छठ’ को यूनेस्को में शामिल कराने के लिए बनी विशेषज्ञ समिति के सदस्य बनाये गया मनोज भावुक
‘छठ’ को यूनेस्को में शामिल कराने के लिए बनी विशेषज्ञ समिति के सदस्य बनाये गया मनोज भावुक
लोक संस्कृति और भाषा को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर संजोने में बहुत बड़ी भूमिका है मनोज भावुक की:शशि भूषण
भारत सरकार ने छठ महापर्व को यूनेस्को की हेरिटेज सूची में शामिल करने के लिए एक समिति का गठन किया है. इस प्रक्रिया में समुदायों की सहमति, सुदृढ़ दस्तावेज़ीकरण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता होती है. संस्कृति मंत्रालय और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) के सहयोग से संगीत नाटक अकादमी आधिकारिक डोज़ियर तैयार कर रही है।
संगीत नाटक अकादमी के इस महत्वपूर्ण पहल के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त लोक भाषा को संजोने वाले बिहार के लाल साहित्यकार,लेखक एवं पत्रकार मनोज भावुक को भी शामिल किया गया है।
इस बात की जानकारी मिलते ही देश और दुनिया में मानवाधिकार पत्रकारिता एवं वैशाली की लोक संस्कृति एवं भाषा को सार्क देशों में फैलाने वाले संंवाहक वरिष्ठ पत्रकार शशि भूषण कुमार ने बधाई देते हुये कहा है कि लोक संस्कृति और भाषा को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर संजोने में मनोज भावुक जी की बहुत बड़ी भूमिका है। इसी वर्ष वैशाली में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में उन्होंने लोक स्वर कोकिला पद्मश्री, पद्मभूषण एवं पद्मविभूषण प्राप्त डॉ शारदा सिन्हा के नाम से
“स्वर शारदा अन्तर्राष्ट्रीय सम्मान-2025” से आम्रपाली साहित्य सम्मेलन एवं मानवाधिकार टुडे द्वारा सार्क देशों के समारोह में दिया गया। इसकी घोषणा मॉरिशस से पहुंचे अंतरराष्ट्रीय संस्कृति संंवाहिका डॉ सरिता बुद्धू जी की उपस्थिति में की गयी थी। छट बिहार, उत्तरप्रदेश, झारखंड जैसे प्रदेशों में महापर्व के रूप मे माना जाता है। भारत ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE), सूरीनाम और नीदरलैंड जैसे देशों के राजनयिकों से संवाद किया है, जहाँ भारतीय प्रवासी समुदाय इस पर्व को बड़े पैमाने पर मनाता है. इसके अलावा, मॉरीशस और फ़िजी में भारतीय दूतावास भी इस प्रयास को समर्थन दे रहे हैं. यह बहुराष्ट्रीय दृष्टिकोण इस पर्व के वैश्विक स्वरूप को दर्शाते हुए नामांकन को मज़बूत करता है. भारत की पहले से ही 15 सांस्कृतिक धरोहरें यूनेस्को की सूची में शामिल हैं, जिनमें वैदिक चैंटिंग, कुटियट्टम, रामलीला, छाऊ नृत्य, योग, कुंभ मेला और कोलकाता की दुर्गा पूजा शामिल हैं.
लोक भाषा के लिए मनोज भावुक ने देश-विदेश की यात्रा की है, गिरमिटिया देशों में भी गए हैं. भारत सरकार के छठ से जुड़ी इस समिति का हिस्सा बनने पर खुशी ज़ाहिर की है।
