April 21, 2026

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रेलवे ने पर्यटन उद्योग को दी नई उड़ान और पहचान

(विश्व पर्यटन दिवस पर विशेष)

रेलवे ने पर्यटन उद्योग को दी नई उड़ान और पहचान

– वित्त वर्ष 2024-25 के बजट आवंटन में रेलवे का विशेष जोर पर्यटन पर
– ⁠पर्यटन को नई ऊंचाइयां प्रदान कर रही भारतीय रेल
– ⁠सैलानियों को लुभा रहीं वंदे भारत श्रेणी की विशेष ट्रेनें
– ⁠यूनेस्को के विश्व विरासत स्थलों में भारतीय रेल की दमदार धमक
– ⁠दुनिया भर के सैलानियों को लुभाती हैं यहां की माउंटेन ट्रेनें

आलेख
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ऐसे तो भारत के कई पर्यटन स्थल बहुत पहले से ही विश्व के आकर्षण का केंद्र रहे हैं, लेकिन हाल के कुछ वर्षों या दशकों पर गौर करें तो देश के कई नये और अपेक्षाकृत कम चर्चित स्थलों ने दुनियाभर के सैलानियों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। इसमें रेलवे का योगदान सबसे ज़्यादा है। पिछले कुछ सालों में रेलवे ने पर्यटन के क्षेत्र को जिस तरह अपनी प्राथमिकताओं में शुमार किया है, उससे भारत में सैलानियों का भरोसा तेज़ी से बढ़ा है। इसके तहत रेलवे ने न सिर्फ कई नई और विशेष ट्रेनों का संचालन शुरू किया है, बल्कि पर्यटन को अपनी प्राथमिकताओं में बनाए रखने के बहुविध अन्य उपाय भी सुनिश्चित किए हैं। दुर्गम पहाड़ी इलाक़ों में रेलवे की कई ट्रेन सेवाएं दुनिया भर के सैलानियों को आज भी लुभाती हैं। इन सेवाओं को यूनेस्को ने अपनी विश्व विरासत सूची में भी रखा हुआ है।
पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में रेलवे के ईमानदार और ठोस प्रयास का सबसे बड़ा प्रमाण वित्त वर्ष 2024-25 का केंद्रीय बजट है। इसमें रेलवे को करीब 2.62 लाख करोड़ रुपये का भारी-भरकम आवंटन हुआ है। यात्रा और पर्यटन के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाने के उद्देश्य से रेलवे ने इस आवंटित राशि का इस्तेमाल मुख्य रूप से आधुनिकीकरण और सुरक्षा के मद पर केंद्रित कर रखा है। इसके तहत देश भर में ज़्यादा से ज्यादा वंदे भारत एक्सप्रेस, वंदे भारत स्लीपर ट्रेन, आस्था स्पेशल या भारत गौरव ट्रेनों का सुरक्षित और द्रुत परिचालन बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
बताने की ज़रूरत नहीं कि वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों की मांग देश भर से उठ रही है। इसकी लोकप्रियता का आलम यह है कि 2022 तक देश भर में जहां इसकी संख्या महज चार थी, वह आज सौ का आंकड़ा पार कर चुकी है। आज पूरे देश में 102 वंदे भारत कुल 29.5 हजार फेरे लगाकर ढाई करोड़ से ज्यादा यात्रियों को द्रुत, आरामदायक और रोमांचक सफर का अहसास करा रही है। पूरी तरह स्वदेश निर्मित इस ट्रेन को आज कई अन्य देश चमत्कृत भाव से देख रहे हैं। अत्याधुनिक कवच प्रणाली से लैस सेमी-हाई स्पीड श्रेणी में वंदे भारत आज दुनिया भर के रेल तंत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। पर्यटकों ने भी इस शानदार ट्रेन को हाथोंहाथ लिया है। देश के विभिन्न पर्यटन व धर्मस्थलों तक के सफर के लिए सैलानी इस पर जबरदस्त भरोसा दिखा रहे हैं।

वंदे भारत की तरह ही वंदे स्लीपर ट्रेन और आस्था स्पेशल या भारत गौरव ट्रेनें भी पर्यटकों के बीच खूब लोकप्रिय हो रही हैं। तमाम आधुनिक सुविधाओं से लैस और आरामदायक सफर का अहसास करा रही ये ट्रेनों बता रही हैं कि यदि इच्छाशक्ति मज़बूत हो तो कायाकल्प किया जा सकता है। रेलवे वर्तमान में कुछ ऐसा ही कुछ अहसास करा रही है। वंदे भारत श्रेणी की ट्रेनें जहां गति, शक्ति और सुरक्षा का प्रतीक बन गई है, वहीं भारत गौरव ट्रेन का सफ़र पर्यटकों को भारतीय विरासत के साथ-साथ कला और संस्कृति के विविध आयामों का भी दिग्दर्शन कराता है।
पर्यटन और विरासत के प्रति भारतीय रेल के समर्पण और प्रतिबद्धता की सबसे बड़ी गवाही यूनेस्को की विश्व विरासत सूची को माना जा सकता है। इसमें भारतीय रेल के कुल 34 स्थलों को शामिल किया गया है। इनमें विभिन्न रेल प्रतिष्ठानों पर स्थित संग्रहालयों, हैरिटेज उद्यान और वीथियों के अलावा कई माउंटेन ट्रेनें भी हैं। दार्जिलिंग-हिमालयन रेलवे मार्ग पर समुद्र तल से 7407 फीट की ऊंचाई पर स्थित घुम स्टेशन तो दुनियाभर के पर्यटकों के आकर्षण का विशेष केंद्र है। इसी प्रकार नीलगिरी माउंटेन रेल और कालका-शिमला रेल भी जहां भारत की अन्य हसीन वादियों का सफर कराती है तो मुंबई स्थित छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस स्थापत्य के क्षेत्र में यूरोप की गौथिक शैली का बेजोड़ नमूना प्रदर्शित करता है।
भारत में पिछले साल 92 लाख से ज़्यादा विदेशी पर्यटक आए। इसमें कोई संदेह नहीं कि देश के अंदर आवागमन के लिए इन विदेशी मेहमानों ने रेल के सुगम, सुरक्षित और द्रुत सफ़र का जमकर आनंद लिया।कह सकते हैं कि भारतीय रेल के बदलते चेहरे के साथ-साथ पर्यटन उद्योग भी कुलांचे भर रहा है।

(मनोज कुमार झा)

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