” शिक्षा में रामत्व” विषयक पर भारतीय शिक्षण मंडल ने संगोष्ठी आयोजित की ।
रिपोर्ट सुधीर मालाकार।
महुआ (वैशाली)भारतीय शिक्षण मंडल के ५६ वें स्थापना दिवस पर उत्तर बिहार प्रांत की जिला इकाई वैशाली द्वारा ज्ञान ज्योति गुरुकुलम् , सिंघाड़ा के सभागार में शिक्षा में रामत्व विषय पर संगोष्ठी आयोजित की। जिसकी अध्यक्षता ज्ञान ज्योति गुरुकुलम जंदाहा शाखा के प्राचार्य ,संघ के बाल स्वयंसेवक प्रवीण कुमार सिंह ने की । मुख्य वक्ता भारतीय शिक्षण मंडल जिला इकाई के संरक्षक उत्पलकांत की सहभागिता हुई ।अध्यक्षता प्रांत अध्यक्ष अजीत कुमार ने किया जबकि संचालन विद्वान शिक्षक शंकर कुमार शास्त्री जी ने की। संगोष्ठी में लगभग 60 लोगों उपस्थित थी । वर्तमान शिक्षा प्रणाली में “शिक्षा में रामत्व” या शिक्षा में भारतीय संस्कृति के मूल्यों की अवधारणा की आवश्यकता क्यों है इस पर प्रकाश डालते हुए उत्पल कांत जी ने बताया कि राम के हर एक मानवीय चरित्र जीवन जीने की विधा, संस्कार ,निष्ठा ,समर्पण, चरित्रता ,उदारता ,साहस, शौर्य को जब तक हमारे शिक्षा में समाहित कर भावी पीढ़ी को बताया नहीं जाएगा, तब तक भारत की संस्कृति की पुनर्स्थापना एवं भावी पीढ़ी संस्कारवान और संवेदनशील नागरिक नहीं बन पाएगी ।अतः शिक्षा में रामत्व एक महत्वपूर्ण और प्रासंगिक विषय है जिसकी वर्तमान समाज को सबसे ज्यादा आवश्यकता है।अध्यक्षता कर रहे प्रवीण जी ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि भारत के महापुरुषों को उदाहरण के तौर पर बच्चों के सामने प्रस्तुत कर बच्चों को गौरवशाली इतिहास को पढ़ाकर उन्हें सुसंस्कारवान, परोपकारी और संवेदनशील बनाने की आवश्यकता है। जबकि प्रांत अध्यक्ष अजीत कुमार आर्य ने विषय प्रवेश में अपने विषय को रखते हुए कहा कि हमारी शिक्षा राम के जीवन चरित्र के आधार पर एवं सर्व समावेशी और भारत की संस्कृति की जड़ों से पोषित शिक्षा होना चाहिए। तभी भावी पीढ़ी प्रकृति से जुड़कर , देशभक्ति के भाव से ओतप्रोत होकर, माता-पिता अतिथि और गुरु को अपना देवता मानकर एक संवेदनशील नागरिक के रूप में उसका निर्माण हो सकेगा । इसके लिए मुख्य रूप से शिक्षकों को प्रयास करने की आवश्यकता है । कार्यक्रम का प्रारंभ भारतीय शिक्षण मंडल के ध्येय श्लोक और ध्येय वाक्य से किया गया, समापन प्रार्थना और शांति मंत्र के साथ हुआ।