यह महुआ का गांधी स्मारक है,या फिर विज्ञापन स्थल ?
यह महुआ का गांधी स्मारक है,या फिर विज्ञापन स्थल ?
रिपोर्ट सुधीर मालाकार।
महुआ (वैशाली) महुआ नगर पंचायत से नगर परिषद बने कई वर्ष गुजर गए लेकिन महुआ बाजार की सुरते हाल नही बदली और ना ही यहां की ऐतिहासिक स्मारक ।चुनाव के वक्त तो लंबे-लंबे वादे किए गए थे लेकिन सिर्फ कागज पर ही खाना पूर्ति बनकर रह गए। बताते चले कि वैशाली जिले के महुआ अनुमंडल ,प्रखंड मुख्यालय की हृदयस्थली गांधी स्मारक अब ऐतिहासिक धरोहर न होकर सिर्फ विज्ञापन स्थल या यो कहे प्रचार का स्थल बनकर रह गया है। सभी राजनीतिक दल, व्यावसायिक प्रतिष्ठान अपनी अपनी पोस्टर एवं बैनर चारों तरफ से लगा कर ,इसे स्मारक स्थल के बदले में विज्ञापन स्थल बना कर रख दिया है ।इस पर न नगर परिषद के पदाधिकारी की नजर पड़ती है और ना ही किसी राजनेता के ,क्योंकि कभी न कभी सभी राजनीतिक दलों के लोगों को इस पर अपने पोस्टर लगाने का मौका जो मिलता है। आखिर विरोध क्यों करेगा ।साफ सफाई के नाम पर वर्ष में स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस के अवसर पर थोड़ी बहुत हो जाया करती है ।सामने 2 अक्टूबर गांधी जयंती का अवसर आने वाला है फिर भी किसी प्रकार का रंग रोगन या साफ सफाई देखने को नहीं मिल रही है। बैनर पोस्टर हटती भी है तो सिर्फ एक दिन के लिए फिर कल होकर सभी पोस्टरों से स्मारक ढक जाता है। यह स्मारक स्थल महुआ की वैसी जगह है जहां पर प्रत्येक दिन हजारों की संख्या में राहगीर अपना शरण लेते हैं ।प्रतिदिन सैकड़ों लोगों को अपने सखे संबंधियों से मिलते जुलते देखा जाता है फिर भी इसकी देखरेख या विधि व्यवस्था भगवान भरोसे चल रही है। महुआ बाजार की सड़कों पर टिप्पणी करना तो बिल्कुल ही गलत होगा ।सभी सड़कों में बीच-बीच में गढ्ढे बने हुए हैं,यह किसी बड़े दुर्घटना के इंतजार में मुंह बाए खड़ी है। प्रत्येक दिन महुआ के एसडीओ, डीएसपी, प्रखंड के पदाधिकारी इसी रास्ते से आते जाते हैं लेकिन किसी की भी नजर इस तरफ नहीं पड़ती। महुआ में जाम लगना तो आम बात हो गई। सरकारी आदेश के बावजूद भी नो पार्किंग जोन में भी साइकिल, मोटरसाइकिल,चार पहिए गाड़ियां लगी दिख रही है ।महुआ के लोगों का सुंदर और स्वच्छ महुआ देखने का सपना एक दिवा स्वप्न बनके रह गई।
