पसमन्दा (राईन)मुस्लिम नेतृत्व और मुस्लिम वोट की बदलती भूमिका: कारण और आगे की राह
पसमन्दा (राईन)मुस्लिम नेतृत्व और मुस्लिम वोट की बदलती भूमिका: कारण और आगे की राह
डाक्टर प्रोफेसर राहत अली राईन राष्ट्रीय महासचिव
मधुबनी संवाददाता मो सालिम आजाद
अधिवक्ता शमशाद आलम राईन
राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं डॉ प्रो0 राहत अली राईन रास्ट्रीय महासचिव (संग़ठन)के द्वारा एक संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए उन्होंने कहा कि देश के प्रत्येक नागरिक को आल इंडिया जमीअतुर राईन की तरफ से नव वर्ष 2026 दिल की गहराइयों से मोबारक ,
देश की वर्तमान सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों में यह एक महत्वपूर्ण सच्चाई है कि राईन (पसमन्दा) मुस्लिम समाज की राजनीतिक भूमिका में समय के साथ बदलाव आया है।
एक दौर था जब पसमन्दा मुस्लिम मतदाता को निर्णायक माना जाता था, जिसकी वर्तमान जनसंख्या 85 प्रतिसत मतदाता है।लेकिन आज परिस्थितियाँ पहले जैसी नहीं रहीं।
यह बदलाव किसी एक कारण या किसी एक पक्ष की वजह से नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक सामाजिक और राजनीतिक प्रक्रिया का परिणाम है।
यह आत्ममंथन का विषय है कि आखिर ऐसा क्यों हुआ। क्या राजनीतिक दलों से अपेक्षित सहभागिता नहीं बन पाई, या फिर सामाजिक और शैक्षणिक स्तर पर वह मजबूती विकसित नहीं हो सकी, जो किसी भी समुदाय की प्रभावी राजनीतिक भूमिका के लिए आवश्यक होती है। सच्चाई यह है कि इन सभी पहलुओं पर एक साथ विचार करने की आवश्यकता है।
बीते वर्षों में देश की राजनीति में वैचारिक प्रतिस्पर्धा तेज़ हुई है और समाज के विभिन्न वर्गों के सामने नई चुनौतियाँ उभरी हैं।
ऐसे माहौल में पसमन्दा मुस्लिम समाज के सामने भी यह सवाल खड़ा है कि वह अपनी प्राथमिकताओं को किस तरह तय करे। केवल तात्कालिक प्रतिक्रियाओं या भावनात्मक रुख से स्थायी समाधान संभव नहीं होता।
यह स्वीकार करना होगा कि किसी भी समुदाय की वास्तविक शक्ति उसकी शिक्षा, आर्थिक आत्मनिर्भरता और सामाजिक एकजुटता से आती है।
जब समाज शिक्षित होता है, आर्थिक रूप से सशक्त बनता है और कानून व संविधान के दायरे में रहकर आगे बढ़ता है, तो उसका राजनीतिक महत्व स्वतः बढ़ता है।
नेतृत्व बाहर से नहीं थोपा जाता, बल्कि समाज के भीतर से ही विकसित होता है। समाज के लोग जिन्हें चुनता है उसे ही स्वीकार करता है। चाहे किसी जाति विशेष से क्यों न हो, समाज मे समाजिक न्याय होना चाहिए।
आज आवश्यकता इस बात की है कि राईन मुस्लिम समाज शिक्षा को अपनी पहली प्राथमिकता बनाए, आधुनिक और तकनीकी ज्ञान की ओर ध्यान दे, हाल के एक डिबेट मे एक मुस्लिम मदरसे के युवा ने देश के मशहूर मुस्निफ व गीतकार जावेद साहब को शिकस्त दी और रातों रात पूरी दुनिया मे शोहरत की बुलंदियो पर शिक्षा के बदौलत हो सका।
शिक्षित होने पर व्यापार और रोज़गार के नए अवसर तलाशे तथा अपने बच्चों को बेहतर भविष्य के लिए तैयार करे। साथ ही, अनावश्यक टकराव और बयानबाज़ी से बचते हुए सकारात्मक और रचनात्मक भूमिका निभाए।
लोकतंत्र में हर नागरिक की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। राईन समाज को भी धैर्य, समझदारी और दीर्घकालिक सोच के साथ आगे बढ़ने की ज़रूरत है। जब सामाजिक और आर्थिक आधार मज़बूत होगा, तो राजनीतिक सहभागिता भी अधिक प्रभावी और सम्मानजनक होगी।
ऑल इंडिया जमीअतुर राईन ( AIJR) इसी सोच के साथ समाज में जागरूकता, शिक्षा, एकता और रचनात्मक प्रयासों को बढ़ावा देने का कार्य कर रहा है। हमारा विश्वास है कि सकारात्मक सोच, संवैधानिक मूल्यों और सामाजिक सुधार के रास्ते पर चलकर ही एक सम्मानजनक और सुरक्षित भविष्य की नींव रखी जा सकती है।
मैं देश के सभी पसमन्दा समाज खासकर राईन समाज से गुजारिश करता हूँ कि एक भी परिवार का पुनरीक्षण मतदाता सूची (SIR) मे नाम छूटना नही चाहिए, साथ ही सभी अपने पाल्यो के नाम मे राईन समाज का नाम जोड़े, ताकि उनके नाम से ही पता चल सकेगा कि किस जाति का है, उन्हें नौकरी आरक्षण मे जाति जुड़े रहने की वजह से ज्यादे दस्ताबेज की दिखाने की जरूरत नही पड़ेगी।
साथ ही आधुनिक डिजिटल युग मे शिक्षा को अनिवार्य समझते हुए सभी अभिभावकों को अपने पाल्यो को शिक्षा के प्रति गम्भीरता से सोचना चाहिए।
शिक्षा अनिवार्य सिर्फ कागज़ों पर है जिसे जमीनी हकीकत पर लाने की जरूरत है।
पसमन्दा समाज मे राईन समाज की सबसे अधिक अवादी होने के वाबजूद आज पिछड़े हुए है उसकी एक ही वजह है वो है तालीम /शिक्षा को छोड़ कर हमारे समाज के लोग पैसों को तरजीह देने लगे।
लेकिन अब नई नस्ल के बच्चे शिक्षा को अहमियत दी रहे है बस उन नस्लो को दिशा दशा पर काम करने की जरूरत है।
डॉ प्रो0 राहत अली राईन
रास्ट्रीय महासचिव (संग़ठन)
आल इंडिया जमीअतुर राईन
1725 -92 रजिस्टर्ड
9572468685
