मोहम्मद खलील को बाद नमाज असर किया गया सुपुर्द ए खाक
हाजीपुर/जन्दाहा (वैशाली)जिले के जन्दाहा ब्लॉक क रसूलपुर गांव निवासी मोहम्मद खलील मंसूरी (60 वर्ष) का निधन रविवार की सुबह फज्र की नमाज से पहले हो गया था। उनके घरवाले बाद में स्थानीय कब्रिस्तान पहुंचे और कब्र खोदने लगे।तभी गांव के ही जितेन्द्र चौधरी,शशी चौधरी,धीरज कुमार,मनोज चौधरी आदि लोग कब्रिस्तान में आकर कब्र खोदने से रोकने लगे। इस वजह से माहौल तनावपूर्ण हो गया।मुसलमानों ने डायल 112 पुलिस को फोन कर बुलाया। मौके पर पहुंची पुलिस ने एकतरफा कार्रवाई करते हुए मुसलमानों से कब्र दूसरी जगह खोदने की बात की, जिससे मुसलमान नाराज हो गए। उनका कहना था कि इस कब्रिस्तान में सदियों से वे लोग अपने मुर्दे दफन करते आ रहे हैं और कभी किसी ने उन्हें रोका नहीं।मुसलमानों ने साफ़ तौर पर दूसरी जगह कब्र खोदने से इनकार कर दिया।इसके बाद गांव के समझदार लोगों ने कई मुस्लिम नेताओं को जानकारी दी। स्थानीय थानेदार से बात की गई, लेकिन उन्होंने कहा कि वे मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में हैं। इस बीच, मुर्दा वहीं पड़ा रहा।इसके बाद मंसूरी समाज के नेता मोहम्मद लियाकत मंसूरी, सामाजिक कार्यकर्ता राजू वारसी,शाहिद रज़ा, कांग्रेस नेता मुहम्मद रूस्तम,राष्ट्रीय मुस्लिम मोर्चा के सदस्य मोहम्मद ग़ियासुद्दीन आदि ने भी थानेदार से संपर्क किया। इन लोगों की पहल और गांव के समझदार लोगों की सतर्कता के कारण माहौल शांत रहा और मुसलमानों ने संयम बरतते हुए काम लिया।लेकिन मुसलमान दूसरी जगह कब्र खोदने के लिए तैयार नहीं हुए। बाद में डायल 112 की पुलिस ने मामले को सुलझाते हुए मुसलमानों को वहीं कब्र खोदने की अनुमति दी। इसके बाद कब्र खोदी गई और मोहम्मद खलील मंसूरी को सैकड़ों शोक संतप्त लोगों ने दफनाया।नमाज़-ए-जनाज़ा गुलाम मोहम्मद खतीब और इमाम रसूलपुर जामा मस्जिद की इमामत में अदा की गई, जिसमें हर संप्रदाय के लोगों ने भाग लिया और उनके लिए दुआ की।मोहम्मद खलील मंसूरी मजदूरी करते थे। उनके पीछे पत्नी, एक बेटा और दो बेटियां हैं, जो अत्यंत दुखी हैं। इस गांव में मुसलमानों की संख्या बहुत कम है और गैर-मुस्लिमों की आबादी अधिक है।पहली बार हुआ कि इस गांव के मुसलमान के शव को दफनाने के लिए सदियों से कायम कब्रिस्तान में शरपसंदों ने रोक दिया। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ये लोग माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे थे। ये सभी लोग हिन्दु संगठन से जुड़े हुए बताए जा रहे हैं।मुसलमानों ने संयम दिखाया,पुलिस प्रशासन पर भरोसा किया और मामला शांतिपूर्ण ढंग से सुलझा। मुसलमानों ने पुलिस प्रशासन का धन्यवाद किया कि समय रहते कार्रवाई की और शव को उसी जगह दफनाया गया।