दुनिया को हंसाने वाला जूनियर महमूद साहब हुए सुपुर्दे खाक।
दुनिया को हंसाने वाला जूनियर महमूद साहब हुए सुपुर्दे खाक।
रिपोर्ट: इरफान जमियावाला
सुधीर मालाकार । मुम्बई ! जिसे सुनहले पर्दे पर नजर पड़ते ही दर्शकों के चेहरे पे अजीब सी मुस्कान बिखर जाती थी,वह इंसान सदा के लिए हमसबो के बीच से रुखसत हो गया। वह हंसमुख जूनियर महमूद साहब थे,जो जाते जाते करोड़ों चाहने वालों के आंखों में आसूं छोड़ गए ।बताते चलें कि जूनियर महमूद ६७ वर्ष की उम्र में पेट के कैंसर रोग के कारण जिंदगी के जंग से हार गए
।उन्होंने ” हाथी मेरे साथी ” , “कारवां ” , “मेरा नाम जोकर” जैसी चर्चित फिल्मो में भी जीवंत किरदार निभाया था। निधन की खबर से पूरा कला जगत शोक में डूब गया।जब जूनियर महमुद की अंतिम यात्रा निकली ,चाहने वालों की सैलाब उमड़ पड़ी ।आठ दिसंबर की शाम मशहुर हास्य कलाकार जूनियर मेहमुद् साहब को जुहू कब्रिस्तान् में मोहम्मद रफी साहब के बगल में सुपुर्दे खाक किया गया।अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में सीने जगत के कलाकार ,सामाजिक,राजनीतिक कार्यकर्ता सहित अन्य व्यक्ति शामिल थे।जिसमे जावेद जाफ़री अली खाँ, इरफान जामियावाला, टीना घई, जया भट्टाचार्य, राजू श्रेष्ट्ठा, सैलेश लोढ़ा, अली असगर, नासिर खाँ, के साथ मनसे नेता रियाज़ खाँ, कांग्रेस नेता आरिफ खाँ, के साथ साथ हजारों लोगों ने हिस्सा लिया और नम आँखों से अंतिम बिदाई दी। परबर दीगार से जन्नत बक्सने की दुआ मांगी।।
