March 9, 2026

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चाइल्ड पोर्नोग्राफी देखना, डाउनलोड करना अपराध : सुप्रीम कोर्ट

चाइल्ड पोर्नोग्राफी देखना, डाउनलोड करना अपराध : सुप्रीम कोर्ट

एक्सेस टू जस्टिस के तहत बिहार के वैशाली जिले के स्वयंसेवी संस्था स्वर्गीय कन्हाई शुक्ला सामाजिक सेवा संस्थान वर्ष 2022 से कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन फाउंडेशन नई दिल्ली के सहयोग से एवं जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में बच्चों के हित में जैसे – बाल विवाह मुक्त, मानव तस्करी मुक्त, बाल श्रम मुक्त एवं बाल यौनशोषण मुक्त बिहार बनाने के लिए कार्य कर रही है|
जस्ट राइट फॉर चिल्ड्रेन, राष्ट्रीय व्यापी गठबंधन है । जिसका सदस्य स्वर्गीय कन्हाई शुक्ला सामाजिक सेवा संस्थान भी है और माननीय मद्रास हाई कोर्ट के आदेश के विरुद्ध एक जनहित याचिका देश भर के 200 से अधिक संस्थाओं ने जो देश के 400 से अधिक जिले में बाल यौन शोषण के विरुद्ध कार्य कर रही है ।उसी के तहत मामला माननीय सर्वोच्च न्यायालय नई दिल्ली में जनहित याचिका दायर की गई थी। जिस आलोक में दिनांक:23.09.2024 दिन सोमवार को माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने आज ऐतिहासिक फैसला दिया है कि सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि चाइल्ड पोर्नोग्राफी डाउनलोड करना और देखना POCSO और IT एक्ट के तहत अपराध है।
मुख्य न्यायधीश डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने माननीय मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को खारिज करते हुए फैसला सुनाया। मद्रास हाईकोर्ट ने कहा था कि अगर कोई ऐसा कंटेंट डाउनलोड करता और देखता है, तो यह अपराध नहीं, जब तक कि नीयत इसे प्रसारित करने की न हो। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसे कंटेंट का स्टोरेज, इसे डिलीट ना करना और इसकी शिकायत ना करना बताता है कि इसे प्रसारित करने की नीयत से स्टोर किया गया है। हाईकोर्ट ने ये केस खारिज करके अपने फैसले में गंभीर गलती की है। हम उसका फैसला रद्द करते हैं और केस को वापस सेशन कोर्ट भेजते हैं। हम संसद को सुझाव देते हैं कि POCSO एक्ट में बदलाव करें और इसके बाद पोर्नोग्राफी शब्द की जगह चाइल्ड सेक्शुअली एब्यूसिव एंड एक्सप्लॉइटेटिव मटेरियल (CSEAM) का इस्तेमाल किया जाए। इसके लिए अध्यादेश भी लाया जा सकता है। CSEAM शब्द सही तरीके से बताएगा कि यह महज अश्लील कंटेंट नहीं, बच्चे के साथ हुई घटना का एक रिकॉर्ड है। वो घटना जिसमें बच्चे का यौन शोषण हुआ या फिर ऐसे शोषण को विजुअली दिखाया गया हो।
माननीय सर्वोच्च न्यायालय नई दिल्ली के फैसले पर पर बिहार में बच्चों के हित में काम करने वाले स्वयंसेवी संस्था स्वर्गीय कन्हाई शुक्ला सामाजिक सेवा संस्थान के सचिव सुधीर कुमार शुक्ला ने कहा कि बच्चो के हित में लिया गया निर्णय है। देश के सभी बच्चो का सुरक्षित बचपन, सुरक्षित भारत का सपना साकार होगा । सबका साथ सबका विकास, देश का विकास तब संभव होगा|श्री शुक्ला ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता, लेखक एवं बच्चों के हित में लगातार पूरे विश्व में कार्य करने वाले भुवन विभु ने इसमें अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है तथा उन्हें के मार्गदर्शन में हम सभी स्वयंसेवी संस्थाओं ने बच्चों के हित में यह जीत हासिल की है।

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