्र फेंक देते हैं, नदियों मे बहा देते हैं तो वहां भी जल प्रदूषित हो जाता है और जल में रहने वाले जलीय जीव को हानि पहुंचता है। यह पर्यावरण के लिए खतरा है। इसलिए सबसे उचित उपाय यह है कि हमारे यहां जो भी कूड़े कचरा खरीदने वाले कवारी वाले आते हैं उनको दे देना चाहिए ताकि इसका रीसाइकलिंग की व्यवस्था की जा सके। इस अवसर पर विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक अरविंद कुमार शरण ने कहा कि प्लास्टिक के मामले में भी कोई अपवाद नहीं है। सस्ता, टिकाऊ और हल्का होने के कारण प्लास्टिक ने हर देश, हर समाज, हर जीवन शैली में अपनी जगह बना ली है। जिसके कारण आज इसे अपने जीवन से निकलना थोड़ा कठिन मालूम पड़ता है । प्लास्टिक टाइड टर्नर के नोडल शिक्षक सह स्काउट रोवर लीडर उमेश कुमार प्रसाद सिंह ने कहा कि हमारे बीच में कौन ऐसा है जो यह कह सकता है कि उसने अपने जीवन में कभी भी प्लास्टिक की चम्मच, प्लास्टिक स्ट्रा या प्लास्टिक की थैलियां का उपयोग नहीं किया है। लेकिन यहां इसके नकारात्मक पहलू भी हैं । हमारे द्वारा एकल प्रयोग वाले प्लास्टिक उत्पादों के उत्पादन और उपयोग और उससे उत्पन्न होने वाले कचरो की उचित निस्तारण और प्रबंधन में हमारी क्षमता ने प्लास्टिक प्रदूषण की गंभीर समस्या को जन्म दिया है। इसके उपयोग से बचने की जरूरत है । यदि हम इसे समुद्र में फेंक देते हैं तो उसका कचरा और माइक्रोप्लास्टिक हमारे महासागरों में लगातार बढ़ता जा रहा है जो समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र और मानव स्वास्थ्य को अभूतपूर्व क्षति पहुंचा रहा है। यद्यपि इस समस्या का समाधान समुद्र में नहीं है। इसका समाधान जमीन पर हमारे पास है क्योंकि इस समस्या को हमने जन्म दिया। एकल प्रयोग वाले प्लास्टिक उत्पादों के उपयोग में कमी लाने से लेकर दक्षतापूर्ण पुनः चक्रण, प्लास्टिक के अन्य टिकाऊ विकल्पों का पता लगाना। प्लास्टिक प्रदूषण के समाधानों को ढूंढने हमारे हाथों में है। भारत स्काउट एवं गाइड के जिला संगठन आयुक्त ऋतुराज ने कहा कि इस नेतृत्व करता चुनौती कार्यक्रम में हम यह सिखाने वाले हैं कि वे समाधान क्या है और हम कैसे इन समस्याओं के समाधान की क्रियान्वयन का एक हिस्सा बन सकते हैं । यह सिर्फ शुरुआत भर है इसके बाद हम प्लास्टिक प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए कार्य योजना के तहत कार्य कर रहे हैं । उसके अंतर्गत विभिन्न प्रकार की गतिविधियां प्रत्येक विद्यालयों में चलाई जा रही है ताकि इस इस समस्या का निदान निकाला जा सके। इस अवसर पर सीमा कुमारी ,चंदेश्वर कुमार, धर्मवीर कुमार सिंहा ,कुमार चंदन, नीतू कुमारी, विनोद कुमार, राकेश कुमार, देवाशीष कुमार शील ,उमेश कुमार, रामबाबू राम ,अनिल कुमार, सुरभि कुमारी, राहुल कुमार चौधरी, सरोज कुमार, जयकृष्ण पाठक, पंकज कुमार ,मोहन सिंह, निभा कुमारी एवं रूबी पाण्डेय उपस्थित रहे। इस अवसर पर मौसम कुमारी, सोनम कुमारी, निशा कुमारी, नेहा कुमारी, सोनी कुमारी, रागिनी कुमारी, कोमल कुमारी, रेशमा खातून, खुशबू कुमारी ,नीतू कुमारी ,सुहाना खातून, पुष्पा कुमारी, नंदनी कुमारी ,स्नेहा कुमारी ,अंजली कुमारी ,अर्चना कुमारी, ईशा कुमारी ,रानी कुमारी, कंचन कुमारी, अंशु कुमारी, निशा भारती, विमल कुमारी, सीमा कुमारी, मनीषा कुमारी, मनीता कुमारी, मोहम्मद इमरान अली,
आदित्य कुमार, रितेश कुमार, अमर कुमार, अंकित कुमार, प्रियांशु कुमार एवं सुजीत कुमार सहित सैकड़ो बच्चों ने अपनी राय रखी।
