सावित्रीबाई फुले की 129वीं पुण्यतिथि सहदेई बुजुर्ग में नारी शिक्षा के प्रण की गूँज
सावित्रीबाई फुले की 129वीं पुण्यतिथि सहदेई बुजुर्ग में नारी शिक्षा के प्रण की गूँज
_रिपोर्ट: सुधीर मालाकार_
सहदेई बुजुर्ग (वैशाली) — भारत की प्रथम महिला शिक्षिका माता सावित्रीबाई फुले की 129वीं पुण्यतिथि अंधरावर चौक, पहाड़पुर तोई स्थित बालेश्वर सिंह सुदामा देवी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के सभागार में *नारी सम्मान समारोह* के रूप में श्रद्धापूर्वक मनाई गई। अध्यक्षता अधिवक्ता सुनील कुमार सिंह ने की। ज्योतिबा फुले-सावित्रीबाई फुले के चित्रों पर पुष्पांजलि अर्पित कर वक्ताओं ने याद किया कि जब बालिका शिक्षा को पाप कहा जाता था, तब 1848 में ज्योतिबा फुले ने पहला बालिका विद्यालय खोला और सावित्रीबाई फुले उसमें प्रथम शिक्षिका बनीं। रूढ़िवादियों ने उन पर कीचड़-गोबर तक फेंके, मगर उन्होंने हार नहीं मानी। आज नारियाँ शीर्ष पदों तक पहुँची हैं—यह उसी संघर्ष का प्रतिफल है।
सभा में डॉ. उमाशंकर निराला, सुनील कुमार सिंह, डॉ. बी.एन. शर्मा, भगवान प्रसाद साहू, प्रो. यादव वीणा भारती, कविता शर्मा, सरिता कुमारी, कंचन कुमारी, पुष्पलता, अंजू कुमारी, पूनम कुमारी, सुषमा झा, विपिन कुमार, अनिल सिंह, दिनेश सिंह, रघुनाथ सिंह, जामिल अख्तर, प्रो. सुधीर मालाकार सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे। वक्ताओं ने भारत सरकार से सावित्रीबाई-ज्योतिबा फुले को भारत-रत्न देने की माँग भी दोहराई। पूरा वातावरण शिक्षा-स्वाभिमान के संकल्प से भर गया।
