जितिया पर्व एक महत्वपूर्ण हिन्दू त्योहार है, जो मुख्य रूप से बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड के क्षेत्रों में मनाया जाता है।
जितिया पर्व एक महत्वपूर्ण हिन्दू त्योहार है, जो मुख्य रूप से बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड के क्षेत्रों में मनाया जाता है।
वैशाली जिले के गोरौल प्रखंड क्षेत्र के सोन्धो मुबारकपुर गांव में जितिया पर्व (जिसे जीवित्पुत्रिका व्रत भी कहा जाता है) एक महत्वपूर्ण हिन्दू त्योहार है, जो मुख्य रूप से बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड के क्षेत्रों में मनाया जाता है। इस व्रत को माताएँ अपनी संतान की लंबी उम्र, खुशहाली और स्वास्थ्य के लिए करती हैं। यह व्रत अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है।
राहुल कुमार की रिपोर्ट जितिया पर्व का महत्व:
संतान की लंबी उम्र: इस पर्व का मुख्य उद्देश्य संतान की दीर्घायु और कल्याण के लिए माता द्वारा कठोर उपवास करना है
पौराणिक कथा: जितिया पर्व से जुड़ी पौराणिक कथा के अनुसार, राजा जीमूतवाहन ने अपनी जान की परवाह न करते हुए एक नाग की रक्षा की थी। उनकी इस त्याग भावना के कारण उन्हें अमरत्व का आशीर्वाद मिला, और उनका नाम इस व्रत से जुड़ गया
इस दिन माताएँ सूर्योदय से पहले स्नान कर व्रत का संकल्प लेती हैं।
व्रत के दौरान वे निराहार और निर्जला रहती हैं।
व्रत का समापन अगले दिन सूर्योदय के बाद होता है, जिसे पारण कहते हैं।
जितिया व्रत माताओं के लिए त्याग और समर्पण का प्रतीक है, जो अपने बच्चों के उज्जवल भविष्य और लंबी उम्र की कामना के साथ इसे मनाती हैं। रिपोर्ट राहुल कुमार गोरौल वैशाली बिहार
