प्रखंड क्षेत्र में मंगलवार को देवोत्थान एकादशी का व्रत मनाया गया .
प्रखंड क्षेत्र में मंगलवार को देवोत्थान एकादशी का व्रत मनाया गया . देवोत्थान एकादशी के दिन भगवान श्री हरी को लोग योगनिद्रा से जगाते है . प्रत्येक वर्ष चार मास का देवशयन काल होता है जिसे चातुर्मास काल भी कहा जाता है. इस चातुमार्स के काल को देवताओ की आराध्ना का काल माना जाता है . इस अवधी में मांगलिक कार्य बिलकुल बन्द रहता है जैसे शादी विवाह जनेऊ मुंडन संस्कार आदी. इस दिन लोग तुलसी की पूजा भी करते है. तुलसी और शालिग्राम का विवाह भी लोगो द्वारा सम्पन्न कराया जाता है . लोगो में मान्यता है कि देवोत्थान एकादशी के दिन दान करने गंगा स्नान करने होम करने उपासना करने तथा उपवास करने से अनंत फल की प्राप्ति होती है तुलसी वृक्ष के निकट दीप जलाने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है तथा इस व्रत को करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है ऐसी मान्यता लोगो में है . लोग रात्रि में शंख, घरी, घण्टा से ध्वनि कर भगवान विष्णु को योगनिद्रा से जगाते है लोगो का कहना है कि भगवान हरिशयनी एकादशी के दिन पाताल लोक में शयन के लिये चले जाते है जिन्हें देवोत्थान एकादशी के दिन जगाया जाता है.
