March 11, 2026

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एम्स पटना में “स्वास्थ्य सेवा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता: अनुसंधान से उपचार तक” विषय पर इंटरैक्टिव सत्र का आयोजन

एम्स पटना में “स्वास्थ्य सेवा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता: अनुसंधान से उपचार तक” विषय पर इंटरैक्टिव सत्र का आयोजन

रिपोर्ट: फातमा जहां,फुलवारी शरीफ

 

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), पटना में “स्वास्थ्य सेवा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता : अनुसंधान से उपचार तक” विषय पर एक इंटरैक्टिव शैक्षणिक सत्र का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में आधुनिक चिकित्सा पद्धति में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (ए.आई.) की बढ़ती भूमिका और स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने में इसके योगदान पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम में चिकित्सकों, शोधकर्ताओं, प्रशासकों तथा तकनीकी विशेषज्ञों ने भाग लेते हुए स्वास्थ्य प्रणाली में ए.आई. के समावेशन और इसके माध्यम से रोगी देखभाल, नैदानिक निर्णय-निर्माण तथा चिकित्सा अनुसंधान को सुदृढ़ बनाने की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया।
कार्यक्रम की शुरुआत “स्वास्थ्य सेवा में ए.आई.: चिकित्सा, प्रौद्योगिकी और नेतृत्व के दृष्टिकोण” विषय पर आयोजित पैनल चर्चा से हुई। इस सत्र की अध्यक्षता प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल, कार्यकारी निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी, एम्स पटना ने की। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने में ए.आई. की अपार संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ए.आई. आधारित तकनीकें निदान की सटीकता बढ़ाने, अस्पताल की कार्यप्रणालियों को सुव्यवस्थित करने तथा साक्ष्य-आधारित निर्णय-निर्माण को सक्षम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं, जिससे रोगी-केंद्रित और अधिक प्रभावी स्वास्थ्य सेवाएँ सुनिश्चित की जा सकती हैं।
पैनल चर्चा में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने स्वास्थ्य सेवाओं में ए.आई. के व्यावहारिक उपयोग पर अपने विचार साझा किए। डॉ. रितेश आर. धोटे, वैज्ञानिक-ई, सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (सी-डैक), पटना, ने उभरती हुई ए.आई. तकनीकों तथा उनके स्वास्थ्य प्लेटफॉर्म में बढ़ते समावेशन पर चर्चा की। डॉ. अभ्युदय कुमार, फैकल्टी इंचार्ज (आई.टी. एवं एच.आई.एस.), एम्स पटना, ने ए.आई. आधारित क्लिनिकल निर्णय-समर्थन प्रणाली को सक्षम बनाने में डिजिटल स्वास्थ्य अवसंरचना और हॉस्पिटल इन्फॉर्मेशन सिस्टम की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया। वहीं डॉ. नीरज कुमार, एसोसिएट प्रोफेसर, एम्स पटना, ने ए.आई. के नैदानिक प्रभावों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह तकनीक चिकित्सकों को प्रारंभिक रोग पहचान, जोखिम आकलन तथा व्यक्तिगत उपचार योजना बनाने में सहायक हो सकती है। सत्र का प्रभावी संचालन डॉ. पल्लम गोपी चंद, उप-फैकल्टी इंचार्ज (आई.टी. एवं एच.आई.एस.), एम्स पटना ने किया।
पैनल चर्चा के पश्चात सी-डैक के विशेषज्ञों द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग पर तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। श्री जयेश दुबे, सी-डैक, ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के मूल सिद्धांतों और आधारभूत अवधारणाओं पर प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि मशीन लर्निंग मॉडल किस प्रकार बड़े पैमाने पर उपलब्ध स्वास्थ्य डेटा का विश्लेषण कर चिकित्सकीय निर्णय-निर्माण को अधिक प्रभावी बनाते हैं और स्वास्थ्य सेवाओं के परिणामों को बेहतर बनाने में योगदान देते हैं।
चर्चा के दौरान विशेषज्ञों ने बताया कि ए.आई. पहले से ही मेडिकल इमेजिंग विश्लेषण, गंभीर रोगियों की देखभाल में पूर्वानुमान विश्लेषण, रोगों की प्रारंभिक पहचान, दवा अनुसंधान तथा व्यक्तिगत चिकित्सा (पर्सनलाइज्ड मेडिसिन) जैसे क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को रूपांतरित कर रहा है। साथ ही उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि इन तकनीकों के उपयोग के दौरान ए.आई. के नैतिक उपयोग, रोगी डेटा की गोपनीयता की सुरक्षा तथा राष्ट्रीय नियामकीय दिशानिर्देशों का पालन अत्यंत आवश्यक है।
कार्यक्रम के अंत में फैकल्टी सदस्यों एवं रेजिडेंट डॉक्टरों के साथ एक संवादात्मक चर्चा आयोजित की गई, जिसमें चिकित्सकों, डेटा वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों के बीच अंतरविषयी सहयोग के महत्व पर बल दिया गया। प्रतिभागियों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि बदलते डिजिटल स्वास्थ्य परिदृश्य के अनुरूप भविष्य की पीढ़ी के स्वास्थ्य पेशेवरों को तैयार करने के लिए चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और क्लिनिकल प्रैक्टिस में ए.आई. का समावेश अत्यंत आवश्यक है।
इस प्रकार की पहल के माध्यम से एम्स पटना डिजिटल स्वास्थ्य और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में नवाचार, अनुसंधान और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयासरत है, ताकि तकनीकी प्रगति का लाभ सीधे रोगी देखभाल और बेहतर स्वास्थ्य परिणामों के रूप में प्राप्त हो सके।

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