बिहार में जमीनी कार्यकर्ताओं के जज्बे से ‘रिफ्यूजल’ बदला ‘इकरार’ में, 7 करोड़ से अधिक लोगों ने ली दवा
बिहार में जमीनी कार्यकर्ताओं के जज्बे से ‘रिफ्यूजल’ बदला ‘इकरार’ में, 7 करोड़ से अधिक लोगों ने ली दवा
पटना- राज्य में फाइलेरिया उन्मूलन की दिशा में चलाए गए मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एमडीए) अभियान ने सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। 10 फरवरी से चले इस सघन अभियान के दौरान 8 मार्च तक प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए राज्य की 95 प्रतिशत एलिजिबल पॉपुलेशन (पात्र आबादी) तक जीवन रक्षक दवा की पहुंच सुनिश्चित की है। विभागीय डेटा के विश्लेषण से यह स्पष्ट होता है कि इस बार अभियान की सफलता केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने सामाजिक भ्रांतियों और दवा के प्रति झिझक को तोड़ने में भी बड़ी कामयाबी हासिल की है।
मिशन रिफ्यूजल कन्वर्जन: 50 हजार से ज्यादा लोगों का बदला फैसला
इस पूरे अभियान का सबसे महत्वपूर्ण और चर्चा का विषय ‘रिफ्यूजल कन्वर्जन’ यानी दवा खाने से मना करने वालों को राजी करना रहा है। शुरुआत में राज्य भर के विभिन्न जिलों से कुल 56,307 ऐसे मामले सामने आए थे, जहां लोगों ने डर, अफवाहों या जागरूकता की कमी के कारण दवा लेने से स्पष्ट रिफ्यूजल (इनकार) कर दिया था। विभाग के लिए यह एक बड़ी चुनौती थी, क्योंकि एक भी छूटा हुआ व्यक्ति संक्रमण की कड़ी को जीवित रख सकता था। लेकिन स्वास्थ्य विभाग की विशेष रणनीति के तहत इस रिफ्यूजल को ‘इकरार’ में बदलने का जो अभियान चला, उसके सुखद परिणाम सामने आए हैं। कुल क्युमुलेटिव रिफ्यूजल मामलों में से 50,868 लोगों को सफलतापूर्वक समझा-बुझाकर दवा का सेवन कराया गया, जो कुल इनकार वाले मामलों का लगभग 90 प्रतिशत है।
21 जिलों में ‘सीएचओ-लीड-पीएसपी’ के सहयोग ने बदली जमीनी हकीकत
इस अभूतपूर्व बदलाव और रिफ्यूजल कन्वर्जन के पीछे राज्य के 21 जिलों में सक्रिय सीएचओ-लीड-पीएसपी के सहयोग और उनकी टीम की मेहनत ने रीढ़ की हड्डी के रूप में काम किया। इन जमीनी कार्यकर्ताओं और सहयोगियों ने न केवल हाउस विजिट कर घर-घर जाकर दस्तक दी, बल्कि जहां भी रजिस्टेंस (प्रतिरोध) का सामना करना पड़ा, वहां धैर्य और वैज्ञानिक तर्कों के साथ लोगों का दिल जीता। इन 21 जिलों में सीएचओ-लीड-पीएसपी के सदस्यों ने स्थानीय स्तर पर लोगों की शंकाओं का समाधान किया और उन्हें यह विश्वास दिलाया कि फाइलेरिया जैसी गंभीर बीमारी से बचाव का एकमात्र रास्ता यही दवा है। इस एकीकृत टीम के माध्यम से चलाए गए समन्वित प्रयास ने उन दुर्गम और चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में भी दवा की पहुंच बनाई, जहां पहले विरोध अधिक था।
बेहतरीन कवरेज और जिलों का शानदार प्रदर्शन
रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के वैशाली जिले ने अपनी कार्यकुशलता का परिचय देते हुए लक्ष्य से अधिक 103 प्रतिशत की कवरेज प्राप्त की, जबकि शेखपुरा ने 102 प्रतिशत और गोपालगंज व शिवहर जैसे जिलों ने शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर राज्य की औसत सफलता दर को 95 प्रतिशत तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। पूरे राज्य में कुल 1.62 करोड़ से अधिक घरों का हाउस विजिट किया गया, जिसमें पश्चिमी चंपारण जैसे जिलों ने सर्वाधिक घर भ्रमण कर एक मिसाल पेश की। अब पूरे प्रदेश में केवल 5,439 ऐसे रिमैनिंग रिफ्यूजल मामले शेष रह गए हैं जिन्हें दवा नहीं दी जा सकी है, और विभाग इन पर भी निरंतर कार्य कर रहा है।
स्वास्थ्य विभाग का सकारात्मक दृष्टिकोण
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का मानना है कि ग्रासरूट लेवल पर सक्रिय सीएचओ-लीड-पीएसपी के आपसी तालमेल और समर्पण के कारण ही आज बिहार फाइलेरिया मुक्त होने की दिशा में तेजी से अग्रसर है। रिफ्यूजल करने वाले 90 प्रतिशत लोगों का मन बदलना यह दर्शाता है कि सामुदायिक स्तर पर स्वास्थ्य कर्मियों के प्रति विश्वास बढ़ा है और लोग अब अपने स्वास्थ्य के प्रति पहले से कहीं अधिक जागरूक हो रहे हैं। यह सक्सेस स्टोरी भविष्य के अन्य स्वास्थ्य अभियानों के लिए भी एक रोल मॉडल साबित होगी।
