May 2, 2026

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विश्व हिंदी परिषद एवं वैशाली जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन द्वारा मनाया गया राष्ट्रकवि दिनक की जयंती

विश्व हिंदी परिषद एवं वैशाली जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन द्वारा मनाया गया राष्ट्रकवि दिनक की जयंती

दिनकर की मशहूर पंक्तियों में से एक है “सिंहासन खाली करो कि जनता आती है” : शशि भूषण

 

हाजीपुर:23 सितम्बर
हाजीपुर शहर के जगदम्बा स्थान स्थित टैगोर किड्स एंड हाई स्कूल में विश्व हिंदी परिषद एवं वैशाली जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन के संयुक्त तत्त्ववाधान में राष्ट्रकवि दिनकर जी की जयंती समारोह मनाया गया। समारोह की अध्यक्षता करते हुये विश्व हिंदी परिषद के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य एवं वैशाली जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष डॉ शशि भूषण कुमार ने कहा कि दिनकर की कविताओं में वीर रस का प्रभाव है, और उनमें ओज, विद्रोह और क्रांति की पुकार दिखती है।उनकी ‘उर्वशी’ जैसी रचनाओं में शृंगारिक भावनाओं की भी अभिव्यक्ति मिलती है।
‘रश्मिरथी’, ‘कुरुक्षेत्र’, ‘उर्वशी’, ‘संस्कृति के चार अध्याय’ आदि उनकी प्रमुख रचनाओं में से हैं।उन्हें ‘राष्ट्रकवि’ के नाम से जाना जाता है।साहित्य अकादमी पुरस्कार (‘संस्कृति के चार अध्याय’ के लिए), पद्मभूषण और ज्ञानपीठ पुरस्कार (‘उर्वशी’ के लिए) से सम्मानित किया गया है। अतिथि स्वरुप पहुचे डॉ अमर आलोक ने कहा उन्होंने अपनी कविताओं से लोगों को प्रेरित कर भारत की स्वतंत्रता की लड़ाई में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वे राज्यसभा के सदस्य भी रहे। वहीं दूसरे विशिष्ट अतिथि डॉ मदन मोहन प्रियदर्शी ने अपने विचार व्यक्त करते हुये कहा किरामधारी सिंह ‘दिनकर’ की कई पंक्तियाँ बहुत प्रसिद्ध हैं, लेकिन सबसे ज़्यादा मशहूर पंक्तियों में से एक “सिंहासन खाली करो कि जनता आती है” है, जो उनकी कविता ‘जनता की आवाज’ से ली गई है। यह पंक्ति जनता की शक्ति और उसके अधिकार को दर्शाती है और राजनीतिक व सामाजिक परिवर्तनों का प्रतीक बन गई है।
“जब नाश मनुज पर छाता है, पहले विवेक मर जाता है।” – यह पंक्ति मनुष्य के पतन और विवेकहीनता के विषय पर है।
“सच है, विपत्ति जब आती है, कायर को ही दहलाती है। सूरमा नहीं विचलित होते, क्षण एक नहीं धीरज खोते।” – यह पंक्ति वीरता और धैर्य के महत्व को बताती है। “समर शेष है, नहीं पाप का भागी केवल व्याध। जो तटस्थ हैं, समय लिखेगा उनके भी अपराध।” – यह पंक्तियाँ अन्याय के विरुद्ध खड़े होने और तटस्थ रहने वालों के अपराध को उजागर करती हैं। मंच संचालन कुंदन कृष्णा और धन्यवाद ज्ञापन स्कूल प्राचार्या पिंकी कुमारी ने किया। वही सुष्मिता वर्मा, रौशनी कुमारी,सुप्रिया कुमारी,नेहा कुमारी, लुबाना नवाज़, शाक्षी कुमारी, रेनू शर्मा, शबनम खाणम एवं विवेक रंजन उपस्थित थे।

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