जलजीवन हरियाली को लेकर सुस्त पड़े पदाधिकारी, अतिक्रमण मुक्त नहीं हुआ सरकारी पोखर
जलजीवन हरियाली को लेकर सुस्त पड़े पदाधिकारी, अतिक्रमण मुक्त नहीं हुआ सरकारी पोखर
समस्तीपुर(जकी अहमद)
सिंघिया प्रखंड क्षेत्र में सरकार की महत्वकांक्षी योजनाओं में से एक जलजीवन हरियाली धड़ातल पर उतरती नहीं दिख रही है। इस योजना को लेकर चले अभियान के दो साल बाद भी प्रखंड क्षेत्र में असर नहीं दिख रहा है। हलांकि आरम्भ में जिस तेजी से अभियान को लेकर कोशिश की जा रही थी, तत्काल उसका असर भी दिखा। कई गांवों आहर और पोखर को अतिक्रमण मुक्त करने को लेकर अंचल प्रशासन से नोटिस भी दिए गए थे लेकिन विगत करीब एक साल से इस अभियान को लेकर सिर्फ खानापूरी चल रही है। वर्तमान में यह अभियान कागज पर सिमटकर रहते जा रहा है। पिछले एक दो साल से मनरेगा से सिर्फ सोख्ता व कुछ पंचायतों वृक्षारोपण की खानापूरी की गई है। पोखर व अन्य छोटे छोटे जलाशय के संरक्षण की दिशा में कार्य नहीं किए जा रहे हैं। प्रखंड के प्राय: सभी पंचायतों में सरकारी पोखरों का स्थानीय दबंगों के द्वारा अतिक्रमण कर लिया गया है। ये जानकारी प्रखंड के पदाधिकारियों को भी है पर वे मौन हैं। जिस तरह सरकार उक्त अभियान को लेकर सख्त हैं उसी तरह यहाँ के पदाधिकारियों इस अभियान को धड़ातल पर उतारने को लेकर सुस्त बने हुए हैं। ताजा मामला लिलहौल पंचायत अंतर्गत हरिपुर गांव स्थित पोखर की हैं, जहाँ वर्षों से इस पोखर का स्थानीय कुछ दबंग लोगों ने अतिक्रमण कर रखे हुए हैं। जिससे स्थानीय गरीब ग्रामीणों को इस सरकारी पोखर से लाभ नहीं मिल पा रहा है। अगल बगल के खेतों की सिंचाई समेत अन्य कार्य को लेकर इस पोखर उपयोग सिर्फ दबंग लोग ही करते हैं। ऐसे में कुछ स्थानीय लोगों ने आम लोगों को इस पोखर से लाभान्वित करने के उद्देश्य से अंचल प्रशासन समेत अनुमंडल व जिलापदाधिकारी को आवेदन देकर पोखर को अतिक्रमण मुक्त करने व सौंदर्यीकरण करने की मांग की है। आवेदन देने वालों में स्थानीय अरविंद यादव, रामपुकार यादव, अर्जुन यादव, राजेंद्र यादव आदि का नाम शामिल है। वहीं प्रखंड व अंचल प्रशासन के उक्त महत्वकांक्षी योजना की ओर उदासीन रवैए से लोगों के बीच यह चर्चा काफी तेज हो गई है कि कहीं सात निश्चय के तहत नलजल योजना की तरह जलजीवन हरियाली भी कागजों में सिमटकर न रह जाय।
