कलम के मजदूरों की है दो मांगे:-
======================
कलम के मजदूरों की है दो मांगे:-
1 पटना में हो ‘ चित्रगुप्त चौराहा का निर्माण ‘ 2 ‘ इण्डिया गेट ‘ का
नामांकरण ‘ भारत माता द्वार ‘ किया
जाए ।
‘…………….रवीन्द्र-रतन ।
======================
आए दिन पटना ही नहीं अन्य शहरों में भी जाति ,समाजऔऱ धर्म के आधार पर चौक-चौराहों का नामा- करण हो रहा है l
ऐसे माहौल में पूर्व विधान पार्षद एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता तथा बौद्धिक समाज के प्रणेता प्रो0 रणबीर नंदन जी ने पटना शहर में ‘चित्रगुप्त – चौराहा ‘ बनाने की शानदार मांगकी थी l उन्होंने कहा था कि पटना में एक सौ से भी ज्यादा चित्रगुप्त पूजा
समितियां हैं, जहां भगवान चित्रगुप्त का पूजन बड़े धूमधाम से होताहै। गर्दनीवाग ठाकुर वारी एवं आदि चित्रगुप्त मंदिर नौजार घाट में प्रत्येक वर्ष माननीय नीतीश कुमार सहित अन्य गण्यमान्य नेता चित्र गुप्त पूजन में भाग लेते है l पटना शहर में कायस्थों की आबादी सर्वाधिक तो है ही, मगर इसे कायस्थों के कारण ही नहीं अपितु जाति धर्म से ऊपर उठ कर कलम के तमाम मजदूरों की मांग है कि इन्दौर शहर की तर्ज़ पर पटना के किसी मुख्य चौराहे का नामकरण सभी के कर्मों का लेखा जोखा रखने वाले ‘ चित्रगुप्त भगवान’ के नाम पर ‘ चित्रगुप्त- चौराहा ‘ नामकरण कर प्रो0 रणबीरनंदन ही नहीं अपितु सारे कलम के मजदूरों की मांग को पूरा कियाजायऔर’चित्रगुप्त-चौराहा ‘नाम रख कर कलम दावात के मसीहा, कलम के मजदूरों की मांग को पूरा करने की मांग, विकास पुरुष ,सुशासन बाबू मुख्य मंत्री नीतीश कुमार जी से करते हैं l जिससे बुध्दिजीवियों में अच्छा संदेश जाय l
भाजपा प्रदेश बुद्धिजीवी प्रकोष्ठ के
नेता एव अभाकाम के प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष रवीन्द्र कुमार रतन का कहना है कि सभी जाति, सभी धर्मों, सभी गरीब अमीर ,ऊंच- नीच सबके कर्मों का लेखा -जोखा रखने वाले ‘चित्रगुप्त जी के नाम पर एक चौराहे का नामकरण कर माननीय मुख्यमंत्री जी सबका दिल जीत सकते हैं l यहीं कलम के मजदूरों के साथ एक बड़ा इन्साफ होगा l अतः: ‘चित्रगुप्त- चौराहे ‘ की मांग को यथाशीघ्र पूरा किया जाय l
इस सम्बंध में आवश्यकतानुसार एक प्रतिनिधि मंडल प्रो0 रणबीर नंदन के नेतृत्व में शीघ्र ही मुख्य हमंत्री से मिलेगा और अपनी मांगों के मंजूरी का मार्ग प्रशस्त करेगा l
दूसरी मांग है कि आजादी के इतने
वर्षो बाद भी दिल्ली और मुम्बई के गेट का नाम ‘ इण्डिया गेट या गेट वे
आफ इण्डिया ‘ ही है । हमारा विनम्र
निवेदन है कि एक का नाम ‘ भारत
माता प्रवेश द्वार एवं दूसरे का नाम
भारत माता निकास द्वार ‘ रखा जाए।अंग्रेज चले गये और हम उनके अंग्रेजियत को क्यों ढोते रहे? हमारी हिन्दी स्वयं सम्बद्ध है।
जन प्रिय प्रधान मंत्री से सविनय
निवेदन है कि इस मांगपत्रपर विचार कर भारत माता द्वार नामकरण
की सार्थकता सिद्ध करेंगे।आभार ।
