बट सावित्री व्रत पर सुहागिनों ने बरगद बृक्ष के लगाए फेरे
बट सावित्री व्रत पर सुहागिनों ने बरगद बृक्ष के लगाए फेरे
पंडितों से सुनी सावित्री और सत्यवान की पति पत्नी प्रेम कथा, धर्मस्थल पर बट वृक्ष के पास फेरे लगाने के लिए सुहागिनों की सुबह से ही लगी रही भीड़
महुआ। रेणु सिंह
अखंड सौभाग्य की प्राप्ति को लेकर सुहागिनों ने गुरुवार को बट सावित्री व्रत पर निर्जला उपवास रखा। उन्होंने बट वृक्ष के फेरे लगाए और सावित्री सत्यवान की पति पत्नी की अमर प्रेम कथा सुनी। व्रत को लेकर धर्म स्थलों पर बरगद वृक्ष के फेरे लगाने के लिए सुबह से ही सुहागिनों की भीड़ लगी रही। वही इस पर्व को लेकर सुहागिनों में उत्साह, उमंग के साथ भक्ति परवान पर रही।
महुआ के पुराना बाजार स्थित बट वृक्ष के पास अहले सुबह से ही सुहागिनों की भीड़ जुट गई। उन्होंने अपने अनुसार बट वृक्ष के 7 से लेकर 108 बार फेरे लगाए और अमर सुहाग की कामना की। यहां पूजन के लिए पहुंची सोनी, दिव्या, नीतू, राजनंदिनी, प्रीति, रेणु, संगीता, प्रिया, ममता, सोनाली, पूजा, काजल आदि ने बताया कि यह पर सुहागिनों के लिए फलदाई है। पर्व को करने से सुहाग की रक्षा होती है। यह पर्व सुहागिने सोलहो श्रृंगार में सज सवरकर करती हैं। उन्होंने यह भी बताया कि ज्येष्ठ अमावस्या के दिन ही सावित्री ने यमराज से बट वृक्ष के पास अपने पति सत्यवान का प्राण वापस लिया था। कथा सुना रही किरण झा ने बताया ज्येष्ठ अमावस्या के दिन सुहागिनों द्वारा बट वृक्ष के फेरे लगाने से सौभाग्य की प्राप्त की होती है। वहीं कुंवारी लड़कियों के करने से उसे मनचाहा वर प्राप्त होता है। पर्व पर सुहागिने पति की सेवा में पंखा झेलती हैं। महुआ के कालीघाट, महावीर मंदिर, मंगरू चौक के अलावा फुलवरिया, बैद्यनाथपुर, सरसई, नारायणपुर, बिरना, सेहान, लक्ष्मीपुर, डोगरा, हरपुर बेलवा, मधौल, मरीचा, कुशहर, सिंघाड़ा, भरतपुर, बावनघाट, गोरीगामा, पहाड़पुर, कन्हौली, बरियारपुर, बखरी सहित विभिन्न जगहों पर बट वृक्ष के फेरे लगाने के लिए सुहागिनों की भीड़ रही।
