श्रद्धापूर्वक याद किए गए शहीदे आजम भगत सिंह ।
श्रद्धापूर्वक याद किए गए शहीदे आजम भगत सिंह ।
रिपोर्ट सुधीर मालाकार।
महुआ (वैशाली)प्राथमिक विद्यालय पानापुर में शहीदे आजम भगत सिंह सप्ताहिकी जयंती कार्यक्रम का आयोजन एस० यू० सी० आई० (कम्युनिस्ट ) अंचल कमेटी महुआ( दक्षिणी) की ओर से किया गया। जिसकी अध्यक्षता एस० यू० सी० आई०( कम्युनिस्ट) के नेता कामरेड जगन राय ने किया ।
कार्यक्रम की शुरुआत भगत सिंह के तेल चित्र पर पुष्पांजलि के साथ हुई। समारोह को संबोधित करते हुए डॉ ललित घोष ने कहा कि आजादी के महानायक भगत सिंह छात्र जीवन से ही भारत के आजादी के लिए छात्रों नौजवानों को संगठित करके साथ समुंदर पार से आए अंग्रेजों को भगाने के लिए संघर्षित रहे। अंग्रेजों के चाटुकार पुलिस कमिश्नर की रोंगटे खड़े करने वाले यातनाएं देता रहा ताकि भगत सिंह अंग्रेज अधिकारी के सामने समर्पण कर दें लेकिन उनके अंदर देशभक्ति की भावना खूब भरी हुई थी। देशभक्ति उनके खून में था क्योंकि उनके पिता चाचा सभी आजादी आंदोलन की लड़ाई में यातनाएं सहते हुए अनगिनत बार जेल जा चुके थे। वह समाज में व्याप्त अंधविश्वास पाखंड के खिलाफ भी लोगों को सचेत करते रहे। उनका कहना था कि स्वतंत्र भारत का तस्वीर ऐसे होगा जहां इंसान का शोषण इंसान नहीं करेगा। सभी देशवासि निर्भर होकर सम्मान के साथ जीवन यापन का अधिकार होगा। सभी को समान शिक्षा व्यवस्था होगी। लेकिन एक समझौता के तहत आजादी अधूरी मिली उस अधूरी आजादी के विरोध में उन्होंने असेंबलीहाल के पास बम विस्फोट किया था। तत्पश्चात भागे नहीं थे ।गिरफ्तारी के बाद मजिस्ट्रेट ने पूछा कि भगत सिंह तुम असेंबली हॉल के बगल में बम विस्फोट क्यों किया तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि बम विस्फोट का मेरा उद्देश्य किसी को मारना नहीं बल्कि अधूरी आजादी का विरोध करना था। भगत सिंह धार्मिक पाखंड और अंधविश्वास का विरोध किया था। जिसके कारण उन्हें नास्तिक कहा गया। आज समय की पुकार है कि समाज में जात-पात उच्च नीच से ऊपर उठकर जीवन के तमाम क्षेत्रों में व्याप्त कुव्यवस्था के खिलाफ छात्रों नौजवानों किसानों मजदूरों को सही विचारधारा के आधार पर संगठित हो जन आंदोलन की चोट से जन आंदोलन का निर्माण करते हुए निर्भीकता के साथ व्यवस्था परिवर्तन की लड़ाई को आगे बढ़ाने की जरूरत है। इसके लिए भगत सिंह सुखदेव राजगुरु सहित खुदीराम बोस राजेंद्र लहरी अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद सहित नेताजी सुभाष चंद्र बोस सहित बैकुंठ शुक्ल और गैर समझौता वादी धारा के अमर बलिदानों का जीवन संघर्ष को छात्रों नौजवानों किसानों मजदूरों के बीच ले जाना समय की पुकार है ।कार्यक्रम में अवधेश कुमार, रामलाल राय, रवि जी, विपिन कुमार ,विक्की कुमार, रविंद्र प्रसाद, प्रमोद राय, उपेंद्र राय, गौतम कुमार, रामेश्वर सहित अन्य ने भगत सिंह के जीवन संघर्ष पर विस्तार से चर्चा करते हुए आगामी विधानसभा चुनाव में जात पात और धर्म के दीवार को तोड़कर ईमानदार एवं प्रखर समाजसेवी को हर संभव मदद के साथ मदद करने की अपील किया। साथ ही भगत सिंह के जन्मदिवस को सार्वजनिक अवकाश के रूप में घोषणा करने की सरकार से मांग किया।
