वैशाली में आयोजित हुआ बज्जिका महोत्सव
वैशाली में आयोजित बज्जिका महोत्सव में पहुंचे भारत-नेपाल के प्रतिनिधिसा हित्यिक सांस्कृतिक संस्था बज्जिका मंदाकिनी, रौदीपोखर के तत्वाधान में बज्जिका महोत्सव का रंगारंग आयोजन वैशाली जिला के गोविंदपुर सिंघाड़ा दुर्गा स्थान से सटे नवजीवन पब्लिक स्कूल के प्रांगण में किया गया। समारोह की अध्यक्षता लक्ष्मी नारायण महाविद्यालय के पूर्व प्राध्यापक डॉo रणवीर कुमार राजन ने जबकि मंच संचालन बज्जिका मंदाकिनी के सह संयोजक राघवेंद्र प्रताप ने किया।
सारस्वत समारोह के इस मंच पर मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व वि वि प्राध्यापक डॉo रामप्रवेश सिंह, उद्घाटन कर्ता के रूप में पूर्व प्राध्यापक डॉo दामोदर प्रसाद सिंह, मुख्य वक्ता के रूप में डॉo देवेंद्र राकेश, विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रबुद्ध साहित्यकार और प्रखर पत्रकार सुरेन्द्र मानपुरी, अति विशिष्ट अतिथि के रूप में नेपाल से आए बज्जिका महाकवि संजय साह मित्र, अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त मानवाधिकार पत्रकारिता के संवाहक डॉ शशिभूषण कुमार, जनता दल यूनाइटेड की प्रखर नेत्री डॉo आसमा परवीन, स्थानीय संरक्षक अभियंता सोहन प्रसाद सिंह,ज्ञान ज्योति गुरुकुलम के संस्थापक अजीत कुमार आर्य और वरिष्ठ बज्जिका साहित्यकार ज्वाला सांध्यपुष्प उपस्थित थे।
‘बज्जिका मंदाकिनी’ के संयोजक-सह- ‘बज्जिका बेआर’ पत्रिका के सम्पादक मणिभूषण प्रसाद सिंह ‘अकेला’ ने आगत अतिथियों को माला और अंगवस्त्रम से सम्मानित कर उनके सम्मान में सारगर्भित स्वागत भाषण प्रस्तुत किया जबकि लोक गायिका सरस्वती मिश्रा ने स्वागत गीत और देवी भक्ति गीत प्रस्तुत कर उपस्थित जन समुदाय का मन मोह लिया।
महोत्सव का शुभारंभ मंचासीन अतिथियों द्वारा सप्तमुखी पीत-स्तंभ दीप के प्रज्वलन से किया गया।
चूंकि यह समारोह बज्जिका के मूर्द्धन्य साहित्यकार और चिंतक स्वo डॉo सियाराम तिवारी की स्मृति में समर्पित था अतः सभी अतिथियों द्वारा दिवंगत साहित्यकार की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई।
तीन खंडों में आयोजित इस समारोह के प्रथम सत्र में बज्जिका भाषा की वर्तमान दशा और दिशा पर विद्वानों ने अपने विचार प्रस्तुत किए।
संयोजक मणिभूषण प्रसाद सिंह अकेला ने बज्जिका भाषा को आदि गणतंत्र की जननी बज्जिसंघ की मातृभाषा बताया तथा सरकारी स्तर पर इसकी उपेक्षा पर क्षोभ व्यक्त करते हुए केंद्र और राज्य सरकारों से बज्जिका के लिए जनगणना कोड निर्धारण,बज्जिका अकादमी गठन, प्रारंभिक स्कूलों तथा विश्वविद्याल में बज्जिका की पढ़ाई शुरू करने सहित बज्जिका को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने संबंधी अपनी पांच सूत्री मांग रखी।
