गोपाष्टमी का त्यौहार मंगलवार को महुआ के विभिन्न स्थानों पर श्रद्धा पूर्वक मनाई गई। इस मौके पर गृहस्थ परिवारों में उत्साह रहा। किसान परिवार के लोगों ने गायों को नहला धोकर उसे विधिवत पूजन किया। गृहस्थ परिवारों के लिए मवेशी एक आजीविका का साधन माना गया है। खासकर गाय को पालने से गरीब परिवार का आजीविका चल जाता है। किसान परिवार के लोगों ने गाय को चंदन लगाएं, अक्षत और फूल की वर्षा की, उसके चरण पखारे और आरती उतारी। माखन मलाई का भोग लगाया और उनकी परिक्रमा की। इसके साथ ही गौ माता से अपनी कृपा बनाए रखने की प्रार्थना की। बताया गया कि भगवान श्री कृष्ण ने गायों को चराने के लिए नंद बाबा से अनुमति मांगी थी। इस बीच नंद बाबा ऋषि शांडिल्य के पास जाकर शुभ मुहूर्त की जानकारी ली थी। उन्होंने आज ही के दिन कार्तिक शुक्ल पक्ष अष्टमी यह शुभ मुहूर्त बताया। श्री कृष्ण ने इसी दिन से उन्होंने गायों को चराना शुरू किया था। जबकि दूसरी कथा यह भी है कि इंद्रदेव की गुस्सा से बचाने के लिए भगवान श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत का धारण किया था और गायों के साथ ब्रज वासियों की रक्षा की थी। इंद्रदेव का अभिमान चूर हुआ और आज ही के दिन उन्होंने गाय की पूजा की थी। इस कारण आज के दिन गोपाष्टमी का त्यौहार मनाया जाता है। खासकर जिनके यहां काफी संख्या में गायों को पाला गया है। वहां तो यह पूजा काफी विधि विधान के साथ हुई। गौशालाओं खटालो में गोपाष्टमी पूजा की धूम रही।