दूसरे को ठंडक पहुंचाने वाले खुद बेहाल ,अब कोई नहीं खरीदना चाहता तार के पंखे।
दूसरे को ठंडक पहुंचाने वाले खुद बेहाल ,अब कोई नहीं खरीदना चाहता तार के पंखे।
रिपोर्ट सुधीर मालाकार
।हाजीपुर (वैशाली) आज के चकाचौंध दुनिया में जहां घर-घर बिजली पहुंच चुकी है, टेबल फैन, सेलिंग फैन,कूलर ,एसी का जमाना है, वहां अब कोई हाथ के पंखे का प्रयोग बिरले ही करता है ।एक जमाना था जब घर-घर में हर व्यक्ति के हाथ में तार का पंखा या दूसरा हाथ का पंखा हुआ करता था। गर्मी से परेशान लोग तार के पंखे के सहारे अपने गर्मी को दूर भागते थे ।इस तार के पंखे से कई परिवारों की रोजी-रोटी चलती थी। तार के पंखे को बेचकर वे अपना परिवार चलाते थे लेकिन अब कोई तार के पंख खरीदने की इच्छा नहीं रखता । पंखा बेचते हुए गर्मी से परेशान नूर मोहम्मद ने बताया कि गांव-गांव में सुबह से शाम तक घूमता हूं ,10 रूपए में भी पंखा खरीदने को तैयार नहीं है ।पहले पंखा लेने के लिए लोग दूर से आवाज लगाकर मुझे बुलाते थे, अब दरवाजे दरवाजे जाने के बावजूद भी कोई पंखा लेने को तैयार नहीं होता है ।समय की मार ने पंखे वाले को भी बेरोजगार बना दिया। मिटती जा रही है, अपने हाथ की हस्त कलाकारी। सरकार को चाहिए कि इन छोटे-छोटे हस्त कारीगर को हस्तकला को जीवंत रखने के लिए आर्थिक मदद देकर इस जीवंत तार के पंखे को बचाए रखने का प्रयास करना चाहिए।