मुख्य अतिथि डॉo रामप्रवेश सिंह ने बज्जिका भाषा को प्राचीन भाषा की श्रेणी में शुमार करते हुए इसे बज्जिकाञचल की सभ्यता-संस्कृति का संवाहक बताया और इसके संरक्षण पर बल दिया। मुख्य वक्ता डॉo देवेंद्र राकेश ने बज्जिका को उत्तर बिहार के सात जिलों के बड़े भूभाग सहित देश-विदेश में फैले लगभग चार करोड़ लोगों की मातृभाषा बताते हुए अभी तक इसे उचित हक नहीं दिए जाने पर दुख व्यक्त किया तथा जनजागरण, सत्याग्रह और शांतिपूर्ण प्रदर्शन को इसके हक प्राप्ति के लिए जरूरी बताया। अनेक वक्ताओं ने बज्जिका की दुर्दशा के लिए बज्जिकांचल क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों की चुप्पी और उदासीनता को जिम्मेदार ठहराया तथा आसन्न विधान सभा चुनाव में इसका खामियाजा भुगतने की चेतावनी दी।
जद यू नेत्री डॉo आसमा परवीन ने बज्जिका को समृद्ध भाषा बताया तथा बज्जिकाँचल वासियों की अपनी मातृभाषा संबंधी वाजिब मांग का समर्थन करते हुए अपनी पार्टी तथा सरकार को अवगत कराने की बात कही।
समारोह के दूसरे सत्र में अनियत कालीन बज्जिका पत्रिका बज्जिका बेआर के दूसरे अंक का लोकार्पण श्री सुरेन्द्र मानपुरी के हाथों सम्पन्न हुआ जिसके उपरांत वरिष्ठ साहित्यकार ज्वाला सांध्यपुष्प ने पत्रिका में समाहित विषयों पर अपना समीक्षात्मक वक्तव्य प्रस्तुत कर समारोह को अवगत कराया। इसके बाद देश-विदेश के कुल उन्नीस साहित्यकारों को उनके अतुलनीय योगदानों के लिए संस्था की ओर से पुष्प माल्य, अंगवस्त्रम, स्मृति चिन्ह और सम्मान पत्र देकर सम्मानित किया गया।
सम्मानित होनेवाले साहित्यकारों में नेपाल के बज्जिका कवि संजय साह मित्र को महावीर प्रसाद शर्मा ‘विप्लव’ बज्जिका शीर्ष साहित्यकार सम्मान, श्री शिवचंद्र साह को महापंडित राहुल सांकृत्यायन बज्जिका सिन्धु सम्मान,श्री बिंदा साहनी को हलधर दास बज्जिका शिरोमणि सम्मान, श्री रामचंद्र महतो कुशवाहा को महाकवि घाघ बज्जिका विशारद सम्मान,श्री किशुन दयाल श्रीकृष्ण को मांगनीराम बज्जिका भूषण सम्मान और श्री देवेंद्र चौधरी को सिंह सेनापति बज्जिका शौर्य सम्मान प्रदान कर सम्मानित किया गया।
इसके अतिरिक्त बज्जिकांचल के विभिन्न जिलों से आए साहित्यकारों में श्री ज्वाला सांध्यपुष्प, डॉo शशिभूषण कुमार, श्री मुकेश कुमार मृदुल, डॉo नांदेश्वर प्रसाद सिंह, श्री हरिविलास राय, सुधांशु कुमार चक्रवर्ती, संजय विजित्वर, प्रतिभा पाराशर, दिनेश प्रसाद ‘धुरंधर’, बशिष्ठ राय ‘वशिष्ठ’, डॉo अरुण कुमार और अभिषेक शर्मा को उपरोक्त सम्मानों से सम्मानित किया गया।
समारोह के तीसरे सत्र में अंतरराष्ट्रीय बज्जिका कवि सम्मेलन में कविता और गीतों की अनुपम रस वर्षा में श्रोता गण डूबते उतराते नजर आए।
कवि सम्मेलन में सीतामढ़ी से आएल सुरेश वर्मा, रामकिशोर सिंह चकवा, समस्तीपुर पटोरी के दुखित महतो भक्तराज, दिनेश प्रसाद धुरंधर, प्रेम कुमार पाण्डे, बशिष्ठ राय वशिष्ठ, मुजफ्फरपुर के बसंत कुमार, वैशाली के डॉo नांदेश्वर प्रसाद, सुधांशु कुमार चक्रवर्ती, संजय विजित्वर, ज्वाला सांध्यपुष्प, विद्या चौधरी, अखौरी चंद्रशेखर, हरिविलास राय, बैद्यनाथ प्रभाकर, सीमा कुमारी, पूनम कुमारी आ नेपाल के आधा दर्जन कवि भाग लेलन। धन्यवाद ज्ञापन ज्ञान ज्योति गुरुकुलम के निदेशक अजीत कुमार आर्य जी कएलन। एकरा बाद अध्यक्ष के आदेश से सभा समाप्त भेल।
