संत जोसेफ स्कूल के बच्चों की लोक संस्कृति की झलक दीपोत्सव एवं छठ की भावपूर्ण प्रस्तुति।
संत जोसेफ स्कूल के बच्चों की लोक संस्कृति की झलक दीपोत्सव एवं छठ की भावपूर्ण प्रस्तुति।
रिपोर्ट सुधीर मालाकार ।
महुआ (वैशाली)लोक संस्कृति की खुशबू, भक्ति की गूंज और कल की रचनात्मकता दीपोत्सव एवं छठ पूजा का संत जोसेफ स्कूल सिंघाड़ा के प्रांगण में भावपूर्ण रंगारंग आयोजन किया गया। इस भव्य आयोजन की शुभारंभ विद्यालय के प्राचार्य विवेक निर्देशक सत्येन्द्र कुमार सिंह, प्रबंधक श्रीमति सीमा सिंह एवं पत्रकार शशि कुमार सिंह, सुधीर मालाकार ने संयुक्त रूप दीप प्रज्वलित कर की। इस अवसर पर कल्पना चावला सदन -कप्तान मुजम्मिल नौशाद व नंदिनी, चंद्रशेखर वेंकट रमन सदन-कप्तान हर्षित व तनु प्रिया, रविंद्र नाथ टैगोर सदन-कप्तान अभय आनंद व साक्षी भारती तथा रतन टाटा सदन-कप्तान संस्कार सिंह वह शिवानी कुमारी उपस्थित थे।
प्राचार्य विवेक ने सभी बच्चों को ज्योतिर्मय दीपावली एवं सूर्योपासना की शुभकामनाएं प्रेषित किया। उन्होंने बच्चों से अपील की सभी स्वस्थ व सुरक्षित रहें। अपने संबोधन में उन्होंने बताया कि हम समर्थ भाव से बच्चों में भावनात्मक बुद्धिमत्ता का विकास करने हेतु प्रतिबद्ध हैं। सामूहिक गतिविधियां द्वारा दूसरों की भावनाओं को समझने व सबों को एक साथ करने की रणनीति विकसित करना ही हमारा उद्देश्य है।
व्यक्तिगत कल्याण से लेकर समाज कल्याण की शुरुआत बच्चों के दूसरे घर-विद्यालय के आंगन से हो ऐसा हमारा सतत प्रयास रहेगा। रतन टाटा सदन के छात्र-छात्राओं द्वारा की गई प्रस्तुति “नेकी की दीवार”—
जहां बच्चों ने अपने श्रद्धा और सामर्थ्य से जरूरतमंदों के लिए अपने-अपने घरों से खान -पीने से लेकर पहने ओढ़ने तक का सामान का स्टाल लगाए। टाटा सदन के शिक्षक शिक्षिकाओं द्वारा लगाए गए” मां की मिठाई”भी बच्चों में बांटी गई । सदन के कप्तान संस्कार सिंह कक्षा नवम एवं शिवानी कुमारी कक्षा दशम ने बताया कि स्टॉल के सामानों को हम अपने आसपास की जरूरतमंदों तक ले जाएंगे। हमारी कोशिश होगी कि उनकी दीपावली भी हंसी-खुशी गुजरे।
रविंद्र नाथ टैगोर सदन के शिक्षक शिक्षिकाओं ने रंगारंग रंगोली जिसका विषय “-मतदाता जागरूकता ” ,”एक भारत: नेक भारत”, वसुदेव कुटुंबकम आदि के द्वारा समस्त विश्व को अपनी रंगों में रचकर प्रदर्शित किया। इस सदन के कप्तान ने बता हर्ष राज एवं माल्या ने बताया कि मतदान के विषय में स्वयं जागरूक होकर हम अपने घरों और आसपास को अवश्य जागरूक करने का प्रयास करेंगे।
“चंद्रशेखर वेंकट रमन सदन”के सदन शिक्षकों सुमित कुमार, मोहम्मद शाहिद एवं सुश्री पूजा व रानी कुमारीने
“पर्यावरण अनुकूलता”विषय पर बच्चों से गतिविधि करवाई। शारदीय पर्वों में दीपोत्सव पर्यावरण अनुकूल और प्रथाओं का महत्व टिकाऊ भविष्य के लिए हैं। ऐसी भावना का संचार करने हेतु मिट्टी और गोबर से बनी हर्बल दीपक बनाने का प्रशिक्षण शिक्षकों द्वारा दिया गया।
इसी सदन छात्र-छात्राओं ने पूरे कार्यक्रम का ध्यान अपनी और आकर्षित किया। उन्होंने पटाखा -टॉल में”बीज बम”, पौधा फुलझड़ी और पेड़ -पटाखा लगाकर जानकारी दी ।हमारी प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य इसमें हरियाली, मिट्टी का स्वास्थ्य और शाम को फिर से लौटा लाना है।
कल्पना चावला सदन “शिक्षकों और छात्राओं ने अपनी प्रस्तुति द्वारा पूरे माहौल को भक्ति भाव और सकारात्मक स्पंदन भर दिया।
बाल- वाटिका चीज छोटे-छोटे बच्चों ने रैंप पर अपना जलवा दिखाया। सामुदायिक सहायकों, श्याम सीता की मनोहर जोड़ी और लक्ष्मी गणेश वेशभूषा में सभी धरती बच्चों ने खूब तालियां बटोरी। अपने मासूम मुस्कुराहट जगमग दिवाली की परंपरा को जलसा से हे बच्चों ने अपनी मासूमियत से सबों को आनंदित किया। बच्चो द्वारा प्रस्तुत “स्थायी विरासत -हमारी पारंपरिक लोक नृत्य” ने अद्भुत शमा बांधा। शरद ऋतु के आगमन पर फसल कटाई के मौसम में गाए जाने वाले झूमर, भाई बहन की असीम प्रेम वह टूट विश्वास का पर्व “सामा -चकेवा” व “लोक- आस्था का पर्व: छठ पूजा”पर प्रस्तुत की गई झांकी ने सबके मन को झंकृत कर दिया।
विद्यालय के निदेशक श्री सत्येंद्र कुमार सिंह ने शिक्षक-शिक्षिका के प्रयास की भूरी भूरी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि बच्चों के मन का रोशन होना ही उत्सव है।
उन्होंने बच्चों को समझाया कि आप अपनी कामयाबी हासिल करें। हर त्योहार यह महसूस करवाता है कि कामयाबी से बड़ा कोई उत्सव नहीं होता और
प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना ही भक्ति भाव हैं।
उन्होंने सभी अभिभावकों के प्रति अपना आभार जताते हुए कहा कि
वैसे सभी माता-पिता साधुवाद के पात्र हैं, जिन्होंने विद्यालय एवं घर के बीच में मजबूत संबंध बना रखा है। गतिविधियों के द्वारा बच्चों में कौशल विकास करना विद्यालय का लक्ष्य है ।
