मिट्टी के चूल्हे का निर्माण और गेहूं को सुखाने में जुटी व्रतिया: महुआ। रेणु सिंह
मिट्टी के चूल्हे का निर्माण और गेहूं को सुखाने में जुटी व्रतिया:
महुआ। रेणु सिंह
महुआ और आसपास के इलाकों में व्रतियों द्वारा महापर्व छठ की प्रसाद बनाने के लिए गेहूं को धोकर सुखाया जा रहा है तो कहीं मिट्टी के चूल्हे बनाने में वह लगी है। पर्व पर खरना का महाप्रसाद मिट्टी के नए चूल्हे पर आम या गोइठा के जलावन से बनाए जाते हैं। जलावन में आम की लकड़ी और गोइठा पवित्र और शुद्ध माना गया है। इसके कारण महापर्व का प्रसाद आज के आधुनिक युग में भी मिट्टी के चूल्हे पर आम के लकड़ी और गोइठा के जलावन से ही बनाए जाते हैं। व्रतियों द्वारा गेहूं को ओखल में रखकर छंटाई और धोकर सूखाने के बाद उसे धोए गए चक्की में पिसाया जाएगा।
आज मिट्टी के नए चूल्हे पर आम की लकड़ी या गोइठा से बनेंगे महाप्रसाद:
शनिवार को महापर्व छठ के दूसरे दिन व्रती द्वारा खरना किया जाएगा। व्रतियों द्वारा शाम में मिट्टी के नए चूल्हे पर आम की लकड़ी या गोइठा के जलावन से दूध में गुड़ की खीर और रोटी बनाई जाएगी। उनके द्वारा नेवज काढे जाएंगे। घर परिवार के लोग नेवज के साथ प्रसाद ग्रहण करेंगे। वहीं व्रतियां इसी महाप्रसाद को ग्रहण कर पूरे 36 घंटे के लिए महाउपवास पर चली जाएंगी। यही एक पाव है जिसमें पर्व का महाप्रसाद खाने के लिए श्रद्धालु बगैर बुलाए और बिना निमंत्रण के व्रती के पास पहुंचते हैं।
सांझ पहर देवयन अरधिया सुबह मांगबे जरूर:
पर्व को लेकर आस्था और भक्ति ऐसी की हर जगह छठी माई के गीत गाए जा रहे हैं। घर में हर काम महिलाएं छठी माई के गीत गाकर ही कर रही हैं। छठी माई के गीत से पूरा इलाका भावमय बना हुआ है। सांझ पहर देवयन अरधिया सुबह मांगबे जरूर, केलवा के फुटले घौंद से ऊपर सुगा मंडराय मारबौ से सुगवा घनुष से आदि गीत चाहूं और सुनने को मिल रहे हैं। महंगाई की मार में भी ग्रामीण परिवार के लोग पर्व को पूरी निष्ठा, भक्ति और आस्था के बीच करने में लगे हैं।
