ऑपरेशन सिंदूर वैश्विक निहितार्थ की चुनौतियों पर सेमिनार में शिक्षाविदो ने अपने विचारों को किया साझा
ऑपरेशन सिंदूर वैश्विक निहितार्थ की चुनौतियों पर सेमिनार में शिक्षाविदो ने अपने विचारों को किया साझा
महुआ। रेणु सिंह
निरसू नारायण कॉलेज सिंघाड़ा में सामाजिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसमें आए शिक्षाविदों ने अपने विचारों को साझा किया। इस कार्यशाला में लोगों ने भारतीय सेना के पराक्रम की सराहना कर उनकी दुहाई किया।
इस कार्यशाला में भारतीय सेना की पाकिस्तान के विरुद्ध किए गए ऑपरेशन सिंदूर के अलावा आवश्यकता, वैश्विक निहितार्थ और चुनौतियां विषय पर अपने विचार साझा किए। इस दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन में महुआ के अलावा विभिन्न शहरों से शिक्षाविद पहुंचे। अंग्रेजी विभाग और आईक्यूएसी के संयुक्त तत्वाधान मे किसी गया। सेमीनार की अध्यक्षता कालेज के प्राचार्य डॉ धर्मेंद्र कुमार चौधरी ने किया। कार्यक्रम का उद्घाटन अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। प्राचार्य डॉ चौधरी ने ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े पहलूओं पर चर्चा करते हुए कहा कि भारत की तेज आर्थिक तरक्की को अवरुद्ध करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय विरादरी युद्ध मे झोंकना चाहता था। अंग्रेजी विभाग के प्राध्यापक डॉ अभिमन्यु कुमार मन्नू ने विषय प्रवेश कराया। मंच का संचालन प्रो मिथलेश कुमार के द्वारा किया गया। राजनीति विभाग के प्राध्यापक डॉ अनिल कुमार ने कहा कि भारत दो परमाणु हथियार संपन्न देशों से घिरा हुआ राष्ट्र है, इसके लिए चौकस रहने की जरुरत बताया। इतिहास विभाग के प्रो संजय कुमार सिंह ने कहा कि आज का भारत अपने हिसाब से न केवल नीति बनाता है बल्कि आक्रमण भी करता है। बदलते हुए भारत के पराक्रम का ऑपरेशन सिन्दूर एक प्रतिक है। मुजफ्फरपुर के अंग्रेजी विभाग के प्राध्यापक डॉ जीतेन्द्र कुमार मिश्रा ने अनुच्छेद 370 की समाप्ति और घाटी मे अमन शांति की स्थापना पर विचार रखे। डॉ जीतेन्द्र, जेएन मिश्रा कॉलेज मुजफ्फरपुर के इतिहास विभाग की प्राध्यापिका डॉ संगीता साह ने आपरेशन सिन्दूर के महत्त्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 26 निर्दोष हिन्दू भारतीय नागरिकों की हत्या का बदला था। यह न केवल भारत के पराक्रम की श्रेष्टता सावित किया, बल्कि पश्चिमी देशों के आतंकवाद की दोहरी परिभाषा को भी उजागर किया है। डॉ रजनीश कुमार, वाराणसी के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो प्रभात कुमार सिंह ने कहा कि टेक्नोलॉजी जिसका भी कारगर होगा जीत उसी की होंगी। टेक्नोलॉजी के द्वारा भारत आत्मनिर्भर बना है।
हालांकि रामायण और महाभारत की चर्चा करते हुए कहा की युद्ध किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। डॉ शशि भूषण कुमार, प्रो संजय कुमार सिंह, प्रो अरविंद कुमार झा, डॉ अजीत कुमार सिंह, प्रो राजकुमार सिंह, डॉ संजय कुमार, डॉ धर्मेंद्र कुमार, प्रो सरोज कुमार सिंह, प्रो सभाजित सिंह, अनुज कुमार सिंह, अमित कुमार सिंह नेवी अपने विचार साझा किए। वहीं दूसरे दिन भी विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई। प्राचार्य डॉ धर्मेंद्र कुमार चौधरी के द्वारा धन्यवाद ज्ञापन किया गया। समापन पर गुरुवार को अतिथियों ने कॉलेज के संस्थापक स्व निरसू नारायण सिंह और पूर्व सचिव लक्ष्मीनारायण सिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया।
