February 10, 2026

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एनडीए में सीटों और उम्मीदवार को लेकर मंथन का दौर शुरू,

एनडीए में सीटों और उम्मीदवार को लेकर मंथन का दौर शुरू,

* अलीनगर विधानसभा सीट से नीतीश प्रभाकर चौधरी को उम्मीदवार बनाए जाने की संभावना।

कपिल कुमार झा

 

अलीनगर (दरभंगा) जब बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में महागठबंधन सरकार द्वारा जातीय गणना की गई, तब उसको लेकर कई तरह की बातें की गई। तब भाजपा ने भी उसका विरोध किया था, अब जबकि नीतीश कुमार फिर से एनडीए गठबंधन में शामिल हैं और भाजपा नीत केन्द्र सरकार ने भी जातीय गणना को स्वीकार कर लिया है तो फिर इसको लेकर विपक्षी खासकर कांग्रेस द्वारा कई तरह की बातें की जा रही है।
लेकिन बिहार जहां चुनाव में जातीय समीकरण काफी महत्वपूर्ण स्थान रखती है, वहां इस बार के विधान सभा चुनाव में पहली बार खुल कर जातीय समीकरण के आधार बनाया जा रहा है। इसमें जदयू सबसे आगे दिखाई दे रही है। नीतीश कुमार जिन्हें सामाजिक अभियंता यानी सोशल इंजीनियरिंग का मास्टर माइंड कहा जाता है, उनकी पार्टी जदयू इस बार विधानसभा चुनाव में टिकट देने से पहले उस क्षेत्र में जातीय समीकरण को आधार बनाकर रणनीति बना रहे है। तो कहा जा सकता है कि बिहार में पहली बार जातीय आधारित राजनीति का प्रयोग किया जा रहा है।
नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार में चुनाव लड़ रही एनडीए इस बार टिकट देने में जातीय समीकरण, कैंडिडेट की सामाजिक पृष्ठभूमि, क्षेत्र में उसका प्रभाव, प्रखंड स्तर तक के पार्टी नेताओं की सहमति , विधानसभा में पार्टी के द्वारा कराते गये सर्वे का रिपोर्ट और एनडीए के घटक दलों में उम्मीदवारों पर सहमति का विशेष ख्याल रखा जा रहा है। इसके पीछे का मतलब साफ और स्पष्ट है कि इस बार एनडीए अपने पच्चीस सीट के लक्ष्य को हर हाल में पूरा करना चाहता है जिसमें कहा गया है कि दो हजार पच्चीस, दो सौ पच्चीस। एनडीए के दरभंगा सम्मेलन में मंच से एनडीए के उत्साहित नेताओं ने यहां तक दावा किया था कि इस बार शायद बिहार में विपक्ष का खाता भी ना खुले। यानी 243 में एनडीए 243 सीट जीतने का स्वप्न पाले हुए है, जिस के आधार मे जातीय गणना और नीतीश कुमार की सोशल इंजीनियरिंग को माना जा रहा है।
ये तो एनडीए की बात है, स्वयं नीतीश कुमार और जदयू अपनी सीटों पर इस रणनीति पर आगे बढ़ रहा है। उसने अलीनगर विधानसभा में मंथन शुरू कर दिया है। सूत्र बताते हैं कि नीतीश प्रभाकर चौधरी इसमें अलीनगर में दूसरे नेताओं के अपेक्षा अभी काफी आगे चल रहे हैं और उनका उम्मीदवार बनना लगभग तय है। कारण वो हर उस मापदंड को पूरा करते हुए दिखाई दे रहे हैं। इसमें सबसे उपर है कि वो ब्राह्मण है और अलीनगर में “ब्राह्मण वोटर्स को संवेदनशील माना जाता है। यदि ब्राह्मण वोट एकजुट होकर किसी एक दल या उम्मीदवार के पक्ष मे जाता है, तो उसकी जीत लगभग सुनिश्चित होती है।अगर ऐसे में मुस्लिम वोटर्स साथ आ जाएं तो उसकी जीत को कोई नहीं रोक सकता है और नीतीश प्रभाकर चौधरी को लेकर दोनों ही काफी उत्साहित हैं। अलीनगर जदयू प्रखंड अध्यक्ष मुस्लिम आजाद ने ही सबसे पहले नारा दिया था ” ऊपर नीतीश नीचे नीतीश, तब होगा दो हजार पच्चीस में दो सौ पच्चीस। नीतीश प्रभाकर को लेकर अलीनगर में एक और नारा गूंज रहा है ऊपर नीतीश नीचे नीतीश, अलीनगर नीतीश ही नीतीश। सर्वे रिपोर्ट में भी वो सबसे ऊपर है। पंचायतों से लेकर प्रखंड स्तर तक पार्टी के नेताओं का उनके नाम पर सहमति है और एनडीए स्तर पर भी उनका कोई विरोध नहीं है। जानकार तो यहां तक बताते हैं की न सिर्फ पार्टी के सर्वे में वो सबसे आगे हैं बल्कि एनडीए स्तर के अभी तक हुए तीनों सर्वे में भी नीतीश प्रभाकर चौधरी सबसे आगे हैं। नीतीश प्रभाकर चौधरी क्षेत्र में एक सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर भी काफी प्रसिद्ध है, जो हर आपदा में बढ़चढ़ कर क्षेत्र के जनता के सेवा में समर्पित होकर खड़े रहते हैं। उनकी सक्रियता से एक तरफ़ जहां जदयू कार्यकर्ताओं में उत्साह जगा है,वही पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से भी उनका लगातार संपर्क बना हुआ है। स्थानीय राजनीति समझ वालों के अनुसार नीतीश प्रभाकर चौधरी को शीर्ष नेतृत्व की ओर से विधानसभा चुनाव को लेकर तैयार रहने का स्पष्ट संकेत दे दिया गया है।
अगर हम अलीनगर का वर्तमान जातिगत जनसांख्यिकी आंकड़ा को देखें तो यहां ब्राह्मण समुदाय सबसे बड़ा और सबसे संगठित वोट बैंक है, जिसकी संख्या और प्रभाव दोनों समय के साथ-साथ काफी बढ़े हैं। इसलिए किसी भी दल को यहां जीतना है, तो उसे ब्राह्मणों को साधना ही होगा। जिसके बाद यहां मुस्लिम वोटर्स दुसरे स्थान पर आते है
राजनीति के जानकार मानते हैं कि बिहार के अन्य विधानसभा क्षेत्रों में महागठबंधन या एनडीए गठबंधन को मुस्लिम, यादव, दलित, अति पिछड़ा वर्ग को संगठित करने की ज़रूरत है। लेकिन अलीनगर विधानसभा मात्र एक ऐसा क्षेत्र है जहां जातिगत आधार पर ब्राह्मणों को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता है । बता दें कि पिछले चुनाव में ब्राह्मण वोटर्स की संख्या 65,000 थी,जो वर्तमान में बढ़कर 78,000 हो गई है। वहीं मुस्लिम 42,000 से 52,000, यादव 22,000 से बढ़कर 35,000 हो गई है। इसके आलावे यहां अन्य जातियाँ जैसे दलित, कुर्मी , राजपूत, वैश्य, पासवान आदि 20,000 के करीब पहुंच गई है, जो किसी भी चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है, फिलहाल सभी नीतीश प्रभाकर चौधरी के पक्ष में खड़े दिखाई दे रहे हैं।

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