गुमनामी में खो गए अयोध्या कार सेवक अनिरुद्ध कुमार सिंह ।
गुमनामी में खो गए अयोध्या कार सेवक अनिरुद्ध कुमार सिंह ।
रिपोर्ट सुधीर मालाकार।
वैशाली ! महुआ, वर्ष 1992 में कर सेवकों द्वारा अयोध्या में विवादित ढांचे को ध्वस्त किया गया ।लंबे लड़ाई के बाद प्रभु श्री राम अपने निवास में विराजमान होने वाले हैं ।जहां पर कार सेवकों को याद कर उनके प्रति कृतज्ञता प्रकट की जा रही है, वही गुमनामी की अंधेरे में खो गए अयोध्या कार सेवक महुआ प्रखंड के हरपुर बेलवा ग्राम निवासी अनिरुद्ध कुमार सिंह ।जब उनसे घटना की जानकारी ली गई तो कार सेवकों की हमले की कहानी को सुनते हुए कहा हमारे गांव और पंचायत से लगभग 170 लोगों का जत्था 4 दिसंबर1992 को हाजीपुर स्टेशन पर एकत्रित होकर जिला भाजपा के तरफ से सभी लोग का परिचय पत्र बनाया गया ।उसके बाद ट्रेन के द्वारा अयोध्या जी के लिए रवाना हुए। फैजाबाद स्टेशन पहुंचे, वहां पहुंचकर बस द्वारा अयोध्या जी हनुमान गढ़ी मंदिर में रहने का स्थान दिया गया ।कल होकर 6 दिसंबर को साध्वी ऋतंभरा, उमा भारती, लालकृष्ण आडवाणी,मुरली मनोहर जोशी एवं अन्य नेता की भाषण हो रही थी ,इसी समय हम लोग बाबरी मस्जिद को तोड़ने में लग गए और 1:00 बजे तक ढांचा को तोड़कर ध्वस्त कर दिया और भगवान श्री राम लला का मंदिर निर्माण शुरू कर दिया गया। जिसमें हमारे साथ गांव के मधुकांत सिंह, अभय कुमार सिंह, आलोक कुमार सिंह, रमेश कुमार सिंह, अमरनाथ सिंह, लगन देव राय ,सकल राय ,रामकिशन पासवान एवं अन्य 170 आदमी का जत्था साथ में थे ।शाम को जब राष्ट्रपति शासन लग गई, हम लोग हाजीपुर स्टेशन आ गए। सुबह में हाजीपुर स्टेशन पर पुलिस का पहरा के कारण दिघी रेलवे लाइन से निकाल कर घर वापस आ गए ।श्री अयोध्या जी से एक ईंट जिसमें प्रभु श्री राम का नाम लिखा था ,जिसे अपने गांव में रखकर श्री राम धुन का आयोजन किया गया ।उस दिन को आज भी हम लोग याद करते हुए 22 जनवरी को प्राण प्रतिष्ठा शुभ अवसर पर अपने गांव में भी भगवान श्री राम नाम पूजा कीर्तन एवं दीपावली का आयोजन सभी ग्रामवासी सहयोग से किया जा रहा है। हम लोगों की पीढ़ी धन्य है, जो प्रभु श्री राम के प्राण प्रतिष्ठा का आनंद ले रहे हैं।
