एदार ए शरिया के जलसा में दहेज मुक्त शादी और शराब नहीं पीने की ली शपथ
एदार ए शरिया के जलसा में दहेज मुक्त शादी और शराब नहीं पीने की ली शपथ
महुआ शाही मस्जिद पर आयोजित जलसा में उलेमाओं और मौलानाओं ने की शिरकत
महुआ, नवनीत कुमार
एदार ए शरिया द्वारा समाज सुधार जलसा सह सम्मेलन शुक्रवार की रात यहां शाही मस्जिद पर संपन्न हुआ। जलसा में तशरीफ लाए मौलानाओं और उलेमाओं ने अपने समाज के युवाओं को दहेज और शराब से तौबा करने की नसीहत दी। इस जलसा में मुख्य रूप से पधारे एदार ए शरिया कार्यालय पटना के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व सांसद मौलाना गुलाम रसूल बलियावी ने कहा की हम सबको समाज को दहेज प्रथा को तौबा कर और शराब मुक्त बनाना है। सामाजिक कुरीतियों को त्याग कर शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ना है। तब जाकर राष्ट्र उन्नति की राह पर जाएगा। मौलाना बलियावी की तकरीर को सुनकर यहां सैकड़ों युवाओं ने उनके बताए मार्ग पर अपने जीवन को प्रशस्त करने का संकल्प दोहराया। मौलाना बलियावी ने युवाओं को समाज सुधार में आगे आकर यहां से देश को एक अच्छा संदेश देने की अपील की। उन्होंने कहा कि दहेज मुक्त विवाह के साथ शराब मुक्त समाज बनाकर देश को एक अच्छा संदेश देंगे। सम्मेलन की अध्यक्षता क़ाज़ी जावेद अख्तर फैजी व मुफ्ती अली रज़ा मिस्बाही ने किया। इस समाज सुधार जलसा में यूपी मुरादाबाद से तशरीफ लाए उलेमा मुफ्ती अब्दुल मन्नान कलीमी, नवादा के मौलाना नोमान अख़्तर, पटना के सय्यद अहमद रज़ा व मुफ्ती अमजद ने भी लोगों को परिवार, समाज और राष्ट्र की उन्नति को लेकर सामाजिक कुरीतियों को दूर करने तथा आपसी एकता, सहिष्णुता, अपनत्व, भाईचारा कायम रखने पर जोर दिया। कोलकाता से पधारे शायर दिलबर शाही, झारखंड से हबीबुल्लाह फैजी, दिलकश ने जब शेर सुनाया लोग महफिल झूम उठा। इस जलसे में जिले के विभिन्न प्रखंडों से भारी संख्या में उल्मा, सुफी, हज़रात ने शिरकत की। इस जलसे में कारी जावेद, मकबूल शहबाजपुरी आदि नें उलेमाओं का इस्तकबाल किया। इस जलसे में इस्लाम धर्म के बारे में भी बताया गया और लोगों को सच्चाई की राह पर चलने के लिए कहा गया। हाजी बब्लू, हाफ़िज़ सईद, मोअज्जम सरकार, हाजी मंसुर युसुफी, मौलाना माआज, मुस्तकीम, हामिद रज़ा, अबुनसर, हसरत बरकाती, शब्बीर निजामी, क़ारी इमाम बख़्श, कसीमुल हक, मौलाना नुरे नबी, जौहर वैशालवी, हाफ़िज़ सद्दाम आदि ने सक्रिय भूमिका निभाई। कार्यक्रम की समाप्ति पर मौलानाओं और उलेमाओं ने समाज के लोगों के साथ आवाम की हिफाजत और मुल्क की सलामती के लिए दुआ फरमाया।
