UPSC चयन प्रक्रिया में पसमांदा और दलित छात्रों के साथ भेदभाव के आरोप – इरफान जामियावाला ने उठाए सवाल
UPSC चयन प्रक्रिया में पसमांदा और दलित छात्रों के साथ भेदभाव के आरोप – इरफान जामियावाला ने उठाए सवाल
नई दिल्ली / पटना:
आल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज़ के राष्ट्रीय महासचिव इरफान जामियावाला ने सिविल सेवा परीक्षा के परिणाम को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि हाल ही में घोषित UPSC सिविल सेवा परीक्षा के परिणामों में सामाजिक न्याय का संतुलन दिखाई नहीं देता।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष कुल 958 उम्मीदवार सिविल सेवा परीक्षा में सफल हुए हैं। इनमें 317 जनरल, 306 OBC, 158 दलित (SC) और 73 आदिवासी (ST) उम्मीदवार शामिल हैं। विभिन्न विश्लेषणों के अनुसार लगभग 53 मुस्लिम उम्मीदवार सफल हुए बताए जा रहे हैं।
इरफान जामियावाला ने कहा कि भारत के मुसलमानों में लगभग 85 प्रतिशत आबादी पसमांदा वर्ग से आती है। इस हिसाब से 53 मुस्लिम उम्मीदवारों में से लगभग 45 उम्मीदवार पसमांदा समाज से होने चाहिए थे, लेकिन उपलब्ध जानकारी के अनुसार केवल करीब 18 पसमांदा उम्मीदवार ही सफल हो पाए हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि UPSC की चयन प्रक्रिया के इंटरव्यू चरण में पारदर्शिता की कमी है। उनका कहना है कि इंटरव्यू बोर्ड में अक्सर स्वर्ण जातियों के सदस्यों का प्रभुत्व रहता है, जिसके कारण दलित, पिछड़े और पसमांदा पृष्ठभूमि से आने वाले प्रतिभाशाली छात्रों को कई बार उचित अंक नहीं मिल पाते।
उन्होंने कहा कि यह केवल पसमांदा समाज का ही नहीं बल्कि दलित और अन्य वंचित वर्गों के युवाओं के साथ भी न्याय का सवाल है।
इरफान जामियावाला ने केंद्र सरकार से मांग की कि:
UPSC इंटरव्यू बोर्ड की सामाजिक संरचना का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए।
इंटरव्यू प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाया जाए और अंक सार्वजनिक किए जाएं।
दलित, पिछड़े और पसमांदा वर्ग के छात्रों के साथ किसी भी प्रकार के संभावित भेदभाव की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
उन्होंने कहा कि यदि देश की सर्वोच्च सिविल सेवा परीक्षा में भी सामाजिक न्याय सुनिश्चित नहीं होगा, तो यह लोकतंत्र और समान अवसर के सिद्धांत पर गंभीर सवाल खड़े करेगा।
उन्होंने सरकार से अपील की कि वह इस मुद्दे पर तत्काल संज्ञान लेकर जांच कराए और चयन प्रक्रिया को अधिक समावेशी और न्यायपूर्ण बनाए।
इरफान जामियावाला
राष्ट्रीय महासचिव
आल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज़
