सबडर्मल इम्प्लांट पर दो दिवसीय प्रशिक्षण (ट्रेनिंग) का प्रैक्टिकल अभ्यास के साथ समापन
सबडर्मल इम्प्लांट पर दो दिवसीय प्रशिक्षण (ट्रेनिंग) का प्रैक्टिकल अभ्यास के साथ समापन
फुलवारी शरीफ परवेज आलम
हाल ही में शुरू की गई ‘सबडर्मल सिंगल-रॉड इम्प्लांट’ सेवाओं के विस्तार के तहत, राज्य स्वास्थ्य समिति बिहार (SHSB) समय-समय पर स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के लिए ट्रेनिंग का आयोजन करती है ताकि प्रशिक्षित डॉक्टरों की संख्या बढ़ाई जा सके।
इसी कड़ी में, जिला स्वास्थ्य समिति, पटना ने पीएसआई इंडिया के सहयोग से 9 और 10 मार्च 2026 को ईएसआईसी बिहटा, NMCH पटना और एम्स पटना के 12 एमबीबीएस डॉक्टरों के लिए दो दिवसीय ट्रेनिंग का आयोजन किया। जिला लीड ट्रेनर के रूप में एम्स की डॉ. मुक्ता अग्रवाल और ईएसआईसी की डॉ. लता ने इस ट्रेनिंग का संचालन किया। इसमें डॉक्टरों के ज्ञान और कौशल को बढ़ाने के लिए थ्योरी के साथ-साथ प्रैक्टिकल अभ्यास भी कराया गया। एम्स में आयोजित इस दो दिवसीय कार्यक्रम में डॉ. संगम झा ने अपना बहुमूल्य सहयोग दिया। पीएसआई इंडिया के स्टेट लीड (बिहार) श्री सौरव तिवारी ने इस पूरे कार्यक्रम के समन्वय में अहम भूमिका निभाई।
एम्स पटना के कार्यकारी निदेशक प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल ने इस पहल की सराहना की। उन्होंने परिवार नियोजन की स्वास्थ्य सेवाओं को समुदाय तक पहुंचाने के लिए प्रतिभागियों की प्रतिबद्धता की तारीफ की और सबडर्मल इम्प्लांट जैसे नए तरीके के विस्तार में उनके अहम योगदान के लिए शुभकामनाएं दीं।
भारत भर के सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में गर्भनिरोधक के मौजूद विकल्पों को बढ़ाने के प्रयास में, भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने दो नए तरीके पेश किए हैं:
मेड्रोक्सी प्रोजेस्टेरोन एसीटेट – सबक्यूटेनियस (MPA-SC) इंजेक्शन (जिसे अंतरा-एससी भी कहा जाता है)
सब डर्मल गर्भनिरोधक इम्प्लांट (सिंगल रॉड)
ये परिवार नियोजन के लिए एक बहुत ही अच्छे और सुरक्षित विकल्प के रूप में उभर रहे हैं। इनमें अंतरा-एससी से 3 महीने और इम्प्लांट से 3 साल तक अनचाहे गर्भ से सुरक्षा मिलती है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के इस प्रोजेक्ट को बिहार सहित 10 राज्यों में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया गया है। बिहार में इसे सितंबर 2023 में लागू किया गया था। राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार ने पायलट प्रोजेक्ट के लिए चार जिलों को चुनकर अहम भूमिका निभाई है: पटना और भागलपुर को ‘सबडर्मल इम्प्लांट’ के लिए, और मुंगेर व शेखपुरा को ‘एमपीए-एससी’ के लिए।
पहले चरण के सकारात्मक और उत्साहजनक नतीजों को देखते हुए, अब बिहार के अन्य जिलों में भी इन नए गर्भनिरोधक विकल्पों का विस्तार किया जा रहा है। इसके तहत 11 नए जिलों में सबडर्मल इम्प्लांट सेवा शुरू करने और 13 अन्य जिलों में एमपीए-एससी सेवा का विस्तार करने की पहल की गई है। इसके साथ ही राज्य के कुल 28 जिलों में अब इन नई परिवार नियोजन सुविधाओं की पहुंच हो जाएगी।
