नाली के पानी से बजबजाती महुआ के ऐतिहासिक गांधी मैदान, प्रशासन मौन ।रिपोर्ट सुधीर मालाकार। महुआ (वैशाली) कहने को तो महुआ नगर परिषद का दर्जा प्राप्त है, लेकिन आज भी सड़को, नालियो की व्यवस्था ज्यों की त्यों बनी हुई है ।सबसे बड़ी विडंबना की बात यह है महुआ प्रखंड कार्यालय से सटे ऐतिहासिक गांधी मैदान नाली की सारंध वाली पानियों से बजबजाती दिख रही है। ऐसी बात नहीं कि स्थानीय प्रशासन को इसकी जानकारी नहीं है। सभी प्रशासनिक अधिकारी के नजरों के सामने गांधी मैदान के उत्तरी छोड़ में रहने वाले निवासियों द्वारा खुलेआम घरों कि पानी गांधी मैदान में बहाए जाते हैं ।जिसके कारण उत्तरी छोर हमेशा पानियों के जलजमाव से बजबजाती नजर आती है। वर्ष में स्वतंत्रता दिवस एवं गणतंत्र दिवस के अवसर पर प्रशासनिक अधिकारी मैदान में आकर उसकी साफ-सफाई पर ध्यान देते हैं ,क्योंकि महुआ का मुख्य ध्वजारोहण का कार्यक्रम गांधी मैदान में आयोजित होती है, इसलिए उसकी साफ सफाई की जाती है । वर्ना उसी हाल में वह परी रहती है। दुर्भाग्य की बात है ध्वजारोहण के लिए बने चबूतरा के बगल में गंदगी के अंबार से हमेशा ढकी रहती है। प्रखंड कार्यालय में आने वाले आम नागरिक भी उस मैदान को पेशाबखाने के रूप में इस्तेमाल करते हैं ।जबकि बताते चले की महुआ का गांधी मैदान प्रदेश व राष्ट्रीय स्तर के कई बड़े नेताओं के आगमन की गवाही बनी हुई है। बहुत सारे निर्णायक आंदोलन का अखाड़ा भी रही है गांधी मैदान । तत्कालीन पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने स्टेडियम का निर्माण करवाया था लेकिन उसके रखरखाव में दिलचस्पी न खेलप्रेमी को है और न स्थानीय प्रशासन को । हां देखने को मिलता है ,क्रिकेट खेलने वाले नौजवान अपने खेलने वाली जगह को साफ सफाई करके खेलते हैं या फिर किसी प्रकार का टूर्नामेंट होने पर साफ सफाई की जाती है ,नहीं तो यूं ही बाजार की नालियों के पानी खुले मैदान में बहाई जाती है । आखिर इसका जिम्मेदार कौन?