May 1, 2026

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सनातन की दिव्यता और आस्था का जीवंत अनुभव है महाकुंभ/NRI NEWS

सनातन की दिव्यता और आस्था का जीवंत अनुभव है महाकुंभ

रिपोर्ट प्रभंजन कुमार

त्रिवेणी में डुबकी शब्दातीत और अकल्पनीय ऊर्जा प्रदान करती है

सरकार और समाज दोनों के लिए वरदान साबित हुआ यह आयोजन

भगवान विष्णु की पत्नी यमुना माता और विष्णुपदी के रूप में गंगा मैया का वर्णन वैदिक ग्रंथों में उल्लिखित है। जब गंगा मैया महारानी माता यमुना से जाने की राह मॉंगती है तब यमुना जी उनको अपने गले लगाकर साथ में प्रवाहित होने का संकल्प लेती हैं, जो प्रयागराज के संगम घाट पर सभी को प्रत्यक्ष दिखाई भी देता है।

यहॉं पर गंगा, यमुना और सरस्वती का नामक त्रिवेणी संगम है, जहॉं श्रद्धालुओं को गंगा और यमुना मैया तो दिखाई देती है परन्तु श्रद्धालु मॉं सरस्वती का आभासी अनुभव करते हुए त्रिवेणी संगम में स्नान कर परम आनंद और पुण्य लाभ प्राप्त करते हैं। यमुना मैया से अधिक गंगा जी को पौंराणिक कथाओं और वैदिक ग्रंथों में सम्मान प्रसिद्धि मिली । उनका वैभव भी उनसे ज्यादा विस्तृत है।

महाकुंभ के पावन अवसर पर हमने भी जनसैलाब के रूप में उत्पन्न की चुनौतियों को स्वीकार करते हुए अपना सफर परिजनों के साथ प्रारंभ किया । प्रयागराज तक की यात्रा में हर कदम पर बाधाओं से साक्षात्कार हुआ किंतु आस्था से प्राप्त अदृश्य शक्ति के बल पर जबलपुर से पहुॅंचकर प्रयागराज में परिजनों के साथ 11 बार आस्था की डुबकी लगाने का पुण्य दैव कृपा से प्राप्त हुआ।

स्नान के उपरांत ऐसा लगा मानो संगम में मॉं गंगा, यमुना और सरस्वती के आंचल की छाँव में कुछ क्षण व्यतीत करने किये हों। एक शब्दातीत और अकल्पनीय ऊर्जा का संचार शरीर में अनुभव हुआ।

यहॉं यह बतलाना चाहते हैं कि देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी द्वारा महाकुंभ के प्रचार-प्रसार को लेकर अलग मायने रहे हैं। उनका प्रभाव इतना गहरा और व्यापक रहा कि देश के कोने – कोने से ही नहीं अपितु विदेशों से भी असंख्य श्रृद्धालुओं ने महाकुंभ में अमृत स्नान कर पुण्य अर्जित किया।

अभी तक 52 करोड़ से अधिक श्रृद्धालुओं द्वारा त्रिवेणी संगम में स्नान करना केवल विश्व कीर्तिमान ही नहीं सनातन की संगठित शक्ति का उद्घोष है। देश – विदेश के साधु – संतों के साथ-साथ जाने माने गणमान्यजनों, उद्योगपतियों, बॉलीबुड की हस्तियों के अलावा खुद राष्ट्रपति प्रधानमंत्री और अनेक मुख्यमंत्रियों ने भी अपने मंत्रीमण्डल के साथ आस्था की डुबकी लगाकर विश्व कल्याण की कामना की।
महाकुंभ जबलपुर संस्कारधानी से 364 कि.मी. दूर प्रयागराज में आयोजित किया गया है। यह दूरी तय करने के लिए श्रद्धालुओं को 5 टोल प्लाजा से होकर गुजरना पड़ रहा है। इस दौरान देखा गया है कि कम से कम एक टोल प्लाजा नाका पर 1 करोड़ रूपये से अधिक की आय प्रतिदिन दर्ज हो रही है, इस प्रकार जबलपुर से प्रयागराज तक हर टोल नाके में करोड़ों रु. की राशि जमा हो रही है।
महाकुंभ का आयोजन 144 साल में एक बार आता है इसे भव्य और दिव्य कुंभ भी कहा जाता है जो दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक मानव समागम है। यहॉं स्नान करने से पाप धुल जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

