सफेदपोश एवं आला अधिकारी संरक्षण में फल फूल रहे है अंचलाधिकारी पटना सिटी ममता रानी।
पटना सिटी के अंचल अधिकारी ममता रानी अपने आप को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से उच्च अधिकारी समझते है।
पटना में खुले आम पटना सिटी अंचल अधिकारी ममता रानी मुख्यमंत्री के आदेशों का खुले आम उड़ा रहे धज्जियां।
अंचल अधिकारी पटना सिटी ममता रानी अपने पद का कर रहे है दुरुपयोग। एबं महिला होने का उठा रहे है फायदा।
दाखिल खारिज का ज्यादा प्रेसर पड़ने पर अंचलाधिकारी स्तर से सभी को रद्द कर दिया जाता है यह कोई कारण बता कर पेंडिंग रखा जाता है। ऑनलाइन करने के बाबजूद भी अंचलाधिकारी पटना सिटी ममता रानी के द्वारा हार्ड कॉपी की भी मांग की जाती है। जबकि कर्मचारी रिपोर्ट और RO रिपोर्ट सही रहता है। कार्य मे पेंडिंग कम हो इसके लिए लगातार अंचलाधिकारी स्तर से रेजेक्टेड कर दिया जाता है। अंचलाधिकारी पटना सिटी ममता रानी कर्मचारी पर करवाई करने के बजाय इनके द्वारा कोई भी करवाई नहीं किया गया है इस लिए कार्य को कर्मचारी के द्वारा लंबित रखा जाता है। आज के दिन में उन्हीं के चलते वर्तमान के कर्मचारी पर कार्य लंबित रहते है और वर्तमान कर्मचारी को बदनाम करने की साजिश की जा रही है।
पटना सिटी के अंचल अधिकारी ममता रानी अपने आप को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से उच्च अधिकारी समझते है। आखिर सबसे मामला बड़ा यह उठता है कि जब से अंचल अधिकारी पटना सिटी ममता रानी ने पटना सिटी का कार्यभार संभाला है तब से अब तक जनता की कई शिकायते आई है। जनता के बीच आने से कटराते हैं आखिर मामला क्या है ? इसका जवाब तो आला अधिकारी ही दे सकते हैं। या ऐसा भी प्रतीत हो सकता है कि अंचल अधिकारी पटना सिटी ममता रानी आला अधिकारी के करीबी माने जाते हैं इसलिए जनता का काम तो दूर की बात है। कोई ना कोई कारण बता कर कार्य को पेंडिंग यह रिजेक्ट कर दिया जाता है। फिर भी उन पर अब तक करवाई नहीं किया जा रहा है आखिर अधिकारी क्यों नहीं मानते हैं जनता प्रतिनिधि ,मंत्री एवं मुख्यमंत्री के बातों को जनता के साथ हो रही है परेशानी जनता को दिए गए समय सीमा के अंदर नहीं हो रहा है कोई भी कार्य इसके लिए कौन है जिम्मेदार। इन दिनों बिहार सरकार के द्वारा चलाए जा रहे हैं कोई भी योजनाएं का नहीं हो रहा है सही ढंग से उपयोग और नहीं हो पा रहा समय सीमा अंतराल के अंतर्गत कोई भी कार्य आखिर इसका जिम्मेदार कौन जिला अंतर्गत जिला प्रशासन या फिर राज्य अंतर्गत उस विभाग के सचिव जिस विभाग का कार्य हो? बिहार सरकार के अंतर्गत बनाया गया समय सीमा में मनमानी क्यों सूबे के सरकार के द्वारा कहा गया था कि कोई भी आवेदन जैसे दाखिल खारिज एलपीसी जमाबंदी समय सीमा के अंतराल में ही मिलेगा लेकिन आए दिन देखा जाता है कि कोई भी उपरोक्त लिखे प्रमाण पत्र समय सीमा के पहुंच से बाहर दिखाई देता है क्या इन सब मामलों का खबर अधिकारी को रहता है या नहीं? सूत्रों की माने तो ऐसा नहीं है समय सीमा के अंतराल में कार्य नहीं होने की जानकारी सभी पदाधिकारी को होता है लेकिन आज तक किसी भी पदाधिकारी को सरकार की ओर से या फिर आला अधिकारी की ओर से कोई भी संबंधित पढ़ाधिकारी पर कार्रवाई की गई क्या? आर्थिक दंड दिया गया क्या मासिक वेतन से दंड के रूप में वेतन कटौती की गई क्या? जबकि सरकार की ओर से सभी जगह सभी कार्य के अनुसार निगरानी के रूप में टीम गठित की गई है लेकिन जिला प्रशासन इस पर नजर अंदाज कर क्यों बैठे रहते हैं अंचल अधिकारी, प्रखंड विकास पदाधिकारी,उपसहर्ता भूमि सुधार अपरसंमहर्ता, जिलाधिकारी अधिकारी पटना को इन सब की जानकारी होती है लेकिन आज तक करवाई शून्य। मुख्यमंत्री कौन होते हैं देखने वाले अपने विभाग के मालिक हम खुद हम अपनी मर्जी से काम करेंगे सरकार के द्वारा तय सीमा को हम क्यों माने जनता जहां जाना चाहती है जाए मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता है यह लगभग सभी विभागों का है मामला। सरकार को बदनाम करने की की जा रही है साजिश मुख्यमंत्री स्तर से इसकी निगरानी होनी चाहिए और संबंधित पदाधिकारी के खिलाफ जो समय सीमा के तहत कार्य नहीं करते उन पर विभागीय कार्रवाई के साथ कानूनी कार्रवाई भी हो सके ताकि कार्य संस्कृति में बदलाव हो लेकिन ऐसा नहीं होता कार्य नहीं होने की स्थिति में संबंधित अधिकारियों का तबादला का शिकार बनाया जाता है या फिर बैसे मजबूर कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी कार्यपालक सहायक को निशाना बनाया जाता है आखिर ऐसा कब तक चलता रहेगा सरकार के द्वारा बनाया गया है। क्या सरकार के द्वारा क्या सरकार के द्वारा आला अधिकारियों पर निशाना बनाया गया है क्या?