May 1, 2026

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एमडीए कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए जिले के सभी बीसीएम का हुआ एकदिवसीय उन्मुखीकरण

एमडीए कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए जिले के सभी बीसीएम का हुआ एकदिवसीय उन्मुखीकरण

-ड्रग एडमिनिस्ट्रेटर हेतु प्रशिक्षण मॉड्यूल की दी गई जानकारी

– 10 से 25 फरवरी तक खिलाई जाएगी दवा

रिपोर्ट नसीम रब्बानी, बिहार

मोतिहारी।

जिले के 23 प्रखंडों में 10 से 25 फरवरी तक चलने वाले एमडीए कार्यक्रम के सफल संचालन हेतु जिले भर के बीसीएम का जिला स्वास्थ्य समिति मोतिहारी में एकदिवसीय उन्मुखीकरण सह प्रशिक्षण स्वास्थ्य विभाग के जिलास्तरीय पदाधिकारियों डीसीएम नन्दन झा एवं केयर इंडिया के डीपीओ मुकेश कुमार द्वारा कराया गया। मौके पर उपस्थित बीसीएम को ड्रग एडमिनिस्ट्रेटर हेतु प्रशिक्षण मॉड्यूल की भी जानकारी दी गई। प्रशिक्षण के दौरान बैनर, पोस्टर के द्वारा लोगों में जन जागरूकता की बात बताई गई। डीसीएम नन्दन झा ने बताया कि फाइलेरिया एक गंभीर रोग है, जो शरीर को अपंग और कुरूप करने वाली बीमारी है। इससे सुरक्षित रहने का एकमात्र विकल्प एमडीए राउण्ड के दौरान सर्वजन दवा सेवन करना है। उन्होंने बताया कि दीर्घकालीन विकलांगता में यह बीमारी विश्व में दूसरे स्थान पर है।

– फाइलेरिया जानलेवा नहीं, पर गम्भीर बीमारी

केयर डीपीओ मुकेश कुमार ने प्रशिक्षण के दौरान बताया कि- लिम्फैटिक फाइलेरिया को आम तौर पर हाथी पांव के नाम से जाना जाता है। इस बीमारी का संक्रमण आमतौर पर बचपन में ही हो जाता है। संक्रमण के बाद 5 से 15 वर्ष के बाद मनुष्यों में यह हाथीपांव, हाइड्रोसील, महिलाओं के स्तनों में सूजन इत्यादि के रूप में दिखाई देता है।फाइलेरिया जानलेवा बीमारी नहीं है, लेकिन यह प्रभावित व्यक्तियों एवं उसके परिवार पर गंभीर सामाजिक एवं आर्थिक प्रभाव डालता है। इसका प्रभाव भारत के 257 जिलों में है। जबकि बिहार के सभी 38 जिले इससे प्रभावित है।वहीँ उपस्थित बीसीएम को बताया गया कि एमडीए कार्यक्रम के दौरान सभी दलों को एक फैमिली रजिस्टर उपलब्ध करायी जाएगी। जिनमें वह अपने कार्य क्षेत्र के प्रत्येक घर के प्रत्येक सदस्य का विवरण लिखेंगे। साथ ही फाइलेरिया मरीज की लाइन लिस्टिंग भी इस रजिस्टर के माध्यम से होगी । इस रजिस्टर को पूरी सावधानी के साथ भरना है। प्रत्येक 10 टीमों पर एक सुपरवाइजर रहेंगे। प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी के द्वारा बताया गया कि सभी लाभार्थियों को आशा के द्वारा डीईसी एवं अल्बेंडाजोल की दवा घर-घर जाकर अपने सामने ही खिलानी है।

– इस प्रकार खिलाई जाएगी दवा;

भीडीसीओ धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि फाइलेरिया से बचाव को 2 से 5 वर्ष के बच्चों को डीईसी की 1 गोली और अल्बेंडाजोल की 1 गोली, 6 से 14 वर्ष के बच्चों को डीईसी की 2 गोली व अल्बेंडाजोल की 1 गोली तथा 15 वर्ष से ऊपर के लोगों को डीईसी की 3 गोली व अल्बेंडाजोल की 1 गोली खिलाई जाएगी।

– दवा का हल्का साइड इफेक्ट हो सकता है, घबराएं नहीं

जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ शरत चन्द्र शर्मा ने बताया कि खाली पेट दवा नहीं खानी है। उन्होंने दवा खाने से होने वाले प्रतिकूल प्रभाव के बारे में बताया कि यह दवा खाने से शरीर के अंदर मरते हुए कीड़ों की वजह से कभी-कभी किसी व्यक्ति को सिर दर्द, बुखार, उल्टी, बदन पर चकते एवं खुजली हो सकती है । इससे घबराने की जरूरत नहीं है। यह स्वत: ठीक हो जाएगा। फिर भी ज्यादा दिक्कत होने पर ऐसे लोगों को चिकित्सकों की निगरानी में रखा जाएगा ।

मौके पर डीसीएम नन्दन झा, डैम अभिजीत भूषण, केयर डिटीएल स्मिता सिंह, डीपीओ मुकेश कुमार, यूनिसेफ के धर्मेंद्र कुमार, आरबीएसके जिला कार्यक्रम प्रभारी डॉ मनीष कुमार, डॉ राहुल राज , भिडिसीओ धर्मेंद्र कुमार, सत्यनारायण उराँव, चंद्रभानु कुमार, अवधेश यादव सहित सभी बीसीएम व स्वास्थ्य कर्मी मौजूद थे।

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