मानवाधिकारों के उल्लंघन के मामले को रोकने के लिये जागरूकता जरूरी:शशि भूषण
मानवाधिकारों के उल्लंघन के मामले को रोकने के लिये जागरूकता जरूरी:शशि भूषण
रिपोर्ट: नसीम रब्बानी, बिहार
हाजीपुर शहर के टैगोर किड्स एंड हाई स्कूल में आज विश्व मानवाधिकार दिवस समारोह मनाया गया। सर्व प्रथम इस कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलित कर जमुनी लाल कॉलेज के राजनीतिक विज्ञान के विभागाध्यक्ष डॉ रजनीश कुमार,सदर अस्पताल हाजीपुर के पूर्व चिकित्सा पदाधिकारी डॉ अमर आलोक,प्राक प्रशिक्षण केंद्र के गणित के प्राध्यापक राजीव कुमार एवं स्कूल के निदेशक और देश-दुनिया में मानवाधिकार पत्रकारिता के लिए चर्चित व्यक्तिव वरिष्ठ पत्रकार डॉ शशि भूषण कुमार ने किया। वरिष्ठ पत्रकार डॉ शशि भूषण कुमार ने आगत अतिथियों का अंग वस्त्र दे कर सम्मानित किया। वरिष्ठ पत्रकार डॉ शशि भूषण कुमार ने अपने वक़्त में कहा कि मानवाधिकारों के उल्लंघन के मामले को रोकने के लिये जागरूकता जरूरी है। बिहार में पुलिस हिरासत और पुलिस कार्रवाई के दौरान मानवाधिकारों के उल्लंघन के मामले सामने आते रहे हैं, जिनमें हिरासत में मौतें (जैसे मुजफ्फरपुर में), यातना के आरोप, और जादू-टोना जैसे मामलों में पुलिस की निष्क्रियता/गलत कार्रवाई शामिल हैं, जिसके कारण राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) और स्थानीय प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ता है, और इन मामलों में न्यायिक जांच, मजिस्ट्रेट की निगरानी और अधिकारियों पर कार्रवाई की जाती है, लेकिन मानवाधिकारों की सुरक्षा के लिए सतर्कता और सख्त निगरानी ज़रूरी है।
जमुनी लाल कॉलेज के राजनीतिक विज्ञान के विभागाध्यक्ष डॉ रजनीश कुमार ने कहा कि मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा (UDHR) संयुक्त राष्ट्र द्वारा 10 दिसंबर 1948 को घोषित एक ऐतिहासिक दस्तावेज़ है, जिसमें सभी मनुष्यों के लिए मौलिक अधिकारों और स्वतंत्रता को रेखांकित किया गया है, जैसे जीवन, स्वतंत्रता, समानता, विचार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, और शिक्षा का अधिकार, जो किसी भी भेदभाव के बिना सभी लोगों पर लागू होते हैं और अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार कानून का आधार हैं, भले ही यह कानूनी रूप से बाध्यकारी न हो, लेकिन इसने विश्व भर के संविधानों और संधियों को प्रेरित किया है।सदर अस्पताल हाजीपुर के पूर्व चिकित्सा पदाधिकारी डॉ अमर आलोक ने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद, दुनिया भर के लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए एक साझा मानक बनाने की आवश्यकता महसूस हुई, जिसके परिणामस्वरूप 1948 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा इसे अपनाया गया।
सार्वभौमिकता: यह घोषणा करती है कि मानवाधिकार सार्वभौमिक हैं और सभी लोगों को समान रूप से प्राप्त होते हैं, चाहे उनकी जाति, लिंग, धर्म, राष्ट्रीयता या कोई अन्य स्थिति कुछ भी हो।
अधिकारों का समूह: इसमें 30 अनुच्छेद हैं जो नागरिक, राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकारों को कवर lकरते हैं, जैसे जीवन, स्वतंत्रता, निष्पक्ष सुनवाई, संपत्ति, काम और शिक्षा का अधिकार।स्वागत गान कुंदन कृष्णा ने किया जब कि धन्यवाद सुश्री पिंकी कुमारी ने किया। राष्ट्र गान के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया।
वक्ताओं ने अपने-अपने शब्दों में मानवाधिकार के महत्व एवं उपयोग पर विस्तार से प्रकाश डाला। इस अवसर पर रूसी कुमारी, विवेक सर,कुंदन कुमार, रेणु शर्मा, साक्षी कुमारी, लुवना नवाज, नेहा कुमारी, शबनम खानम,सुप्रिया कुमारी सहित सभी बच्चे उपस्थिति थे।
