सेवानिवृत हो जाने के बाद भी बच्चों को दे रहे निःशुल्क शिक्षा आज शिक्षक दिवस पर हिंदुस्तान विशेष:
सेवानिवृत हो जाने के बाद भी बच्चों को दे रहे निःशुल्क शिक्षा
आज शिक्षक दिवस पर हिंदुस्तान विशेष:
शिष्यों के बीच गुरु होने का आज भी निभा रहे अनोखी परंपरा, बच्चों के बीच रहकर होती है सुखद अनुभूति
महुआ। रेणु सिंह
गुरु वह अनमोल रतन है, जो ज्ञान का भंडार भरकर मानव को ऊंचाई तक पहुंचना है। गुरु का ओहदा सबसे ऊंचा है। गुरु ज्ञान है और गुरु ही भगवान है। महुआ के यह तीन शिक्षक हैं जो एक दशक पूर्व सेवा निवृत होने के बावजूद आज भी बच्चों से अलग नहीं हुए। वे बच्चों को निःशुल्क शिक्षा देते हैं।
महुआ प्रखंड की फुलवरिया पंचायत से सटे महुआ मुकुंदपुर नगर परिषद वार्ड संख्या 24 के रहने वाले और वैशाली विद्यालय महुआ से सेवानिवृत शिक्षक सरयुग राय और लक्ष्मी नारायणपुर पंचायत के बाजितपुर निवासी दीप नारायण सिंह तथा संत कबीर उच्चतर विद्यालय नीलकंठपुर से सेवानिवृत हुए अभिनाथ सिंह बच्चों के बीच बने रहते हैं। यह आज भी गुरु होने का फर्ज अदा कर रहे हैं बे सुबह-शाम अपने घर पर बच्चों को निःशुल्क शिक्षा देते हैं। वह बताते हैं कि इसके बदले में उन्हें बच्चों का प्यार स्नेह मिल जाता है। इससे बड़ा फीस और क्या हो सकता है। सरयुग राय बताते हैं कि वह बच्चों के बीच रहे। उन्हें पढ़ाने के साथ-साथ उनका प्यार स्नेह मिलता रहा। आज भी घर पर जो बच्चे उनसे शिक्षा ग्रहण करना चाहते हैं। उसे वह ना नहीं कहते। समय देकर निःशुल्क ज्ञान देते हैं। उनके घर पर लड़के और लड़कियां पढ़ने आया करते हैं। उसे वह स्नेह से पढ़ाते हैं। सरयुग राय बताते हैं कि शिक्षा व धन है जो बांटने से बढ़ता है। इधर बाजितपुर निवासी दीप नारायण सिंह और मिर्जानगर निवासी अभिनाथ सिंह भी लंबे समय पूर्व वैशाली विद्यालय महुआ से सेवानिवृत हो गए। जबकि बच्चों से उन्होंने स्नेह नहीं तोड़ा। आज भी स्कूल में पहुंचकर कभी-कभी बच्चों के बीच क्लास ले लिया करते हैं। उनका कहना है कि बच्चे देश के भविष्य हैं और शिक्षक राष्ट्र निर्माता का जाते हैं। यह बच्चे अच्छे बनेंगे तो राष्ट्र उन्नति की राह पर जाएगा। उन्होंने बताया कि गुरुवार को शिक्षक दिवस मनाया जाएगा। यह दिन शिक्षकों के लिए खास होता है। इस दिवस पर बच्चों का प्यार, स्नेह और अपना मिलता है। जिससे वह खुशी से भर जाते हैं और ऐसा लगता है कि आज भी वे बच्चों के बीच सेवा दे रहे हैं।
