March 16, 2026

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बिहार के मढ़ौरा संयंत्र से पहली बार निर्यात के साथ भारत वैश्विक लोकोमोटिव विनिर्माण केंद्र बनने को तैयार

भारतीय रेलवे और वेबटेक संयुक्त उद्यम का मढ़ौरा संयंत्र 2025 से अफ्रीका को इवोल्यूशन सीरीज़ के लोकोमोटिव का निर्यात शुरू करेगा

बिहार के मढ़ौरा संयंत्र से पहली बार निर्यात के साथ भारत वैश्विक लोकोमोटिव विनिर्माण केंद्र बनने को तैयार

Posted On: 24 SEP 2024 6:25PM by PIB Delhi

भारतीय रेलवे और वेबटेक का एक संयुक्त उद्यम, वेबटेक लोकोमोटिव प्राइवेट लिमिटेड, अफ्रीका को लोकोमोटिव (इंजन) का निर्यात करने के लिए अपने संयंत्र की क्षमता का विस्तार कर रहा है। पहली बार, यह संयंत्र एक वैश्विक ग्राहक को निर्यात के लिए लोकोमोटिव का निर्माण करेगा।

यह संयंत्र वैश्विक ग्राहकों को इवोल्यूशन सीरीज ES43ACmi लोकोमोटिव की आपूर्ति करेगा। ES43ACmi एक लोकोमोटिव है जिसमें 4,500 एचपी इवोल्यूशन सीरीज इंजन है, जो उच्च तापमान वाले वातावरण में ईंधन से जुड़ी सर्वश्रेष्ठ दक्षता और प्रदर्शन प्रदान करता है। मढ़ौरा संयंत्र 2025 में इन लोकोमोटिवों का निर्यात शुरू करेगा।

यह परियोजना रणनीतिक महत्व की है क्योंकि यह भारत को एक वैश्विक लोकोमोटिव निर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करती है और माननीय प्रधानमंत्री के “आत्मनिर्भर भारत” दृष्टिकोण के तहत “मेक इन इंडिया” और “मेक फॉर द वर्ल्ड” पहलों के अनुरूप है। इससे मढ़ौरा संयंत्र को वैश्विक स्तर पर स्टैंडर्ड-गेज लोकोमोटिव का निर्यात करने में भी मदद मिलेगी, साथ ही स्थानीय आपूर्तिकर्ता की पहुंच बढ़ेगी और दीर्घकालिक रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था को लाभ होगा।

रेल मंत्रालय और वेबटेक के बीच सार्वजनिक-निजी भागीदारी की सफलता ने मढ़ौरा संयंत्र को एक विश्वस्तरीय वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित किया है, जो पूरे भारत से व्यापक स्थानीय आपूर्तिकर्ता आधार का उपयोग कर रहा है। अब तक, लगभग 650 लोकोमोटिव का निर्माण किया गया है और भारतीय रेलवे के लोकोमोटिव बेड़े में शामिल किया गया है। रेल मंत्रालय और वेबटेक संयंत्र की क्षमता एवं प्रतिस्पर्धा को बढ़ाने के लिए सहयोग जारी रखेंगे, इसे स्थायी, दीर्घकालिक निर्यात उत्पादन कार्य के लिए तैयार करेंगे।

बिहार के मढ़ौरा में 70 एकड़ में फैला मढ़ौरा संयंत्र 2018 में स्थापित किया गया था ताकि भारतीय रेलवे के लिए 1,000 अत्याधुनिक लोकोमोटिव का स्वदेशी निर्माण किया जा सके। यह संयंत्र लगभग 600 लोगों को रोजगार देता है और भारतीय रेलवे को सालाना 100 लोकोमोटिव दे रहा है। इसने राज्य में औद्योगिक गतिविधियों को भी काफी बढ़ावा दिया है।

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