स्वरांजलि संस्था संगीत क़े पर्याय थे स्वरों क़े शहंशाह रफ़ी साहेब : डा. ध्रुव कुमार
पटना सिटी । सप्त स्वरों क़े मालिक, रूहानी आवाज क़े शहंशाह रफ़ी साहेब ने सभी मिजाज़ क़े गाने गाकर दुनियाँ पर आज भी राज कर रहे हैं। शाश्त्रीय , उप शाश्त्रीय , सुगम सभी गायन पर उनका एकाधिकार था । वास्तव में वो संगीत क़े पर्याय थे । ये बातें आज स्वरांजलि द्वारा आयोजित रफ़ी साहेब क़े जन्मदिन पर पटना सिटी स्थित सरस्वती डिजिटल स्टुडिओ में हुए कार्यक्रम में संगीत मर्मज्ञ व शिक्षाविद डा. ध्रुव कुमार ने कही ।
कार्यक्रम संगीतकार पप्पू गुप्ता जी क़े अध्यक्षता में हुआ । उन्होनें कहा रफ़ी साहेब कलाकारों क़े आदर्श हैं। सादे समारोह में हुए कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गायक अनिल रश्मि ने कहा कोरोना को लेकर बहुत छोटा कार्यक्रम हुआ ।
रफ़ी साहेब क़े जन्मदिन को यादगार बनाते हुए संगीतकार जिम्मी गुप्ता ने ……. ये रेशमी जुल्फें ,ये शर्बती आँखें गाकर महफ़िल को रंगीन बना दिया .
आलोक चौबे ने …. बदन पे सितारे लपेटे हुए …।
अनिल रश्मि ने … हैप्पी बर्थडे टू यू रफ़ी जी .
सूरंजन राजवीर ने … बड़ी दूर से आए ….. प्यार क़ा तोहफ़ा …।
मंच संचालन अभिनेता जितेंद्र कुमार पाल ने किया जबकी धन्यवाद ज्ञापन नेक आलम किया .
** संगीत संयोजन: जेम्स बैंड क़ा था .
अंत में सभी कलाकारों ने अपनी पुरानी माँग को दुहराते हुए कहा क़ि पटना क़े हृदय स्थल पर उस्ताद रफ़ी साहेब की आदमकद प्रतिमा राज्य सरकार लगाकर उन्हें सम्मान दे यश क़े भागी बनें ।