101 वीं जयंती पर श्रद्धापूर्वक याद किए गए जननायक कर्पूरी ठाकुर ।
101 वीं जयंती पर श्रद्धापूर्वक याद किए गए जननायक कर्पूरी ठाकुर ।
रिपोर्ट सुधीर मालाकार।
हाजीपुर (वैशाली)भारत रत्न जननायक कर्पूरी ठाकुर की 101 वीं जयंती हाजीपुर गंडक रोड स्थित स्वामी विवेकानंद संस्थान के सभागार में स्वामी विवेकानंद सामाजिक शोध संस्थान ,बिहार के तत्वावधान में समारोह पूर्वक धूमधाम से मनाई गई।
इस अवसर पर प्रोफेसर डॉ अजीत कुमार ने कर्पूरी ठाकुर के तैलिया चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए प्रो डॉ अजीत कुमार ने कहा कि जननायक कर्पूरी ठाकुर शोषितो- पीड़ितों के प्रवक्ता थे । वे समता मूलक समाज निर्माण में अहम भूमिका निभायी । कर्पूरी ठाकुर गुदरी के लाल थे ।कर्पूरी ठाकुर एकात्ममानवबाद के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय से काफी प्रभावित थे। पंडित दीन एकात्मानवबाद में जिस तरह से अंतिम पंक्ति खड़ा व्यक्ति के उत्थान की बात की। उसी प्रकार कर्पूरी ठाकुर भी समाज के दबे कुचले और शोषितों के उत्थान के लिए आवाज उठाई। वे पंडित दीनदयाल उपाध्याय ,डॉ राम मनोहर लोहिया, जयप्रकाश नारायण, महात्मा गांधी, आचार्य नरेंद्र देव से काफी प्रभावित थे। जननायक कर्पूरी ठाकुर का कार्य बिहार के विकास में मिल का पत्थर साबित हुए । समता मूलक समाज स्थापित करने में उनकी अहम भूमिका रही। कर्पूरी ठाकुर की बिहार के विकास के योगदान को कभी नहीं बुलाया जा सकता है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय एवं डॉ राम मनोहर लोहिया ने समाज को बदल डालने के लिए जो भी सिद्धांत एवं विचार प्रतिपादित किया जननायक कर्फ्यू ठाकुर उसे पूरा करने में भरपूर कोशिश की । चाहे वह मामला चौखम्भा राज के अंतर्गत पंचायती व्यवस्था हो ,चाहे अंग्रेजी हटाओ अथवा सरकारी सेवाओं में पिछोड़ो के आरक्षण का मामला, समाजवादी आंदोलन की उन मुद्दों को सरकार में जाने पर कर्पूरी जी ने पूरा करने का भरपूर कोशिश किया । कर्पूरी ठाकुर एक सजग जनप्रतिनिधि थे। बिहार के किसी कोने में कोई छोटी बड़ी घटना घटी ,उन्हें सबसे पहले जानकारी मिल जाती थी। एक बार नरसंहार जैसी घटना में पुलिस बाद में पहुंची, कर्पूरी जी पहले पहुंच गए थे। कर्पूरी जी ने पक्ष और विपक्ष दोनों की भूमिकाएं बखूबी निर्भीकता पूर्वक निभायी। सन 1967 से 1988 यानी दो दशक तक बिहार की राजनीति उनकी ईद घूमती रही। अपने जीवन काल में वे दो बार मुख्यमंत्री और अनेक वार विपक्ष के नेता रहे । वे गांधी जी से प्रभावित होकर आजादी की लड़ाई में कूद पड़े और लगभग 20 बार जेल गए। चुकी कर्पूरी जी ने गरीबों को नजदीक से देखा और झेला था ।सरकार में जाने के साथ गरीबी उन्मुख कार्यक्रम लागू करने के लिए वह बेचैन होके थे। अंत्योदय कार्यक्रम लागू करने वाले देश के प्रथम नेता थे ।वे भूमि सुधार कार्यक्रम शक्ति से लागू किया। वे बिहार जैसे गरीब राज्य के मसीहा थे।
जननायक की जयंती समारोह की अध्यक्षता प्रो डॉक्टर अजीत कुमार ने किया ।जबकि संचालन विवेक कुमार सिंह तेलिया ने की
सर्वप्रथम प्रोफेसर सतीश कुमार साहेब डॉ अजीत कुमार, राजकुमार सिंह अध्यक्ष वैशाली केमिकल एंड ड्रग एसोसिएशन, राजू कुमार गुप्ता सचिव वैशाली ड्रग एसोसिएशन ,विवेक कुमार सिंह तेलिया, संजय कुमार ने संयुक्त रूप से पुष्पांजलि व दीप प्रज्वलित कर समारोह का विधिवत उद्घाटन किया।
मुख्य अतिथि राजकुमार सिंह अध्यक्ष वैशाली केमिकल्स एंड ड्रग एसोसिएशन ने कर्पूरी जी को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि भारत रत्न जननायक कर्पूरी ठाकुर व्यक्ति नहीं विचार थे ।वे समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के उत्थान के लिए सजग रहे ।1977 में अति पिछड़ोंको 12%, पिछड़ा को 8%, महिलाओं को 3 प्रतिशत और आर्थिक रूप से कमजोर ऊंची जातियों को 3 प्रतिशत सरकारी नौकरी में आरक्षण देकर समता मूलक समाज को मजबूती दी।
ड्रग एसोसिएशन के सचिव राजू कुमार गुप्ता ने जननायक को श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए कहा कि कर्पूरी ठाकुर शिक्षा और हासिये पर खड़े लोगों के लिए अनेक कार्य किया ।
जननायक कर्पूरी ठाकुर को श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए विवेक कुमार सिंह तेलिया ने कहा कि वे एक सच्चे राजनेता थे। और देश में सामाजिक न्याय के विचार को विकसित करने का काम किया।
सतीश कुमार साहेब ने संबोधित करते हुए कहा कि जननायक कर्पूरी ठाकुर झोपड़ी में पैदा लिए और मुख्यमंत्री रहते हुए भी झोपड़ी में ही मृत्यु को प्राप्त किया। वह एक इमानदार कर्मठ और सुचिता पूर्ण चरित्र के महान राजनेता थे।
समारोह प्रोफेसर डॉक्टर अजीत कुमार संजय कुमार नितेश कुमार मिश्रा राजकुमार सिंह राजू गुप्ता संजय चौधरी शिव शंकर यादव धनंजय कुमार सिंह अमित कुमार कुशवाहा डायलिसिस सुबोध काश्तकार सोनू कुमार मनीष कुमार यादव राजा कुमार सिंह कुशवाहा मनीष कुमार यादव रितिक कुमार ऋषि चौहान सरदार रवि सिंह सरदार बूटा सिंह अमित कुमार उर्फ मिट्ठू ने संबोधित किया और कर्पूरी ठाकुर के कार्यों की प्रशंसा की।
समारोह के अंत में धन्यवाद विज्ञापन ऋषि चौहान एवं सुबोध काश्तकार ने संयुक्त रूप से किया।