मेले से अर्थव्यवस्था को हुए लाभ की टोल नाके एक बानगी मात्र हैं। इसके अलावा भारत सरकार की र्स्टाट अप योजना की सफलता धरातल पर महाकुंभ के दौरान दिखाई दी जहॉं लाखों बेरोजगारों द्वारा नए-नए रोजगार के अवसर ढूंढकर धनोपार्जन किया गया । उदाहरण के लिए बाइकर्स, हाथ ठेले और आटो वालों , के अलावा छोटे-छोटे समूह में सड़क किनारे सामग्रियों को बेचने वाले देश के कोने – कोने से यहाँ आकर आर्थिक लाभ प्राप्त करते नजर आए।
महाकुंभ की अभूतपूर्व सफलता में डिजिटल इंडिया की भी शानदार भूमिका दिखाई दी, वहीं इलेक्ट्रानिक और प्रिंट मीडिया की सक्रियता से भी विश्व भर में महाकुंभ की अलख जगी और प्रयागराज में अमृत स्नान करने श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा जो आज तक बरकरार है।
47 दिवसीय महाकुंभ के इस आयोजन में सरकार और समाज की दोनों को आर्थिक लाभ हुआ । समाज के प्रत्येक वर्ग को इस आयोजन ने आर्थिक संबल प्रदान किया , वहीं सरकार को भी खर्च की गई राशि से अधिक आय की प्राप्ति हुई है। अनुमान है कि सरकार ने 1500 करोड़ का व्यय कर 2 लाख करोड़ से अधिक की आय प्राप्त की ।

144 साल बाद आयोजित इस महाकुंभ में लाखों युवाओं ने पहली बार कोई व्यवसाय जबलपुर से प्रयागराज तक किया है जिसमें चने बेचने, फुल्की बेचने, रेस्टारेन्ट – लॉज खोलने, डीजल – पेट्रोल की अस्थाई दुकान खोलने, टेक्सी किराये से चलवाने के साथ-साथ सड़कों पर श्रद्धालुओं के लिए पेयजल बेचने और प्रसाधन केन्द्रों की व्यवस्था तक शामिल हैं।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संदेशों ने भारत ही नहीं बल्कि विश्व भर में रहने वाले सनातनियों में भी महाकुंभ का रंग भरा। इसीलिए दुनिया के कोने – कोने से लोग प्रयागराज के त्रिवेणी संगम में आस्था की डुबकी लगाने पहुॅंचे। इसका जीवंत दृश्य संगम के घाटों पर जाकर देखा जा सकते हैं ।
विश्व के सबसे बड़े धार्मिक आयोजन में सरकार को बहुत सारी चुनौतियों का सामना करना पड़ा और श्रद्धालुओं के लिए सड़क परिवहन, हवाई सेवा और रेल के साथ-साथ अन्य सुविधाएं भी जुटानी पडीं। जिसमें अरबों रूपये खर्च करने पड़े हैं परन्तु इन खर्चो के बावजूद सरकार को देश – विदेश से आए श्रद्धालुओं से भरपूर आय प्राप्त हुई है। लिहाजा अब सरकार को टोल टैक्स से देश के नागरिकों को राहत देना चाहिए और सभी नाकों पर चार पहिया वाहनों को निःशुल्क कर देना चाहिए।

सारथी कुशल हो तो आसान हो जाती हैं हर चुनौतियॉं:-

लेखक ने स्वयं संस्कारधानी से प्रयागराज तक पत्नी श्रीमती मधु मिश्रा, अनुज सतीश , बहू कल्पना , और मित्र प्रमोद तिवारी के साथ सफर किया और हर विपरीत चुनौती को स्वीकार कर मॉं त्रिवेणी के ऑंचल में जाकर आस्था की डुबकी लगाकर जन्म-जन्मों का पुण्य लाभ प्राप्त कर अपने सभी परिजनों, पूर्वजों, इष्टमित्रों और कुटुम्बजनों के मंगल की कामना की। इस पूरी यात्रा में सारथी प्रमोद तिवारी का सहयोग किसी दैवीय शक्ति से कम नहीं था। क्योंकि अनुभवी और कुशल सारथी के कारण ही हम अपने परिजनों के साथ महाकुंभ के चारों दिशाओं का भ्रमण कर पूज्य साधु – संतों का दर्शन लाभ प्राप्त कर सके। और मॉं गंगा, यमुना, और सरस्वती से आर्शीवाद लेकर जबलपुर लौट पाए। इस यात्रा में मुझे 4 दिन का समय लगा।

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