ग्रामीण इलाकों के खेतों में गुंजा धान रोपनी के गीत
ग्रामीण इलाकों के खेतों में गुंजा रोपनी के गीत
एक साथ रोपनी शुरू होने के कारण किसानों को मजदूर मिलना हो रहा मुश्किल, किसान बता रहे धान रोपनी के लिए अभी है माकूल समय
महुआ, नवनीत कुमार
सावन में हुई पहली झमाझम बारिश से किसान धान रोपनी के लिए खेतों में उतर आए हैं। गुरुवार को यहां कहीं खेतों में ट्रैक्टरों की खरखराराहट सुनाई दी तो कहीं रोपनी के गीत गूंज रहे थे। किसानों ने बताया कि अभी धान की रोपनी के लिए यह माकूल समय है। इस समय रोपनी कर लेने से फसल अच्छी होगी।
मालूम हो कि महुआ अनुमंडल क्षेत्र कृषि प्रधान है। यहां खरीफ फसल काफी पैमाने पर किसानों द्वारा की जाती है। क्षेत्र के 90 फीसद आबादी खेती और पशुपालन पर निर्भर है। यहां की खेती प्रकृति पर आधारित है। प्रकृति साथ दिया तो किसानों के खेत फसल से लहलहा उठते हैं और घर में अन्न संपदा आती है। अगर मौसम रुखा हुआ तो वह ना घर के रहते हैं न घाट के। लंबे समय से बारिश की इंतजार में बैठे किसानों को धान रोपनी के लिए अच्छा मौका मिला है। बारिश ने उनके चेहरे पर रौनक ला दी है। जो किसान बिचरे गिरा रखे थे और पंपसेट से पानी देकर बचाए थे। वह इस बारिश में उसे उखाड़ कर रोपनी में जुटे हैं। कई किसानों ने बताया कि बिचरे गिराने के बाद सूखा पड़ जाने से वह नष्ट हो गए। जिससे वह रोपनी करने से वंचित हो रहे हैं। हालांकि किसानों ने यह भी बताया कि पुनः बिचरे गिरा कर धान की रोपनी करेंगे। हालांकि वह कुछ पश्चात होगा। जिसमें अच्छी फसल लेने के लिए कड़ी मेहनत करने पड़ेंगे। यहां किसान धान की रोपनी चौराहा क्षेत्र में अधिक करते हैं। वह उपरी भूमि पर किराना फसल लगाते हैं। किसानों ने बताया कि अच्छी किस्म के बिचरे गिराए थे जिसकी रोपनी कर रहे हैं।
बारिश के साथ रोपनी शुरू होने से मजदूर मिलना मुश्किल:
मौसम की पहली बारिश होने से एक साथ किसान धान की रोपनी में उतरे हैं। इसके कारण मजदूरों का मिलना मुश्किल हो रहा है। किसानों ने बताया कि धान की रोपनी के लिए मजदूर नहीं मिल रहे हैं। अधिक मजदूरी देने के बावजूद मजदूर की कमी पड़ रही है। जिसके कारण वह घर की महिलाएं व बच्चे को लेकर खेतों में उतर आए हैं और बिचरे उखाड़ कर उसकी रोपनी भी कर रहे हैं। किसान बताते हैं कि अभी का मौसम अगर उनके हाथ से निकल गया तो वे खाली हाथ रह जाएंगे। किसानों का कहना है कि यहां धान की रोपनी आषाढ़ महीने के दूसरे सप्ताह से शुरू होकर सावन के दूसरे सप्ताह तक चलती है। उतरते पुनर्वसु नक्षत्र ने किसानों के लिए खुशियां बरसाई तो पुष्य ने भी किसानों को साथ लेना शुरू किया। किसानों का कहना है कि जिन कर बने अषढबा उनकर बारहो मास। अगर आषाढ उनके लिए अच्छा बितता है तो साल खुशी भरा होता है। यह बारिश किसानों को धान रोपनी लायक हुई है। जिस खेतों में पानी की कमी पड़ गई है वहां वे पंपिंग सेट से हल्की बारिश पानी देकर उसमें कदवा कर रोपनी कर रहे हैं। खेतों में रोपनी करते समय महिला मजदूर गीत गाकर स्थल को भावमय बना दे रही है। इस बारिश से किसान बाग बाग हुए हैं।
