February 10, 2026

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नए वर्ष 2026 के पहले घंटे में गुड समैरिटन एक्ट से बची एक ज़िंदगी

नए वर्ष 2026 के पहले घंटे में गुड समैरिटन एक्ट से बची एक ज़िंदगी
फुलवारी शरीफ (प्रवेज आलम)

नए वर्ष 2026 के बिल्कुल पहले घंटे में मानवता की एक सराहनीय मिसाल पेश करते हुए, एम्स पटना के ट्रॉमा सर्जरी एवं क्रिटिकल केयर विभाग के अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) अनिल कुमार ने समय पर हस्तक्षेप और ट्रॉमा प्रबंधन के मूल सिद्धांतों का पालन कर, एक सड़क दुर्घटना पीड़ित की जान बचाई।
रात लगभग 12:30 बजे, नए साल के जश्न के बाद अपने पुत्र श्री आदिर अनिलाभ के साथ घर लौटते समय, प्रो. कुमार ने दानापुर ओवरब्रिज के पास सड़क किनारे एक मोटरसाइकिल को गिरा हुआ देखा, जिसका पहिया अभी भी घूम रहा था। दुर्घटना की आशंका को भांपते हुए उन्होंने अपनी गाड़ी की गति धीमी की और शीघ्र ही सड़क के बीचों-बीच खून से लथपथ अवस्था में एक अचेत व्यक्ति को पड़ा हुआ देखा।
हालांकि प्रो. कुमार घर पहुँचने की जल्दी में थे, लेकिन उनके पुत्र ने भी उन्हें रुककर घायल की मदद करने के लिए प्रेरित किया। तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए प्रो. कुमार ने अपनी कार खड़ी की और घायल व्यक्ति की स्थिति का आकलन करने के लिए आगे बढ़े।
उत्कृष्ट प्री-हॉस्पिटल ट्रॉमा केयर का परिचय देते हुए, प्रो. कुमार ने सबसे पहले घटनास्थल की सुरक्षा सुनिश्चित की और घायल को सड़क के बीच से हटाकर किनारे सुरक्षित स्थान पर पहुँचाया। घायल व्यक्ति किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया नहीं दे रहा था। प्रो. कुमार ने तुरंत सर्वाइकल स्पाइन को स्थिर किया, जॉ-थ्रस्ट तकनीक से वायुमार्ग (एयरवे) खोला तथा रक्तस्राव को नियंत्रित करने के लिए प्रेशर बैंडेज लगाया।
इसी दौरान उन्होंने आसपास मौजूद लोगों से पुलिस को सूचना देने का अनुरोध किया, जबकि स्वयं एम्स पटना की एम्बुलेंस को फोन कर ट्रॉमा सेंटर की टीम को सक्रिय किया और मरीज की स्थिति के बारे में पूर्व जानकारी दी। पुलिस के पहुँचने पर, प्रो. कुमार ने इनलाइन स्पाइनल इममोबिलाइज़ेशन के साथ घायल को सुरक्षित एवं सही तरीके से अस्पताल पहुँचाने में सहयोग किया।
एम्स पटना की ट्रॉमा टीम ने मरीज को तुरंत प्राप्त किया और त्वरित व व्यवस्थित जांच एवं उपचार के माध्यम से उसे स्थिर किया। अगले ही दिन मरीज की स्थिति में उल्लेखनीय चिकित्सकीय सुधार देखा गया।
इस सकारात्मक परिणाम पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए प्रो. कुमार ने कहा कि आम नागरिकों द्वारा किए गए छोटे लेकिन समय पर कदम भी, विशेषकर ट्रॉमा जैसी आपात स्थितियों में, जीवन रक्षक सिद्ध हो सकते हैं। उन्होंने लोगों से बिना किसी भय के दुर्घटना पीड़ितों की सहायता के लिए आगे आने का आह्वान किया और गुड समैरिटन (निस्वार्थ मदद करने वाला व्यक्ति) सिद्धांत के महत्व पर बल दिया।
प्रो. कुमार ने बताया कि जिन प्रमुख कदमों से मरीज की जान बच सकी, वे इस प्रकार हैं:
1. पुत्र से मिली मजबूत इच्छाशक्ति और प्रेरणा
2. घायल को सड़क के बीच से हटाकर सुरक्षित स्थान पर ले जाना
3. पुलिस को सूचना देना और एम्बुलेंस बुलाना
4. ट्रॉमा टीम को पहले से सक्रिय करना
5. रक्तस्राव रोकने के लिए प्रेशर बैंडेज लगाना
6. जॉ-थ्रस्ट तकनीक द्वारा वायुमार्ग खोलना
7. इनलाइन इममोबिलाइज़ेशन के साथ सुरक्षित परिवहन
उन्होंने आगे कहा कि अस्पताल हर स्थान पर उपलब्ध नहीं हो सकते, इसलिए ट्रॉमा एवं आपात स्थितियों में आम लोगों द्वारा की गई प्रारंभिक देखभाल अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।
अगली सुबह, कार्यकारी निदेशक ब्रिगेडियर प्रो. (डॉ.) राजू अग्रवाल तथा चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अनुप कुमार ने मरीज और उसके परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने प्रो. अनिल कुमार और ट्रॉमा टीम को उनके जीवन रक्षक प्रयासों के लिए बधाई दी तथा आम जनता से गुड समैरिटन बनकर सड़क दुर्घटना पीड़ितों की सक्रिय सहायता करने की अपील की।

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